Home बोध कथा मूर्ख जुगनू

मूर्ख जुगनू

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प्रात:काल होने को था। भगवान सूर्य सात अश्वों के रथ पर बैठ कर प्राची की ओर से बढ़ते आ रहे थे। तभी एक क्षुद्र जुगनू सामने आया और मूँछों पर ताव देता हुआ बोला, ‘ऐ सूरज! वहीं रुक जा, नहीं तो तुझे नष्ट करके रख दूँगा। सूर्य भगवान को पहले तो हँसी आ गई, फिर वे धीरे-धीरे आगे बढऩे लगे। सूर्य की तेजस्विता देखी तो जुगनू को उल्टे पाँव भागते ही बना।

आकाश खिलखिला कर हँस पड़ा। बोला, ‘सच है, प्रलाप करना मूर्खों का ही काम है, तेजस्वी व्यक्ति तो निर्भय होकर आगे बढ़ा करते हैं। समय का पालन करें ढ्ढ अपने कार्य को निडर होकर धैर्य के साथ अनवरत करते रहें। प्रलाप करना मूर्खों का ही काम है।

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