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जंतर मंतर पर किसने लगाए मुस्लिम-विरोधी नारे?

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फिरोज बख्त अहमद, कुलसपति मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी हैदराबाद
firozbakhtahmed08@gmail.com

दिल्ली के जंतर मंतर पर रविवार को एक विशेष समुदाय के खिलाफ हुई नारेबाजी की घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद अब दिल्ली सरकार ने इस मामले पर कड़ा रुख इख्तियार किया है। दिल्ली पुलिस के डीसीपी केपीएस मल्होत्रा ने इस मामले में शामिल सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और भाजपा के पूर्व प्रवक्ता व नेता, अश्विनी उपाध्याय और अन्य लोगों को गिरफ्तार करने का आदेश दिया है।

दिल्ली के डीसीपी मलहोत्रा ने कहा है कि दिल्ली पुलिस मामले को कानून के मानदंडों के हिसाब से देख रही है। इसके साथ ही उन्होंने सख्त लहजे में यह भी कहा कि राजधानी में किसी भी तरह के सांप्रदायिक विद्वेष को बार्दाश्त नहीं किया जाएगा, ऐसा करने वालों या फिर ऐसे आरोपियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद समान आचार संहिता मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है, अर्थात, एक देश, एक पुलिस संहिता, एक दण्ड संहिता एक चिकित्सा संहिता, एकन्यायिक संहिता, एक मजदूर संहिता, एक नागरिक संहिता, एक शिक्षा संहिता,एक राष्ट्र भाषा, एक कर संहिता, एक शिक्षा बोर्ड, और एक पाठ्यक्रम। इसके संबंध में ‘भारत जोड़ो आंदोलन’ अपने सैंकडों कार्यक्रम कर चुका है।

इससे पहले भी सत्तारूढ़ पार्टी सिंगल सिविल कोड की वकालत करती रही है और विरोधियों पर ‘वोट बैंक पॉलिटिक्स’ व मुस्लिमों के तुष्टीकरण का आरोप लगाकर उसे घेरती रही है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा था कि समान नागरिक आचार संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) लागू करने के लिए अभी तक कारगर प्रयास नहीं किए गए। वास्तव में जंतर-मंतर के पास कुछ संगठनों द्वारा ‘क्विट इंडिया मूवमेंट’ (भारत छोड़ो आंदोलन) की वर्षगांठ को लेकर प्रदर्शन किया गया।

इस दौरान अंग्रेजों के संविधान के अनुच्छेद-44 में समान नागरिक आचार संहिता की बात को लेकर दिल्ली के प्रसिद्ध विरोध स्थल, जंतर मंतर पर ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन’ की वर्षगांठ पर एक गोष्ठी, ‘भारत जोड़ो’ का आयोजन हुआ जिसमें मात्र 50 लोगों के आने की अनुमति और जिसके मुख्य वक्ता अश्विनी उपाध्याय, थे मगर जोश—खरोश में लगभग 5,000 लोग जमा हो गए और उसके बारे में कुछ ऐसे ओछे और घटिया विडियो सोश्ल मीडिया पर डाले गए कि जिसमें इस संगोष्ठी में भाग लेने वालों द्वारा मुस्लिम विरोधी नारे लगाए गए। देश को तोडऩे वाले नारे लगाने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने अब तक पाँच लोगों को गिरफ्तार किया है जिनमें एक स्वयं अश्विनी भी हैं, जिनकी गिरफ्तारी ऐसे ही है जैसे घुन के साथ गेहूं का पिस जाना!

अश्विनी उपाध्याय बताते हैं कि वह वहाँ मात्र यह बताने गए थे कि कि अनुच्छेद 44 पर बहस के दौरान बाबा साहब आंबेडकर ने कहा था कि व्यवहारिक रूप से इस देश में एक नागरिक संहिता है, जिसके प्रावधान सर्वमान्य हैं। समान रूप से ये पूरे देश में लागू हैं, लेकिन विवाह-उत्तराधिकार का क्षेत्र ऐसा है, जहां एक समान कानून लागू नहीं है। अत: इसको मनवाने के लिए एक शांतिपूर्ण विरोध का आयोजन किया गया।

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