Home लेख विश्व योग दिवस (21 जून): पतंजलि का गांव था गोंदरमऊ

विश्व योग दिवस (21 जून): पतंजलि का गांव था गोंदरमऊ

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योग के प्रवत्र्तक महर्षि पतंजलि मध्यप्रदेश के विदिशा जिले के ग्राम गोंदरमऊ रहने वाले थे और उन्होंने यहां दो अश्वमेध यज्ञ भी करवाए थे। विभिन्न ग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है। विदिशा में तब पुष्यमित्र शुंग का राज्य था और इसे उन्होंने राजधानी बनाया था। यद्यपि कुछ ग्रंथों में पतंजलि के कश्मीर में रहने का उल्लेख किया गया है। पतंजलि को प्राचीनकाल में व्याकरणविद, योगाचार्य और आयुर्वेदाचार्य के रूप में जाना जाता है। इन तीनों विद्याओं के उस समय तीन केंद्र विकसित हुए थे-विदिशा, मथुरा और मध्यमिका ( राजस्थान )।

वेबर का मत है कि महाभाष्य के मथुराया: पाटिलपुत्र इसके अनुसार गोनर्द विदिशा व उज्जैन के बीच कहीं होना चाहिए। इसी गोनर्द को वर्तमान गोंदरमऊ माना गया है। जनश्रुति, पुराण और इतिहास महाकवि बाल्मीकि, हर्ष शूद्रक और महाभाष्यकार पतंजलि का संबंध विदिशा से जोड़ते हैं। ‘पतंजलिकालीन भारत’ में प्रभुदयालु अग्निहोत्री लिखते हैं- पतंजलि के समय ईसा पूर्व दूसरी शती तक कृष्ण, वासुदेव और बलराम की पूजा के यही तीन प्रमुख केंद्र थे। गोनर्द के निवासी पाणिनी की अष्टाध्यायी पर महाभाष्य लिखने वाले पतंजलि भी उनके यज्ञों के पुरोहित थे। पतंजलि प्रखर भाषाविद् थे ।

योगशास्त्र को उन्होंने आकार दिया। विदिशा नागवंश से भी संबन्धित रहा है। इससे लगता है कि पतंजलि मौखरियों से भी परिचित थे । मप्र इतिहास परिषद के जर्नल के अनुसार विदिशा क्षेत्र में पाए गए यज्ञशालाओं के अवशेष द्वितीय अश्वमेध के रहे होंगे। ‘भारतीय धर्म मीमांसाÓ में वासुदेव शरण अग्रवाल ने लिखा-मथुरा, मध्यमिका और विदिशा – इस त्रिकोण के भीतर भागवत धर्म का प्रसार हुआ। शुंगों का साम्राज्य संपूर्ण गंगा घाटी व नर्मदा नदी के क्षेत्र में तथा उत्तरी दक्कन में विदर्भ व बरार तक था। उसने राजधानी विदिशा को बनाया। वह लगभग 36 वर्ष शासक रहा। पुष्यमित्र शुंग को बौद्ध धर्म विरोधी शासक माना जाता है। शुंगकाल में विदिशा का राजनैतिक व सांस्कृतिक महत्व सर्वाधिक हो गया।

(संकलित)

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