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‘विश्व अल्जाइमर दिवस’: भारत में अल्जाइमर का बढ़ता खतरा

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विश्व स्वास्थ्य संगठन के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में तो अल्जाइमर ही हर सातवीं मौत का प्रमुख कारण है, जहां 65 वर्ष से अधिक आयु के अधिकांश लोग अल्जाइमर से मर जाते हैं।

योगेश कुमार गोयल, लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं

डिमेंशिया (मनोभ्रंश) और अल्जाइमर रोग के बारे में लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 21 सितम्बर को ‘विश्व अल्जाइमर दिवस मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में तो अल्जाइमर ही हर सातवीं मौत का प्रमुख कारण है, जहां 65 वर्ष से अधिक आयु के अधिकांश लोग अल्जाइमर से मर जाते हैं।

दरअसल उम्र बढऩे के साथ कई प्रकार की बीमारियां शरीर को निशाना बनाना शुरू कर देती हैं और ऐसी ही बीमारियों में से एक बुढ़ापे में भूलने की आदतों की बीमारी ‘अल्जाइमर-डिमेंशिया है। आंकड़ों के मुताबिक चीन में अल्जाइमर के रोगियों की संख्या पूरी दुनिया में पहले स्थान पर है लेकिन वहां इस रोग के उपचार की दर अपेक्षाकृत कम है, जिसका सबसे बड़ा कारण वहां बुजुर्ग आबादी की लगातार बढ़ती जनसंख्या के अलावा अधिकांश लोगों के मनोमस्तिष्क में इस बीमारी के बारे में व्याप्त गलतफहमी भी है।

दरअसल बुजुर्गों को अपने शिकंजे में जकड़ती इस बीमारी को लोग कोई बीमारी नहीं बल्कि बढ़ती उम्र की एक सामान्य प्रक्रिया मानते हैं। वर्तमान में चूंकि अल्जाइमर रोग का कोई इलाज नहीं है, इसीलिए इस रोग की गंभीरता के कारण कुछ देशों में पूरे सितंबर महीने को ही ‘विश्व अल्जाइमर माह के रूप में मनाया जाता है। बैंगनी रंग का रिबन अल्जाइमर का प्रतिनिधित्व करता है। अल्जाइमर एक भूलने की बीमारी है और इस बीमारी का यह नाम 1906 में इस बीमारी का पता लगाने वाले जर्मनी के मनोचिकित्सक और न्यूरोपैथोलॉजिस्ट एलोइस अल्जाइमर के नाम पर ही रखा गया।

उन्होंने एक असामान्य मानसिक बीमारी से मरने वाली एक महिला के मस्तिष्क के ऊतकों में परिवर्तन देखने के बाद इस बीमारी का पता लगाया था। वास्तव में अल्जाइमर एक ऐसा न्यूरोलॉजिक डिसऑर्डर है, जिससे ब्रेन सिकुडऩा, ब्रेन सेल्स डाई इत्यादि समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इस बीमारी के बारे में लोगों को ज्यादा से ज्यादा जागरूक करने के लिए ही विश्व अल्जाइमर दिवस मनाया जाता है।

इसे मनाने के पीछे का उद्देश्य अधिकाधिक लोगों को अल्जाइमर रोग के कारणों, लक्षणों और गंभीरता के बारे में जागरूक करना है। विश्व अल्जाइमर दिवस की शुरुआत ‘अल्जाइमर डिजीज इंटरनेशनल (एडीआई) की 10वीं वर्षगांठ मनाने के लिए 21 सितम्बर 1994 को एडिनबर्ग में एडीआई के वार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन के अवसर पर की गई थी। इस वर्ष 21 सितम्बर को 28वां ‘विश्व अल्जाइमर दिवस मनाया जा रहा है, जिसकी थीम है ‘डिमेंशिया को जानें, अल्जाइमर को जानें।

प्राय: देखा जाता है कि बढ़ती उम्र के साथ कुछ लोगों में भूलने की आदत विकसित होने लगती है। ऐसे में लोगों को कुछ भी याद नहीं रहता, उन्हें किसी को पहचानने में भी दिक्कत आती है। कुछ मामलों में तो यह भी देखा जाता है कि यदि कोई बुजुर्ग व्यक्ति बाहर टहलकर आता है तो वापस लौटने पर उसे अपना ही घर पहचानने में परेशानी होती है। हालांकि ऐसी स्थितियों को अक्सर समाज में यही सोचकर काफी हल्के में लिया जाता है कि बढ़ती उम्र के साथ ऐसा होना स्वाभाविक है लेकिन वास्तव में यह बढ़ती उम्र की कोई स्वाभाविक प्रक्रिया नहीं है बल्कि उनमें पनपने वाली अल्जाइमर नामक बीमारी है, जिसमें लोग धीरे-धीरे सब कुछ भूलने लगते हैं।

अगर कोई व्यक्ति सब कुछ भूल जाए, उसे कुछ भी याद ही नहीं रहे तो आसानी से समझा जा सकता है कि ऐसे व्यक्ति की जिंदगी कितनी कठिनाईयों से भर जाएगी। ऐसी ही कठिनाईयों को समझते हुए विश्व अल्जाइमर दिवस मनाने का निर्णय लिया गया, जिसका उद्देश्य न केवल दुनियाभर के लोगों को डिमेंशिया के लक्षणों का पता लगाने के लिए प्रोत्साहित करना है बल्कि डिमेंशिया से पीडि़त रोगियों या इस बीमारी के कारण मरने वाले रोगियों को न भूलना भी है।

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