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ई-कामर्स नियमों पर संतुलित रुख अपनाएगी सरकार, उपभोक्ता सचिव ने कहा- ऐसा कानून बने जो सभी के हित में हो

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नई दिल्ली । सरकार उपभोक्ता संरक्षण (ई-कामर्स) नियमों में प्रस्तावित संशोधनों को अंतिम रूप देते समय एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाएगी, क्योंकि इस संबंध में उसे व्यापक और विविध परामर्श मिले हैं। उपभोक्ता मामलों की सचिव लीना नंदन ने कहा, ‘हमें बहुत सारे सुझाव मिले हैं। अब हमें उपभोक्ता हितों को ध्यान में रखकर ऐसा कानून बनाना होगा, जो सभी के हित में हो। हालांकि इस संबंध में समयसीमा बताना मुश्किल है, क्योंकि प्राप्त सुझावों पर विचार-विमर्श और गंभीर चर्चा की आवश्यकता है। ‘अब तक ई-कामर्स नियमों के कार्यान्वयन के बारे में पूछे जाने पर सचिव ने कहा कि पिछले वर्ष भी इस पर काम हो रहा था। यह काम लगातार जारी है। यही वजह है कि सभी ई-कामर्स संस्थाओं द्वारा ठोस उपाय किए जा रहे हैं। इसी साल जून में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) की मुख्य आयुक्त निधि खरे ने स्पष्ट किया था कि मंत्रालय ई-कामर्स प्लेटफार्म पर व्यापार को रेगुलेट नहीं करेगा और आनलाइन कंपनियों को प्रस्तावित परिवर्तनों के बारे में चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। उल्लेखनीय है कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए सरकार ने उपभोक्ता सरंक्षण (ई-कामर्स) नियम, 2020 के प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव किया है। इसमें फ्लैश सेल और मिससेलिंग पर प्रतिबंध जैसे कड़े कदम शामिल हैं। हल्ला बोल अभियान का समर्थन करेगा एफआरएआइचार करोड़ सूक्ष्म, लघु और मध्यम खुदरा विक्रेताओं के संगठन फेडरेशन आफ रिटेलर एसोसिएशन आफ इंडिया (एफआरएआइ) ने छोटे खुदरा विक्रेताओं द्वारा शुरू किए गए ‘हल्ला बोल’ अभियान को समर्थन देने की घोषणा की है। यह अभियान 15 सितंबर को शुरू होगा और यह बताया जाएगा कि कैसे ई-कामर्स कंपनियां विदेशी धन और अनुचित तरीकों का इस्तेमाल करके भारत में छोटे व्यापारियों के व्यवसायों और आजीविका को बर्बाद कर रही हैं। देश के विभिन्न हिस्सों के छोटे खुदरा विक्रेताओं अैार व्यापारी संघों ने वाणिज्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर त्योहारी सीजन के मद्देनजर ई-कामर्स नियमों को लागू करने का अनुरोध कर रहे हैं।

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