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पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के मामले में कांग्रेस की हवाबाजी

कांग्रेस की कथनी-करनी में भारी अंतर होने के कारण भी जनता उस पर विश्वास नहीं कर पा रही है। एक ओर राहुल गांधी जातिगत जनगणना, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिलाओं के मुद्दे उठाकर उनकी हिस्सेदारी बढ़ाने की बात करते हैं लेकिन जब अवसर आता है तो कांग्रेस इस मुद्दों को भूल जाती है। मध्यप्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों की सूची देखें तो ध्यान में आता है कि पिछड़ा वर्ग और महिलाओं को टिकट देने के मामले में भाजपा के मुकाबले कांग्रेस बहुत पीछे रह गई है। भाजपा ने जहाँ 29 में से 10 पिछड़ा वर्ग से आनेवाले नेताओं को अपना उम्मीदवार बनाया है, वहीं कांग्रेस ने केवल 5 ओबीसी चेहरों को मौका दिया है। यदि कांग्रेस की कथनी-करनी एक होती तो यहाँ उसे बड़ी संख्या में ओबीसी प्रत्याशी मैदान में उतारने चाहिए थे। इसी तरह कांग्रेस महिलाओं को अवसर देने और उन्हें बराबरी का अधिकार देने की बातें तो करती है लेकिन अवसर आने पर यहाँ भी वही हाल हैं- कथनी-करनी में भारी अंतर। कांग्रेस ने मध्यप्रदेश में केवल एक ही महिला को अपना उम्मीदवार बनाया है। कहाँ गया महिलाओं को 30 प्रतिशत और 50 प्रतिशत भारीदारी का वादा? वहीं, भाजपा ने 6 महिला उम्मीदवारों पर विश्वास जताया है। यानी भाजपा ने 20 प्रतिशत से अधिक महिला उम्मीदवारों को अवसर दिया है। याद हो जब मोदी सरकार ने देश की लोकसभा और सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने वाले विधेयक ‘नारी वंदन अधिनियम-2023’ को लोकसभा और राज्यसभा रखा था तब कांग्रेस ने भाजपा की नीयत पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि इसे 2029 से लागू करने की जगह 2024 से ही लागू क्यों नहीं किया गया? कांग्रेस को सच में महिलाओं की भागीदारी की चिंता थी, तो उसे लोकसभा चुनाव-2024 में अपनी ओर से देशभर में 33 प्रतिशत महिलाओं को टिकट देकर लकीर खींच देनी चाहिए थी। सोचिए, जो कांग्रेस मोदी सरकार की नीयत पर सवाल उठा रही थी, उसने मध्यप्रदेश में केवल एक महिला को टिकट दिया है। इससे एक बात साफ होती है कि कांग्रेस केवल ढोल बजाती है जबकि भाजपा क्रियान्वयन में विश्वास रखती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सदैव ‘सबका साथ-सबका विकास’ के विचार में अपना विश्वास दिखाया है और उसी दिशा में निर्णय भी लिए हैं। भाजपा और कांग्रेस के बीच का यह अंतर जनता को भी स्पष्ट दिखायी देता है। जनता देख पा रही है कि कांग्रेस ओबीसी और महिलाओं को सशक्त करने की बातें ही कर रही है, वहीं भाजपा सभी वर्गों के उत्थान एवं महिला सशक्तिकरण के नये आयाम स्थापित करने के लिए धरातल पर काम कर रही है। जब देश की जनता यह सब देख पा रही है, तब वह भाजपा की अपेक्षा कांग्रेस पर विश्वास क्यों करेगी? क्योंकि कांग्रेस अपने विचारों पर अभी ही खरी नहीं उतर रही है तो आगे वह अपने वायदों पर शत-प्रतिशत कायम रहेगी, इसकी क्या गारंटी है? वास्तव में लोकसभा चुनाव में टिकट वितरण करते समय कांग्रेस के पास अवसर था कि वह अपनी नीति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दिखा पाती है। शीर्ष नेता जो विचार प्रकट कर रहे हैं, सार्वजनिक भाषणों में बार-बार जो दावे कर रहे हैं, व्यवहार में उनका अनुपालन कहीं तो दिखायी देना चाहिए। अन्यथा देश की जनता को विश्वास कैसे होगा? कांग्रेस के बनिस्वत भाजपा के नेता जो कह रहे हैं, धरातल पर उसका क्रियान्वयन होते हुए जनता देख पा रही है। इसलिए ही देश की जनता का भरोसा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा सरकार के प्रति बढ़ता जा रहा है।

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