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सेंसेक्स पहली बार 60 हजार अंक के पार हुआ बंद, निफ्टी का नया रिकॉर्ड, 18 हजार अंक से चंद कदम दूर

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नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार शिखर पर है। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को सेंसेक्स-निफ्टी की ओपनिंग ऐतिहासिक बढ़त के साथ हुई तो क्लोजिंग में भी रिकॉर्ड बना। बाजार के खुलने के साथ ही सेंसेक्स ने पहली बार 60 हजार के रिकॉर्ड स्तर को पार कर लिया। कारोबार के दौरान ये 60,333 अंक के उच्चतम स्तर तक गया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 163.11 अंक या 0.27 फीसदी की तेजी के साथ 60,048.47 अंक के स्तर पर बंद हुआ।

सेंसेक्स ने करीब 9 माह के भीतर 10 हजार अंकों की मजबूती हासिल की है। इससे पहले जनवरी महीने में सेंसेक्स ने 50 हजार अंक को पारकर लिया था। अगर निफ्टी की बात करें तो ये भी रिकॉर्ड बना रहा है और किसी भी वक्त 18 हजार अंक के जादूई स्तर को पार कर लेगा। निफ्टी की क्लोजिंग 17,850 अंक के पार हुई है। ये ऑल टाइम हाई क्लोजिंग है। कारोबार के दौरान ये 17,930 अंक के स्तर को पार कर लिया था। एक वक्त ऐसा लग रहा था कि निफ्टी आज ही 18 हजारी बन जाएगा। हालांकि, ऐसा नहीं हो सका।


गुरुवार को बाजार का हाल

चौतरफा लिवाली से तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 958.03 अंक यानी 1.63 प्रतिशत के उछाल के साथ अब तक के उच्चतम स्तर 59,885.36 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 1,029.92 अंक की बढ़त के साथ 59,957.25 अंक के स्तर तक पहुंच गया था।

बढ़त की वजह क्या है

बीते कुछ महीनों से भारतीय शेयर बाजार में लगातार हो रही बढ़त की कई वजह है। बीते कुछ महीनों में विदेशी पूंजी का प्रवाह भारतीय बाजार में उम्मीद से बढ़कर हुआ है। इसके अलावा वैक्सीनेशन और कोरोना के कम केस का फायदा देश की इकोनॉमी को मिल रहा है और अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट रही है। वहीं, अलग-अलग सेक्टर की लिस्टेड कंपनियाें के वित्तीय परिणाम भी उम्मीद से बेहतर हैं।

तात्कालिक कारण

अगर वर्तमान हालात में समझें तो शेयर बाजार में बढ़त की मुख्य वजह यूएस फेड के फैसले हैं। अमेरिका के सेंट्रल बैंक यूएस फेड ने ब्याज दरों में कटौती नहीं की है लेकिन आने वाले दिनों में इसके संकेत जरूर दिए हैं। इससे अमेरिका के स्टॉक मार्केट में बूस्ट मिला है। इसका फायदा भारत को भी मिल रहा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने कहा कि केंद्रीय बैंक की नवंबर में मासिक बांड खरीद कार्यक्रम में कमी की घोषणा की योजना है। इसके लिये जरूरी है कि रोजगार के मामले में स्थिति बेहतर रहे।

यूएस फेड के इन फैसलों से संकेत मिल रहे हैं कि दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी अब कोरोना संकट से उबर रही है और आगे भी किसी तरह के जोखिम से बच रही है। इसके अलावा चीन की रियल एस्टेट कंपनी एवरग्रांड के संकट को लेकर उत्साहवर्धक समाचार आने से भी निवेशकों का भरोसा लौटा है।

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