भारत और बांग्लादेश के मजबूत होते रिश्ते

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अभी हाल ही में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत की यात्रा पर आई थीं। उनकी यह यात्रा कई कारणों से चर्चा में रही। इस यात्रा से भारत और बांग्लादेश के रिश्ते थोड़े और प्रगाढ़ हुए हैं। प्रधानमंत्री हसीना ने भारत की भूमिका को बांग्लादेश के लिए बहुत महत्वपूर्ण बताया है। भारत और बांग्लादेश की प्रगति के लिए दोनों देशों के बीच बेहतर रिश्तों की आवश्यकता है। अच्छी बात यह है कि यह बात दोनों देशों के प्रमुख समझते हैं। आपसी हित को देखते हुए इस बार दोनों देशों ने परस्पर सहयोग के लिए सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। उनमें सबसे महत्त्वपूर्ण है कुशियारा नदी के जल बंटवारे को लेकर हुआ समझौता। इससे दक्षिणी असम और सिलहट क्षेत्र के लोगों को काफी लाभ मिलेगा। दोनों देशों के बीच 54 नदियां प्रवाहित होती हैं, जिनके जल को लेकर विवाद उठते रहते हैं। कुशियारा नदी जल समझौते से उन नदियों के पानी के प्रबंधन को लेकर भी उम्मीद जगी है। भारत ने लगभग 47 साल पहले फरक्का नदी पर बांध बनाया, तो बांग्लादेश ने उसका कड़ा विरोध किया था, मगर 25 साल पहले दोनों देशों के बीच 30 साल के लिए गंगा जल बंटवारे पर समझौता हुआ, तो वह विरोध समाप्त हो गया था। फिर भी गंगा में मिलने वाली नदियों के पानी को लेकर कभी-कभार विरोध के स्वर उठ जाते हैं। दरअसल, दो देशों या फिर दो राज्यों के बीच होकर गुजरने वाली नदियों के पानी को लेकर विवाद नए नहीं हैं, उनके पानी के उचित प्रबंधन की जरूरत होती है। इसके लिए अगर व्यावहारिक समझौते हों, तो जल-विवाद आसानी से हल किए जा सकते हैं। भारत-बांग्लादेश ने इस दिशा में एक उत्साहजनक कदम उठाया है। इस समझौते के साथ दोनों देशों ने आतंकवाद से निपटने में सहयोग का संकल्प भी एक बार फिर से दोहराया है। हालांकि इसे लेकर दोनों देशों के बीच पहले से समझौते हैं। मगर बांग्लादेश में पूर्वोत्तर के आतंकवादियों, हरकत-उल-जिहाद-इस्लामी जैसे संगठनों के उपद्रवियों के पनाह लेने के आरोप लगते रहते हैं। ये संगठन वहां भारत-विरोधी गतिविधियों के लिए लोगों को उकसाते रहते हैं। पिछले कुछ सालों में वहां हुए हिंसक आंदोलनों के चलते भारत की चिंता बढ़ गई थी। ऐसे में भारत ने विशेष रूप से इन गतिविधियों का उल्लेख किया। आतंकवाद पर बांग्लादेश का दर्द भी प्रधानमंत्री शेख हसीना ने खुलकर प्रकट किया। रोहिंग्या मुसलमानों के आने से जिस तरह बांग्लादेश में आपराधिक गतिविधियां बढ़ी हैं, उससे वहाँ की सरकार काफी चिंतित है। अपनी जिन हरकतों के कारण रोहिंग्याओं को म्यांमार से शांतिप्रिय बौद्धों ने खदेड़ा था, बांग्लादेश में उन्हीं हरकतों को रोहिंग्याओं ने जारी रखा। अर्थात् जिस देश ने उन्हें शरण दी, अब रोहिंग्या मुसलमान उसी देश के लिए सिरदर्द बन गए हैं। बांग्लादेश में ड्रग्स की तस्करी, महिलाओं की तस्करी और अन्य अपराधों में रोहिंग्या शामिल हैं, यह बात स्वयं प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बताई है। उन्होंने यह अपेक्षा भी व्यक्त की है कि भारत इनकी वापसी में बांग्लादेश का सहयोग करे। परंतु भारत तो स्वयं ही इन रोहिंग्याओं के उत्पात से परेशान है। भारत में भी बड़ी संख्या में रोहिंग्या घुसपैठ करके आ गए हैं, जिन्हें यहाँ के तथाकथित उदारवादी लोगों की सहानुभूति भी प्राप्त है। जो सत्य बांग्लादेश ने स्वीकार कर लिया, उसे ये तथाकथित उदारवादी स्वीकारने के लिए तैयार नहीं है। तब ऐसा लगता है कि भारत के लिए संकट बननेवाले सभी तत्वों के प्रति इस वर्ग की सहानुभूति होती है। बहरहाल, रोहिंग्याओं को म्यांमार भी शायद ही स्वीकार करे क्योंकि उसका दावा है कि उसके लिए भी रोहिंग्या घुसपैठिए हैं। रोहिंग्या म्यांमार मूल के नहीं हैं। जब तक इनकी वापसी की कोई राह नहीं बनती तब तक बांग्लादेश और भारत, दोनों को ही इन पर निगरानी रखनी चाहिए।

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