Home बोध कथा चोर और कुत्ता भी गुरु

चोर और कुत्ता भी गुरु

19
0

एक संत से उनके एक शिष्य ने पूछा कि उनका गुरु कौन था। संत ने जवाब दिया- यूं तो मेरे कई गुरु हैं पर तुम्हें अपने दो खास गुरुओं के बारे में बताता हूं। मेरा पहला गुरु एक चोर है। एक बार मैं अनजान शहर में भटक रहा था तो एक चोर ने मुझे अपने घर में आसरा दिया। हर रात वह चोरी के लिए जाता और जब लौटकर आता तो मैं उससे पूछता-आज क्या हाथ लगा।

यद्यपि उसे महीने भर तक कोई सफलता नहीं मिली किंतु हर बार वह यही कहता कि आज रात को कुछ नहीं मिला, पर कल मैं फिर कोशिश करूंगा और ऊपर वाले की इच्छा से यह अवश्य होगा। संत बोले-जीवन में जब भी मुझे लगता है कि सारे ध्यान, पूजा-पाठ और साधना के बाद भी जब भगवान नहीं मिल रहे हैं तो क्यों न यह सब छोड़ दिया जाए। तब मुझे चोर की बात याद आती है। कल मैं फिर कोशिश करूंगा और ऊपर वाले की इच्छा से ही यह अवश्य होगा। संत ने बताया कि उनका दूसरा गुरु एक कुत्ता है।

वह कुत्ता था तो बहुत प्यासा लेकिन नदी में अपनी अपनी छवि को दूसरा कुत्ता समझ बैठता और डरकर भाग जाता था। लेकिन क्योंकि उसकी प्यास गहरी थी इसलिए उसने अंतत: सारे डर को दरकिनार कर नदी में छलांग लगा दी। इसके साथ ही उसको डराने वाली छवि गायब हो गई और उसकी प्यास मिट गई। संत बोले-कुत्ते से मुझे सीख मिली कि अपनी प्यास को गहरा बनाओ और डर के बावजूद कूद पड़ो। ज्ञान कहीं से भी प्राप्त हो सकता है। बस दिल और दिमाग खुले होना चाहिए।

Previous articleलोक हैं हम, समाज नहीं
Next articleबदमाशों ने दोस्त से मिलने आई युवती की कार के कांच फोड़े

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here