Home » पाकिस्तान में गृहयुद्ध के हालात

पाकिस्तान में गृहयुद्ध के हालात

पाकिस्तान की हालत बद से बदतर होती जा रही है। आर्थिक सहायता के लिए दुनियाभर में हाथ पसार रहे पाकिस्तान में अब गृहयुद्ध के हालात बनने गले हैं। आर्थिक संकट के साथ ही राजनीतिक भूचाल और इस्लामिक चरमपंथियों की सक्रियता ने पाकिस्तान को गहरे अंधे कुएं में धकेल दिया है। अभी कुछ दिन से पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर पाकिस्तान में खूब घमासान हुआ। इमरान खान को गिरफ्तार करने का हाईटेंशन ड्रामा भले ही समाप्त होता दिख रहा है, लेकिन आनेवाले समय में राजनीतिक उठा-पटक बाकी है। तोशाखाना के उपहार मामले में इमरान खान के लिए गैर जमानती वॉरंट जारी हुआ था। इसे तामील करने के लिए लाहौर में पुलिस जब उनके घर पहुंची तो इमरान समर्थकों ने उसे रोक लिया। पूरी रात इमरान खान के समर्थक उनके घर के बाहर डटे रहे तो पुलिस ने भी जमकर आंसू गैस के गोले छोड़े, पानी की बौछारें कीं। इस दौरान इमरान समर्थकों ने भी आगजनी की, पुलिस वालों को पीटा तो पाक सेना से रेंजर्स बुला लिए गए। रेंजर्स के आने के बाद इमरान खान ने आरोप लगाया कि ‘लंदन’ के इशारे पर सेना उनकी हत्या करना चाहती है। दरअसल, पूर्व पीएम नवाज शरीफ इन दिनों लंदन में निर्वासित हैं। बहरहाल, निहत्थे लोगों से चौबीस घंटे से भी अधिक वक्त तक चले संघर्ष के बाद जब बुधवार को इमरान की गिरफ्तारी पर दुनिया भर की नजरें टिक गईं, तब कहीं जाकर पुलिस और रेंजर्स पीछे हटे। हालांकि पाक सरकार पीछे हटने की वजह लाहौर में होने वाले पाक क्रिकेट लीग का मैच बता रही है, मगर साफ है कि यह संघर्ष लंबा खिंचता तो कहीं न कहीं पाकिस्तान को मिलने वाली माली इमदाद पर भी असर पड़ता, जिसे पाने के लिए वह पिछले काफी दिनों से छटपटा रहा है। फिलहाल लाहौर में शांति है, मगर जिस तरह से तहरीक-ए-इंसाफ ने देश भर में आंदोलन का एलान किया है, कहा नहीं जा सकता कि यह शांति कितने दिनों तक बरकरार रहेगी। पाकिस्तान में सेना को लेकर इमरान ने जैसा कड़ा रुख अख्तियार किया है, सेना भी अपने भविष्य को लेकर सशंकित है। इमरान ने सेना प्रमुख पर भी उनकी हत्या करने साजिश रचने का आरोप लगाया है। हालांकि सेना का कहना है कि सेना प्रमुख आसिम मुनीर घटना के वक्त वहां से 750 किलोमीटर दूर वजीराबाद में थे, इसलिए उनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है। मगर लोग सेना का भरोसा नहीं कर रहे हैं तो इसका साफ मतलब है कि इमरान अपनी बात आम लोगों तक पहुंचाने में कामयाब रहे हैं। वैसे इमरान कोई पहले नेता नहीं हैं, जो सेना के आक्रोश का सामना कर रहे हैं या फिर जिन्होंने तोशाखाना से उपहार न लिए हों। खुद तोशाखाने की रिपोर्ट में है कि 2002 के बाद वहां जितने भी प्रधानमंत्री बने, किसी ने भी अपने उपहार नहीं छोड़े। लेकिन इमरान उन सभी नेताओं में पहले नेता जरूर हैं जो सेना की हरकतें और बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं। परंतु पाकिस्तान के साथ समस्या यह है कि इतना सब होने के बाद भी वह सबक नहीं लेगा। उसकी नीतियां अब भी आतंकवाद और चरमपंथियों को पालने-पोषनेवाली ही रहेंगी। पाकिस्तान के नेतृत्व एवं जनता जितनी जल्दी अपनी समस्या को समझकर, उसके अनुरूप नये पाकिस्तान के निर्माण की दिशा में आगे बढ़े, तब ही पाकिस्तान का भला हो सकता है।

Swadesh Bhopal group of newspapers has its editions from Bhopal, Raipur, Bilaspur, Jabalpur and Sagar in madhya pradesh (India). Swadesh.in is news portal and web TV.

@2023 – All Right Reserved. Designed and Developed by Sortd