युवा लेखकों का स्तंभ : रोहित सरदाना की निर्भीक पत्रकारिता

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  • भारतीयता के प्रबल पक्षधर और बेखौफ पत्रकार रोहित सरदाना का जन्मदिन आज
  • सुनील साहू, भाजयुमो के प्रदेश मीडिया सह प्रभारी

वरिष्ठ पत्रकार रोहित सरदाना की आवाज 30 अप्रैल से भले ही मौन है लेकिन उनकी सोच और विचार आज भी गुंजायमान हैं जो कई नवोदित पत्रकारों के लिए प्रेरणा देंगे। आज वह हमारे बीच होते तो अपना 42वां जन्मदिन मना रहे होते। 30 अप्रैल को उनके निधन के बाद से मीडिया जगत में एक बहुत बड़ा शून्य व्याप्त है। भारतीयता के प्रबल पक्षधर और बेखौफ पत्रकार रोहित सरदाना की पत्रकारिता हमेशा जीवंत रहेगी। राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर और धार्मिक उन्मादियों के खिलाफ उन्होंने हमेशा मुखरता से अपनी बात रखी। मुझे याद है जब मैं टीवी9 भारतवर्ष चैनल के नोएडा फिल्म सिटी वाले दफ्तर में काम करता था तो सोचता था कि आज तक का ऑफिस पास में ही है कभी समय लेकर मिलने जाऊंगा। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। सच है कि मृत्यु पर किसी की मर्जी नहीं चलती।

आज जब हम टीवी डिबेट्स में भाषायी मूल्यों का पतन देखते हैं तो वहीं दूसरी ओर रोहित सरदाना इन मानकों का ध्यान रखते थे। आम से लेकर खास लोग सरदाना की कार्यकुशलता और पत्रकारीय धर्म के प्रति निष्ठा के कायल थे। रोहित सरदाना जिस सूझबूझ, बेबाकी, और साहस के साथ सवाल पूछते थे, वह सब दर्शकों के दिलों में घर कर जाता था। अपने तर्क और तथ्यों से वह अच्छे-अच्छों को मौन कर देते थे। उनकी हाजिर जवाबी का कोई तोड़ नहीं था।


ईटीवी नेटवर्क से जुड़कर टेलीविजन पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले रोहित सरदाना ने शुरुआत से जनपक्षीय पत्रकारिता को महत्व दिया। ईटीवी के बाद वह करीब दो साल तक सहारा और जी न्यूज में लंबे समय तक काम किया। रोहित सरदाना के ‘ताल ठोक केÓशो ने उन्हों लोकप्रिय बना दिया। आम लोगों की समस्याएं उठाकर, बेरोजगारी जैसे मुद्दों को शामिल करके रोहित सरदान ने दस्तक को एक नई पहचान दी। उनके सवालों पर देश के बड़े-बड़े दिग्गज नेता भी कई बार असहज हो जाते थे।

रोहित सरदाना न केवल एक बेहतरीन एंकर थे बल्कि एक शानदार रिपोर्टर भी थे। खबरों के प्रति उनका नजरिया गजब का था। उनकी कई ऐसी स्टोरीज रहीं जिन्होंने देश की खबरों को एक नया दृष्टिकोण दिया। जिनमें से खास रहे जेएनयू में देश विरोधी नारे, कश्मीर में हुर्रियत नेताओं का पाकिस्तान का फंड कनेक्शन, पं. बंगाल के मालदा और धूलागढ़ की सांप्रदायिक हिंसा, कैराना के पलायन का सच और तीन तलाक के खिलाफ एक सामाजिक आंदोलन। उनके नाम बेस्ट एंकर के (नेशनल टेलीविजन पुरस्कार) और ENBA Award के साथ-साथ हिंदी पत्रकारिता का प्रतिष्ठित गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार भी है।


वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्म समीक्षक प्रदीप सरदाना अपने एक लेख में लिखते हैं- रोहित ने अपने तेवर और सटीक तर्कों के साथ अपने शो को तीखापन दिया तो संजीदगी और गरिमा भी। साथ ही अपने इस शो को रोहित ने राष्ट्रवादी रंग देकर दुनिया को यह बता दिया कि उनके लिए देश सर्वोच्च है। जो भी देश को बांटने–तोडऩे और बदनाम करने के भाव रखेगा उसे बक्शा नहीं जाएगा। रोहित ज़ी न्यूज़ छोड़कर ‘आज तक’ Ó में कार्यकारी संपादक बनकर आए।

जहां रोहित के पुराने तेवर और पुराने अंदाज़ को देखते हुए उन्हें शुरू में ही 7 नवंबर 2017 में ‘दंगल’ शो दे दिया। ‘दंगल’ को होस्ट करते हुए रोहित पहले से और भी आगे निकल गए। रोहित सरदाना ने इतने कम समय में पत्रकारिता को जो नए तेवर दिए, मुद्दों को बेबाकी से कहने का जो हौसला दिया, उससे उनकी विचार यात्रा कभी रुकेगी नहीं, थकेगी नहीं। उनकी निर्भीकता, प्रखरता, पत्रकारीय जिम्मेदारी और संजीदगी चिरस्थायी रहेगी।

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