अमृत कलश

विचार की पीड़ा

बांझ किमि जानें प्रसव की पीर ? प्रसवपीड़ा ! पीड़ा और प्रसव का एक रहस्य-संबंध है। बिना पीड़ा के प्रसव नहीं

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भीतर खोजो, मिलेगा

पश्चिम के धर्म-यहूदी, ईसाइयत और इस्लाम; तीनों बहिर्मुखी हैं जबकि पूरब के तीन बड़े धर्म- हिंदू, बौद्ध व जैन अंतर्मुखी हैं।

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भावनाएं कहीं नहीं जाएंगी

उदासी, ख़ुशी, आश्चर्य, क्रोध, घृणा, भय, प्रेम, ममता और वासना यह सब वो भावनाएं है जिनके साथ इन्सान हर रोज जीवन

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मानव मूल्यों का संकट

जब हम मानव मूल्य की बात करते हैं तो हमारा तात्पर्य क्या है, यह समझ लेना आवश्यक है। अपनी परिस्थितियाँ, इतिहास-क्रम

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सनातन धर्म क्या है

धर्म क्या है ? इस सवाल को लेकर बहुत ऊहापोह चलता रहता है । अनेक प्रकार के विवाद भी होते हैं।

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मर्यादा पुरुषोत्तम कौन

आचार्य चाणक्य कहते हैं-धर्मे तत्परता मुखे मधुरता दाने समुत्साहता मित्रेऽवंचकता गुरौ विनयता चित्तेऽतिगम्भीरता। आचारे शुचिता गुणे रसिकता शास्त्रेषु विज्ञातृता रूपे सुन्दरता

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वेद मंत्रों का सूत्र

जिनका वर्णन वेद मंत्र में है, वे मंत्र के देवता होते हैं। अर्थात जब मंत्र में किसी का विशेष गुण, कर्म,

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कठोर साधना के 53 वर्ष

आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज की मुनि दीक्षा के 53 वर्ष पूरे हुए। आचार्यश्री की पहचान कठोर व निर्दोष साधक की है।

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सहज जीवन में प्रतिज्ञा

प्रतिज्ञा और शाप के प्रसंग पौराणिक काल में अनेक बार आए हैं। महाभारत में अनेक प्रतिज्ञाओं के प्रसंग हैं। कोई भी

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कष्ट से ही अर्थपूर्ण जीवन

एक दार्शनिक ऐसा भी हुआ जिसने अर्थपूर्ण जीवन के लिए खुशी की जगह कष्ट को महत्वपूर्ण बताया। यह दार्शनिक था फ्रेडरिक

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