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विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता

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कोरोना काल में लगातार देशवासियों के साथ-साथ विश्व समुदाय के साथ सामंजस्य बनाने वाले और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दुनिया भर में लोकप्रियता में वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री मोदी एक बार फिर दुनिया में सर्वाधिक लोकप्रिय नेता साबित हुए हैं। लोकप्रियता के मामले में अन्य वैश्विक नेताओं की तुलना में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी पहले स्थान पर हैं। मोदी ने 12 देशों के राष्ट्राध्यक्षों को पीछे छोड़ दिया है। अमेरिकी फार्म डेटा इंटेलिजेंस कंपनी ‘मॉर्निंग कंसल्ट के हालिया सर्वे के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता हैं। मोदी जी ने अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन और ब्रिटेन के पीएम बॉरिस जॉनसन को भी पीछे छोड़ दिया है। इस सर्वे के हिसाब से मोदी की स्वीकार्यता रेटिंग 70 फीसदी है। सर्वे में मोदी की यह रेटिंग दुनिया के टॉप 13 नेताओं में सबसे अधिक है। भारतीय प्रधानमंत्री की यह रेटिंग जून, 2021 में 66 फीसदी थी, जिसमें तीव्रगति से निरंतर वृद्धि हो रही है।

  • डॉ. राकेश मिश्र

आज के समय में भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया में अगर सबसे ज्यादा लोकप्रिय हस्ती है तो वह हैं भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी। वैश्विक नेताओं के बीच अब्व्ल जगह बना चुके नरेन्द्र मोदी दुनिया की सबसे लोकप्रिय राजनीतिक हस्तियों में शुमार हैं और आज भी उनका जादू बरकरार है। अपनी कार्यशैली, दृढ़निश्चय और क्षमता के कारण नरेन्द्र मोदी का नाम न सिर्फ भारत में, बल्कि विश्व पटल पर भी गूंजता हैं। देश में तो हर किसी की जुबान पर मोदी जी का नाम है ही, विदेशों में भी यह नाम गूंज रहा है। नरेन्द्र मोदी की तमाम खूबियां ही उनको दूसरे राजनीतिज्ञों से अलग बनाती हैं।

26 मई 2014 को सत्ता मंर आने के तुरन्त बाद से ही मोदी सरकार ने अन्य देशों के साथ सम्बन्धों को नया आयाम देने की दिशा में कार्य करना आरम्भ कर दिया था। दक्षिण एशिया के अपने पड़ोसियों से सम्बन्ध सुधारना मोदी सरकार की विदेश नीति के केन्द्र में है। आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अथक मेहनत से दुनिया का नजरिया भारत की ओर बदला है। नरेन्द्र मोदी ने प्रथम दिन से ही विदेश नीति पर काम करना शुरू कर दिया था, जब उन्होंने दक्षेस देशों को शपथ ग्रहण समारोह में न्यौीता दिया और सभी राष्ट्राउध्याक्ष राष्ट्रपति भवन प्रांगण में उपस्थित हुये। यह हमारे देश की बदलती हुई सोच की पहचान थी। मोदी जी के प्रयास से योग को अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिली और विश्व भर में 23 जून को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर योग दिवस मनाया जाता है।

व्यावहारिक विदेश नीति

भारत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद, कालाधन, सीमा विवाद, जलवायु परिवर्तन एवं ग्लोबल वार्मिंग जैसे बड़े मुद्दों पर कार्य कर रहा है। आज भारत सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भी लड़ाई लड़ रहा है। अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियाँ तेजी से बदलती रहतीं हैं। उसके अनुरूप अपनी नीतियों में फेरबदल करना भी आवश्यक हो जाता है। इसके लिए लचीलेपन एवं कठोर, दोनों ही नीतियों की आवश्यकता होती है। अतीत में भारतीय विदेश नीति में इसका अभाव दिखाता रहा, लेकिन नरेन्द्र मोदी सरकार की विदेश नीति व्यावहारिक मोर्चे पर पूरी तरह परिपक्व रही है। प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति में पड़ोसियों को प्राथमिकता देने का सिलसिला शुरू हुआ, जिससे इन देशों को लेकर भारत की दृष्टि बदली है।

देश नीति में आया यह बदलाव उपयुक्त एवं तार्किक है, क्योंकि सदा परिवर्तनशील विदेश नीति को किसी एक लकीर के हिसाब से नहीं चलाया जा सकता है। मामले के हिसाब से निर्णय लेने होते हैं, तभी राष्ट्रीय हितों की पूर्ति संभव हो सकेगी। मोदी सरकार विदेश नीति की इसी व्यावहारिक राह पर चल रही है। हाल के कई उदाहरण इसकी पुष्टि करते हैं। कोरोना काल में अपने पहले विदेश दौरे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बांग्लादेश की मुक्ति के मसीहा शेख मुजीबुर्रहमान की जन्मशती से जुड़े कार्यक्रम में बांग्लादेश गए।

यह कार्यक्रम पिछले वर्ष ही आयोजित होने थे, लेकिन कोरोना लहर एवं कहर के कारण स्थगगित हो गए थे। इस यात्रा के माध्यम से उन्होंने दर्शाया कि भारत के लिए उसके पड़ोसी कितने महत्वपूर्ण हैं? अपने पहले विदेश दौर के लिए उन्होंने भूटान को चुना तो दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद वह पहली विदेश यात्रा पर मालदीव गए। जब भी किसी पड़ोसी देश पर संकट आता है तो भारत अग्रिम भूमिका में रहकर उनकी मदद करता है।

जब नेपाल में भूकंप आया तो भारत ने अपनी एनडीआरएफ की टीमें भेज नेपाल की मदद की। वहीं जब बाहरी देशों से भारत के खिलाफ कुछ होता है तो उसका भी डटकर मुकाबला किया जाता है। चीन ने भारत की भूमि में अतिक्रमण करने की कोशिश की, तब भी हमारी विदेश नीति काम आई। सेना बल के दृढ़ निश्चय और विदेश नीति के बल पर चीन को वापस हटना पड़ा। हमारा पड़ोसी म्यांमार बहुत अशांत है। यहां भी भारत की नीति सफल रही है और मोदी सरकार ने व्यावहारिक रणनीति का परिचय दिया है।

दवाबों से दूर

म्यांमार से शरणार्थियों की समस्या को देखते हुए भारत खासा सतर्क है और एहतियात भी बरत रहा है। इसी तरह श्रीलंका में इस समय स्थिरता तो कायम है, लेकिन उसका अतीत पीछा नहीं छोड़ रहा। बीते दिनों संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में युद्ध अपराधों को लेकर श्रीलंका पर आए एक प्रस्ताव से भारत ने अपने आप को अलग रखा। ऐसे में श्रीलंका का परोक्ष समर्थन कर भारत सरकार ने राष्ट्रहित में कदम उठाया है, क्योंकि हिंद महासागर में श्रीलंका जैसा साथी हमारे लिए अहम है। मोदी सरकार तमाम दबावों को दरकिनार करते हुए व्यावहारिक विदेश नीति की राह पर चल रही है।

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