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लोकतांत्रिक मुर्गा

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लेनिन एक बार अपने साथ संसद में एक मुर्गा लेकर आये। और सबके सामने उसका एक -एक पंख नोचने लगे। मुर्गा दर्द से बिलबिलाता रहा मगर एक-एक करके लेनिन ने सारे पंख नोच दिये और मुर्गे को जमीन पर फेंक दिया। फिर जेब से कुछ दाने निकालकर मुर्गे की तरफ फेंक दिया और धीरे धीरे चलने लगे। तो मुर्गा दाना खाता हुआ लेनिन के पीछे चलने लगा।

लेनिन बराबर दाना फेंकते गये और मुर्गा बराबर दाना खाता हुआ उनके पीछे चलता रहा। आखिरकार वो मुर्गा लेनिन के पैरों में आ खड़ा हुआ। लेनिन ने स्पीकर की तरफ देखा और एक तारीखी जुमला बोला, ‘लोकतांत्रिक देशों की जनता इस मुर्गे की तरह होती है। उन के नेता जनता का पहले सब कुछ लूट कर उन्हें अपाहिज कर देते हैं। और बाद में उन्हें थोड़ी सी खुराक देकर उनके मसीहा बन जाते हैं।

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