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पहला दरवाजा

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जाने-माने चोर के बेटे ने कहा-पिताजी आप और दादाजी और उससे पहले उनके पिता, सबसे बड़े चोर रहे हैं। कितनी ही पीढिय़ों से हमारे खानदान में कोई पकड़ा नहीं गया जबकि बड़ी से बड़ी चोरियां आप लोग करते रहे हैं। अब मैं बड़ा हो गया हूं, अपना हुनर मुझे भी सिखाइए। चोर ने कहा- ठीक है। रात को वह बेटे को अपने साथ ले गया। एक घर में घुसे।

चोर ने बेटे से कहा कि वह कपड़ों की अलमारी में घुसकर कपड़े छांट ले। बेटा जब भारी-भरकम अलमारी में घुसा तो चोर ने बाहर से उसे बंद कर दिया। फिर भागकर बाहर गया और घर के दरवाजे जोर-जोर से पीटने लगा। लोग जागकर बाहर आए।?इतनी देर में चोर वहां से रफूचक्कर हो गया।

सुबह चोर का बेटा आंखें लाल किए अस्त-व्यस्त कपड़ों में बुरी हालत बनाए घर में घुसा आते ही अपने बाप पर बरसा, यह क्या मतलब हुआ? आप मेरी जान लेना चाहते हैं। मैं आपका बेटा हूं या दुश्मन? वह तो समझ लो कि मौत के डर से मेरी अक्ल से जाने कैसे दरवाजा खुल गया और मैंने अपनी जान बचाई। किसी तरह पकड़े जाने से बचकर लौट आया वरना आपने तो मुझे मरवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। चोर ने खुश होकर बेटे को गले लगा लिया और कहा-अक्ल का वो दरवाजा खोलना चोरी का पहला सबक है।

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