आतंक पर वार

Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on linkedin
LinkedIn
Share on pinterest
Pinterest
Share on pocket
Pocket
Share on whatsapp
WhatsApp

अमेरिका ने 9/11 के आतंकवादी हमले के जिम्मेदार एवं अलकायदा सरगना अल जवाहिरी को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में ड्रोन स्ट्राइक में मारकर बड़ा सन्देश दिया है। अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि जो उसके लिए लोगों के लिए खतरा बनेगा, वह दुनिया के किसी भी कोने में छिप जाए, अमेरिका उसे खोजकर मार गिराएगा। याद हो कि इससे पहले अमेरिका ने 9/11 के आतंकी हमले के साजिशकर्ता ओसामा बिन लादेन को भी उसके बिल में घुसकर मारा था। आतंकी अल जवाहिरी के मारे जाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो. बाइडेन ने राष्ट्र को संबोधित करते समय यही सन्देश दिया- “हमने जवाहिरी को ढूंढकर मार दिया है। अमेरिका और यहां के लोगों के लिए जो भी खतरा बनेगा, हम उसे नहीं छोड़ेंगे। हम आतंक पर अफगानिस्तान में हमला जारी रखेंगे”। अमेरिका से यह बात बाकी सब देशों को भी सीखनी चाहिए और आतंकियों को ख़त्म करने के लिए अभियान चलाना चाहिए। इजराइल भी आतंकियों को ढूंढ-ढूंढकर खत्म करने के लिए जाना जाता है। 2014 के बाद से भारत ने भी मानवता के दुश्मनों को उनके किये की सजा दिलाने के प्रयास प्रारंभ कर दिए हैं। सर्जिकल और एयर स्ट्राइक को इसी सन्दर्भ में देखा जाना चाहिए, जब भारत ने आतंकवाद के संरक्षक पाकिस्तान में घुसकर आतंकियों को मार गिराया। हालाँकि, अभी भी भारत के बड़े अपराधी पकड़ से दूर हैं। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से पहली बार यह आस जागी है कि भारत पर बड़े आतंकी हमलों के दोषी लश्कर सरगना हाफिज सईद, जैश-ए-मोहम्मद के मौलाना मसूद जहर, सैयद सलाहुद्दीन और दाऊद इब्राहिम जैसों का भी हिसाब-किताब होगा। इन्हें भी घर में घुसकर मारा जा सकता है। उम्मीद है कि वह दिन जल्दी आएगा, जब ये सब भी एक-एक करके गिरेंगे। यहाँ एक बात ध्यान में रखें, ऐसा बिलकुल भी नहीं है कि भारत इन्हें घेरने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रहा होगा। अमेरिका को भी अल जवाहिरी को मारने में पहली बार में ही सफलता नहीं मिली है। लम्बे समय की प्रतीक्षा और कई प्रयासों के बाद यह सफलता मिली है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि यह उसका आखिरी हमला नहीं है, बल्कि आतंकवाद को ख़त्म करने की उसकी लड़ाई जारी रहेगी। जब अमेरिका ने यह संकल्प कर ही लिया है तो उसे यह भी समझना होगा कि आतंकवाद के विरूद्ध यह लड़ाई अकेले-अकेले लड़कर नहीं जीती जा सकती है। अमेरिका के लिए यह ठीक होगा कि उस पर हमला करने वाला कोई आतंकी बचेगा नहीं लेकिन आतंकवाद पर वास्तविक जीत दर्ज करने के लिए इस दृष्टिकोण को बड़ा करने की आवश्यकता है। दृष्टि यह होनी चाहिए कि आतंकवाद कहीं भी मानवता के लिए खतरा बनेगा, हम मिलकर उसे ख़त्म करेंगे। भारत लम्बे समय से वैश्विक पटल पर यह समझ विकसित करने का प्रयास कर रहा है कि आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई के लिए सबको साथ आने की आवश्यकता है। आतंकवाद किसी एक-दो देश के लिए खतरा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक संकट है। भारत लम्बे समय से आतंकवाद का सामना करता आ रहा है लेकिन पूर्व में उसकी बात को सबने अनदेखा किया लेकिन जैसे ही अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस सहित अन्य बड़े देशों को भी आतंकियों ने निशाना बनाना शुरू किया तो सबको आतंकवाद का सच समझ आ गया। लेकिन अब भी आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक स्तर पर कोई साझा अभियान की योजना और सहमति नहीं बन सकी है। याद रखें कि आतंकवाद पर निर्णायक वार करना है तो भारत की बात को सबको न केवल सुनना पड़ेगा बल्कि आतंकवाद पर मिलकर हमला करना होगा। अन्यथा यह क्रम चलता रहेगा कि ओसामा बिन लादेन को मारेंगे तो अल जवाहिरी आ जायेगा, अल जवाहिरी को मारा है तो कोई और आ जायेगा…

Never miss any important news. Subscribe to our newsletter.

Leave a Reply

Recent News

Related News