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हिन्दू हितों की चिंता

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की संयुक्त प्रेसवार्ता में जो कुछ कहा गया, उससे दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों की झलक मिलती है। यह अच्छी बात है कि ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री उदार मन के हैं और भारतीय नागरिकों की संवेदनाओं को समझते हैं। भारत के प्रति उनके मन में मित्रता और सम्मान का भाव है। एक दिन पूर्व ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उन्होंने ‘बॉस’ कहकर सबको इस बात का अहसास करा दिया कि वैश्विक राजनीति में मोदीजी की भूमिका प्रभावशाली नेता के रूप में है। दोनों देशों के प्रधानमंत्री एक-दूसरे का सम्मान करते हैं और एक-दूसरे को भली प्रकार समझते हैं इसलिए खुलकर संवेदनशील मुद्दों पर भी बात कर लेते हैं। पिछले कुछ समय से ऑस्ट्रेलिया में हिन्दू मंदिरों एवं हिन्दू समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है। मंदिरों पर हमले किए जा रहे हैं और दीवारों पर आपत्तिजनक नारे लिखे जा रहे हैं। कट्‌टरपंथियों की इन हरकतों से हिन्दू समुदाय चिंतित है। ऑस्ट्रेलिया में बड़ी संख्या में हिन्दू रहते हैं। हिन्दू समाज शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास रखते हुए ऑस्ट्रेलिया की प्रगति में सहयोगी है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया की शासन व्यवस्था भी इन हमलों को लेकर चिंतित है। पूर्व में जब भारत ने ऑस्ट्रेलिया की सरकार के सामने इस मुद्दे को रखा था, तब प्रधानमंत्री अल्बनीज ने खुलकर कहा था कि उपद्रवियों की इन हरकतों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हिन्दू मंदिरों पर हमलों के मामलों में सरकार कड़ी कार्रवाई करेगी। यह कहना होगा कि उसके बाद से इस प्रकार की घटनाओं में बहुत कमी आई है लेकिन हिन्दू समाज पूरी तरह चिंता मुक्त नहीं हुआ है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हिन्दू मंदिरों पर हमले के मुद्दे को उठाकर साफ संदेश दिया है कि हिन्दू दुनिया के किसी भी कोने में रहें, अब वे अपने को बेसहारा बिल्कुल न समझें। भारत की सरकार बिना किसी संकोच के उनके हितों के साथ खड़ी है। उल्लेखनीय है कि पूर्ववर्ती सरकारों से प्रवासी हिन्दुओं को इस प्रकार का सहयोग एवं आत्मविश्वास नहीं मिलता था। यही कारण है कि विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों का आत्मविश्वास बढ़ा हुआ है और अपने भारतीय मूल के नागरिक होने पर उन्हें गर्व होता है, जिसे वे खुलकर व्यक्त भी कर पाते हैं। भारतीय प्रधानमंत्री मोदी से मिलनेवाली इस आत्मीयता एवं विश्वास को प्रवासी भारतीय किस तरह लौटाते हैं, यह अमेरिका से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक होनेवाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनके उत्साह को देखकर समझा जा सकता है। बहरहाल, प्रधानमंत्री मोदी ऑस्ट्रेलिया के साथ आपसी संबंधों को नये स्तर पर लेकर गए हैं। ऑस्ट्रेलिया में प्रधानमंत्री मोदी ने ‘लिटिल इंडिया गेटवे’ की स्थापना की और ब्रिसबेन में वाणिज्य दूतावास खोलने की घोषणा भी की। ऑस्ट्रेलिया के ब्रिसबेन में लंबे समय से वाणिज्य दूतावास की माँग की जा रही थी। कुल मिलाकर कहना होगा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के आपसी संबंधों में जिस प्रकार का सम्मान एवं विश्वास दिखायी दे रहा है, उसका लाभ दोनों देशों को होगा।

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