Home संपादकीय नशेबाज सितारे

नशेबाज सितारे

32
0

शाहरुख खान के लड़के आर्यन खान के मामले से उसे और उघाड़कर रख दिया है। सिनेमा जगत का यह चेहरा इतना विद्रूप है कि फिल्म अभिनेताओं के लिए उपयोग होने वाले ‘हीरो शब्द का उपयोग सर्वथा बंद कर देना चाहिए। नशे की गिरफ्त में फंसे सितारे कभी भी समाज के लिए प्रेरणा के स्रोत नहीं हो सकते।


फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह की आत्महत्या ने सिनेमा के जिस विद्रूप चेहरे को उजागर किया था, शाहरुख खान के लड़के आर्यन खान के मामले से उसे और उघाड़कर रख दिया है। सिनेमा जगत का यह चेहरा इतना विद्रूप है कि फिल्म अभिनेताओं के लिए उपयोग होने वाले ‘हीरो शब्द का उपयोग सर्वथा बंद कर देना चाहिए। नशे की गिरफ्त में फंसे सितारे कभी भी समाज के लिए प्रेरणा के स्रोत नहीं हो सकते। ड्रग्स और शराब के नशे में डूबे हुए लोग भला किसी को क्या सीख दे सकते हैं?

ड्रग्स/नशे की आदत सिर्फ नशे तक सीमित नहीं रखती है, बल्कि यह अपराध के दूसरे रास्ते पर भी लेकर जाती है। इसी फिल्म जगत का एक बड़ा अभिनेता आतंकवाद के आरोप में जेल की सजा काट चुका है। मुंबई बम धमकों के बाद उसके घर से एके-47 बरामद की गई थी। मुम्बई में माफिया डान दाऊद ने फिल्मी हस्तियों के सहयोग से आर्थिक राजधानी को नशे की राजधानी बनाने में सफलता प्राप्त कर थी। उसके बाद से पूरे देश में नशे का कारोबार फैल गया। पिछले दिनों मुंद्रा बंदरगाह पर तीन हजार किलो हेरोइन पकड़ी गई, जिसे टेल्कम पाउडर बताकर अफगानिस्तान से भारत लाया गया था।

सोचिए, इतनी मात्रा में आई हेरोइन कितने लोगों तक पहुँचती? नशे के कारोबार ने भारत के प्रतिभाशाली युवाओं को खत्म कर दिया है। नशे की आदत न होती तो शायद सुशांत सिंह जैसा प्रतिभाशाली कलाकार हमारे बीच में होता। क्रूज में चल रही रेव पार्टी से पकड़े गए शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान के प्रकरण में भी अनेक चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। पहले कहा गया कि आर्यन खान को वहाँ बुलाया गया था, अब पता चला है कि उसके पास से ड्रग्स बरामद हुआ है। यह भी तथ्य सामने आए हैं कि ड्रग्स खरीदने के लिए डार्कनेट का उपयोग किया जाता है। यह सबको पता है कि डार्कनेट का उपयोग शातिर अपराधी करते हैं। रेव पार्टी के जो फुटेज सामने आए हैं, उनसे पता चलता है कि नशे डूबे लोग बेहूदा आचरण करते हैं।

नशेबाज सितारे अधनंगे होकर नाच रहे थे। इस तरह के आयोजन समाज को किस दिशा में धकेल रहे हैं? यह विचारणीय प्रश्न है। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि फिल्म निर्माता और फिल्म जगत से जुड़े लोग इस प्रकार के ‘कल्चर को प्रतिष्ठा देकर उसे बढ़ावा देते हैं। यही कारण है कि वर्ष-दर-वर्ष न केवल शराब की खपत बल्कि घातक ड्रग्स की खपत भी बढ़ती जा रही है। भारत की युवा पीढ़ी को नशे की गिरफ्त से बचने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी ‘ड्रग्स फ्री इंडिया अभियान का आग्रह किया है।

चूँकि वह युवाओं की ताकत को समझते हैं इसलिए उन्होंने इस अभियान को जरूरी समझा। प्रधानमंत्री मोदी ने चिंता व्यक्त की थी कि हमारे देश के युवा गुटका, चरस, गांजा, अफीम, स्मैक, शराब और भांग आदि के नशे में पड़ कर बर्बाद हो रहे हैं। इस कारण से वे आर्थिक, सामाजिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से विकलांगता की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

उम्मीद है कि हम प्रधानमंत्री मोदी की बात को ही नहीं अपितु अपने अंतर्मन को सुनेंगे और नशे से दूर रहेंगे। आर्यन खान प्रकरण में प्रशासन को गहन जांच एवं कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। यह मामला मीडिया की सुर्खियों तक न रहे। नशे का कारोबार चलाने वालों के गिरेबां कानून के शिकंजे में होना चाहिए।

Previous articleयुवा लेखकों का स्तंभ : पर्यावरण संरक्षण में सामाजिक माध्यमों का प्रयोग अहम
Next articleपरछाई का रहस्य

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here