Home बोध कथा पारसमणि की खोज में

पारसमणि की खोज में

31
0

वह अतृप्त जिज्ञासा, जानने की वह प्यास, वह तृषा, जो निरन्तर बढती ही जाती है। पारसमणि की एक कहानी बचपन में सुनी थी। एक आदमी पारसमणि की खोज में घर से निकला तो उसके द्वार के आगे ही धूल से लिपटा एक पत्थर मिला। उसने पत्थर को उलटा-पलटा। चमक तो है पर क्या पारसमणि कहीं द्वार पर ही मिला करती हैं ?

क्या यह पारसमणि हो सकती है? नहीं ! अविश्वास के साथ उसने पत्थर को देखा और धूल में फेंक दिया। पारसमणि की खोज में वह आदमी बरसों भटकता रहा और बरसों भटकने के बाद अन्त में उसे ज्ञात हुआ कि जो पत्थर घर के आगे अनायास ही मिल गया था , वह पारसमणि ही थी।
हमे पता ही नहीं कि हमारे पास कितनी अमूल्य धरोहर है। हम दुनिया में उसके लिए भटक रहे हैं।

Previous articleआर्य बाहरी नहीं
Next articleअसम, मणिपुर और मेघालय में महसूस हुए भूकंप के झटके, रिएक्टर स्केल पर सबसे अधिक तीव्रता 4.1 दर्ज

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here