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म्यूचुअल फंड में SIP से लगाया है पैसा, तो RBI ला रहा है पेमेंट का नया टाइमटेबल

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नई दिल्‍ली। 1 अगस्‍त से आपकी सहूलियत बढ़ाने जा रहा है। दरअसल SIP में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरिंग सर्विस (ECS) मैंडेट की जगह ले चुके नेशनल ऑटोमेटेड क्लीयरिंग हाउस (NACH) को रिजर्व बैंक सप्‍ताह में हर दिन काम करने लायक बना रहा है। यानि इसकी सर्विस रोजाना मिलेगी। मौद्रिक नीति की समीक्षा के बाद प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में RBI गवर्नर शक्तिकांता दास ने कहा कि यह काम 1 अगस्‍त 2021 से होगा।

गवर्नर शक्तिकांता दास ने कहा कि NACH क्लीयरिंग का नया सिस्टम है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने NACH को लागू किया था। सभी नए म्यूचुअल फंड SIP को NACH के जरिए रजिस्टर कराना होगा।

क्‍या है NACH

NACH वन टाइम रजिस्ट्रेशन प्रोसेस है। इसके जरिए म्यूचुअल फंड में एकमुश्त SIP इन्वेस्टमेंट करने की सहूलियत है। इस मैंडेट को रजिस्टर कर आप अपने बैंक को रोज तय रकम किसी म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश के लिए डेबिट करने का हक देंगे। आप यह मैंडेट या तो एक तय समय के लिए या तब तक दे सकते हैं, जब तक आप इसे खुद Cancel न करें।

इसके साथ ही रिजर्व बैंक ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) को बड़ी राहत दी है। मौद्रिक नीति की समीक्षा के बाद प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में RBI गवर्नर शक्तिकांता दास ने कहा कि अब RRB डिपॉजिट का सर्टिफिकेट जारी कर सकते हैं। एक तरह से RBI क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के लिए बैंकिंग का दायरा बढ़ा रहा है। इससे पहले RBI ने दिसंबर में Liquidity बनाए रखने की सुविधाओं को मंजूरी दी थी। इसके तहत क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक भी तरलता समायोजन सुविधा (LAF), सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) और कॉल/नोटिस मनी मार्केट का फायदा उठा रहे हैं। पहले इन बैंकों के पास रिजर्व बैंक की तरलता सुविधाओं अथवा कॉल/नोटिस मनी मार्केट तक पहुंचने की इजाजत नहीं थी।

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास के मुताबिक मनी मार्केट में बढ़ती भागीदारी को देखते हुए और बेहतर तरलता प्रबंधन को सुविधाजनक बनाने के लिए आरआरबी को अब आरबीआई के एलएएफ और एमएसएफ सुविधाओं और कॉल/मनी मार्केट सुविधा का फायदा उठाने की मंजूरी दी जाती है।

कोविड-19 से प्रभावित अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए नरम मौद्रिक नीति बनाए रखने का भरोसा देते हुए रिजर्व बैंक ने नीतिगत दर रेपो को चार प्रतिशत के मौजूदा स्तर पर बनाए रखा है। आरबीआई ने कोविड-19 की दूसरी लहर और उससे निपटने के लिए राज्यों में लगाये गये लाकडाउन और कर्फ्यू के बीच चालू वित्त वर्ष 2021-22 की आर्थिक वृद्धि के अपने अनुमान को पहले के 10.5 प्रतिशत से घटा कर 9.5 प्रतशत कर दिया। यह लगातार छठी समीक्षा है जिसमें केंद्रीय बैंक ने अपनी एक दिन के उधार की ब्याज दर -रेपो में कोई बदलाव नहीं किया।

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