बैंकों की वित्तीय स्थिति में दिखा सुधार, कम होंगे एनपीए

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स्वदेश डेस्क (विशाखा धारे) – बैंको की वित्तीय स्थिति में सुधार के साथ ही साथ लोन की समस्या भी खत्म होती नजर आ रही हैं । बुधवार को जारी हुई रिपोर्ट के मुताबिक , कोविड के बाद अर्थव्यवस्था में काफी सुधार आया हैं । इसके चलते NPA हो चुके लोन की वापसी होने लगी है। इसके अलावा लोन का उठाव भी बढ़ा है और बट्टे खाते में डाले गए कुछ लोन की रिकवरी भी होने लगी है। वहीं बीते कुछ साल से सकल NPA लगातार कम हो रहा है। हालांकि आने वाले सालों में यह ट्रेंड जारी रहने के आसार नजर आ रहे हैं । बता दें कि NPA  बैंकों की स्थिति सुधरने का सबसे मजबूत संकेत माना जाता है। वहीं क्रिसिल के मुताबिक 2023-24 तक कॉरपोरेट लोन में NPA का लेवल 2% से नीचे आने की उम्मीद हैं । एलकेपी सिक्युरिटीज के मुताबिक बट्टे खाते में डाले गए लोन भी वापस आने लगे हैं। बीती तिमाही बैंक ऑफ बड़ौदा के बट्‌टे खाते में डाले गए 25-30% लोन रिकवर हुए।

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एनपीए के कम होने की तीन मुख्य वजह

  1. बैंक नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी को कुछ या फिर पूरा NPA बेच पाएंगे।
  2. अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने से उद्योग-धंधे में मुनाफा हुआ, इससे बैंकों के लोन वापस आने लगे।
  3. बैंकों ने पांच साल में 10 लाख करोड़ के लोन बट्टे खाते में डाले, NPA नीचे आया।

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