Home बोध कथा स्वभाव नहीं बदलता

स्वभाव नहीं बदलता

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एक सांप और एक हंस साथ-साथ रहने लगे। जहां भी हंस जाता,सांप उसके साथ-साथ ही लगा रहता था । किन्तु आकाश में सांप उड़ नहीं सकता था,इसलिये हंस ने सांप को कौआ बना लिया। अब कौआ हंस के साथ उडऩे भी लगा। हंसों को काले कौए का साथ अच्छा न लगा तो हंस ने उसे बगला (बक) बना लिया।

अब वह बगला बनकर हंसों के साथ विचरण करता। अब हंसों ने कहा कि हमारे बीच एक बगला रहे यह नाजायज बात है,इसे हंस ही बना लो। अब सांप से वह हंस हो गया। हंस-हंसिनी के बच्चे हुए। हंस तो चुगा लेने गया ,तभी बना हुआ हंस उन बच्चों को खा जाने के लिये कोशिश करने लगा। इसी बीच वह हंस आ गया।

उसने सारी घटना देखी और समझी भी ,वह बोला -नागा से कागा भयौ,कागा से बगला। बगला से हंस भयौ ,फिर तुखम नहीं बदला। कहावत है- तुख्म- तासीर सोहबत असर। सोहबत का असर होता है लेकिन तुख्म- तासीर कहां जाती है?

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