अमृत कलश

सुख-दुख का स्वरूप

दुख का ही नग्न स्वरूप है। तुम्हारे अंदर का वही सरोवर जिसमें हास्य की हिलोरें उठती रही हैं प्राय: तुम्हारे आंसुओ

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धर्म की ग्लानि का अर्थ

‘श्रीमद्भागवत गीता में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को समझाते हुए अवतार ग्रहण करने की व्याख्या प्रस्तुत की है। इसमें कहा गया है

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वंशी और शंख

मारा मौन, धैर्य और सहनशीलता भी यदि अधर्म को प्रश्रय दे रही हो तो ऐसे अधर्म ,अंधविश्वास, कुंठित परंपराओं, अत्याचारियों, अन्यायियों

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मुसीबत से लड़ो

समय खराब चल रहा हो, तब किसी व्यक्ति से मदद मत माँगो, क्योंकि ऐसा करने से आप दूसरों पर निर्भर हो

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जिसने आत्मा खो दी…

एक जर्मन कथा के अनुसार एक मनुष्य ने अपनी प्रतिछाया खो दी। यह बड़ी ही विचित्र बात है। एक मनुष्य ने

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बौद्ध दर्शन का प्रभाव

भारत के लोकजीवन की निरन्तरता में भगवान बुद्ध इतने गहरे रसे-बसे हैं कि उनके आगे के समय में ऐसा कोई चिन्तन

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आज का शिव चिन्तन : नर्मदा के हर कंकर में शंकर

नर्मदा ने वर्षों तपस्या करके ब्रह्माजी को प्रसन्न किया। ब्रह्माजी ने वर मांगने को कहा। नर्मदाजी ने कहा?, तो मुझे गंगाजी

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