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सेवा, समर्पण और सुशासन के 20 वर्ष

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प्रधानमंत्री मोदी ने अपने इस 20 वर्ष में स्वयं को विकास पुरुष एवं जनसेवक के रूप में स्थापित किया है। अपने इतने लंबे कार्यकाल में वे बेदाग छवि के राजनेता के रूप में भी स्थापित हुए हैं। कोई भी उन पर एक रुपये के आर्थिक भ्रष्टाचार का आरोप सिद्ध नहीं कर सकता है।

विश्व में सर्वाधिक लोकप्रिय राजनेता नरेन्द्र मोदी को सार्वजनिक जीवन में दायित्व संभालते हुए 20 वर्ष हो गए हैं। 7 अक्टूबर, 2001 को उन्होंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की थी और 2014 से देश को प्रधानमंत्री के रूप में सशक्त नेतृत्व प्रधान कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने इस 20 वर्ष में स्वयं को विकास पुरुष एवं जनसेवक के रूप में स्थापित किया है। अपने इतने लंबे कार्यकाल में वे बेदाग छवि के राजनेता के रूप में भी स्थापित हुए हैं। कोई भी उन पर एक रुपये के आर्थिक भ्रष्टाचार का आरोप सिद्ध नहीं कर सकता है।

सबको ध्यान है कि 2019 के चुनाव में कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी की ओर से राफेल का मुद्दा उठाकर उनकी इसी छवि को जनता के बीच धूमिल करने का प्रयास किया गया था लेकिन जनता को नरेन्द्र मोदी की ईमानदारी पर पूर्ण भरोसा है। 20 वर्ष के कार्यकाल में यह भरोसा कभी डिगा नहीं। प्रधानमंत्री मोदी की छवि विकास पुरुष और ईमानदार राजनेता के इतर एक सशक्त, दृढ़ और दूरदृष्टि राजनेता के रूप में भी बनी है।

उनके कार्यकाल में ऐसे निर्णय भी हुए हैं, जिनके बारे में लगभग यह मानस बन गया था कि ये मामले कभी हल नहीं होंगे। इनमें जम्मू-कश्मीर में लागू विवादास्पद अनुच्छेद-370 एवं 35ए, अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण, आतंकवादी घटनाओं पर लगाम इत्यादि प्रमुख हैं। आर्थिक सुधारों की दिशा में मोदी सरकार ने उल्लेखनीय कदम उठाए हैं।

राज्यों के साथ सहमति बनाकर जीएसटी जैसी व्यवस्था को लागू कराया। डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा दिया। कांग्रेसनीत यूपीए सरकार में बनी भ्रष्टाचार की संस्कृति को समाप्त किया। पिछले 7 वर्ष में कोई आर्थिक घोटाला नहीं हुआ है। विभिन्न शासकीय योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जा रहा है। किसानों के हित में सरकार ने बड़े निर्णय लिए हैं। किसान सम्मान निधि के रूप में छोटे किसानों को सरकार नकद आर्थिक सहायता देकर उनके हाथ मजबूत कर रही है। बिचौलियों का खेल खत्म होने लगा है। आज लगभग प्रत्येक व्यक्ति को बैंक से जोड़ा जा चुका है।

आर्थिक सुधारों के लिए सरकार ने विमुद्रीकरण जैसा कठोर निर्णय भी लिया। आर्थिक सुधार के ठोस उपायों का ही परिणाम रहा कि कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न वैश्विक एवं ऐतिहासिक मंदी का सामना भारतीय अर्थव्यवस्था कर सकी। कोरोनाकाल में प्राथमिकता के आधार पर अंत्योदय वर्ग की चिंता करके उन्होंने एक बार फिर यह साबित किया कि उनकी सरकार सेवा के लिए समर्पित है। चूँकि मोदी सरकार की नीयत साफ है इसलिए इस सरकार के प्रत्येक निर्णय को जनता का सहयोग मिलता है। विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार भविष्य में भी पारदर्शिता के साथ सेवा, समर्पण और सुशासन के अपने मार्ग पर आगे बढ़ती रहेगी।

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