Home लेख अफगानिस्तान में राक्षसी राज कब समाप्त होगा?

अफगानिस्तान में राक्षसी राज कब समाप्त होगा?

57
0

अफगानिस्तान महिलाओं के साथ हुए क्रूरतम अत्याचार

तालिबानी बेरहमी का आलम यह है कि वे महिलाओं को मारने, उनकी आंखें निकालने और उनकी लाशों को कुत्तों को खिलाने से भी गुरेज नहीं करते हैं। ऐसे ही क्रूर अत्याचार से गुजरी एक अफगानी महिला ने अफगानिस्तान महिलाओं के साथ हुए अत्याचारों की जो कहानी सुनाई है, वह मजबूत दिल वालों को भी भावुक कर देगी।

फिरोज बख्त अहमद, (लेखक मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और मौलाना आजाद के पौत्र है
firozbakhtahmed08@gmail.com

यूं तो बहुत समय से मगर आजकल अफगानिस्तान में राक्षसी राज की खबरें दिल को दहला रही हैं। अभी तक यही पता नहीं चला कि वहां का प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति कौन है। यह भी नहीं पता कि वहां क्या कोई सरकार भी बनेगी या नहीं या ऐसे ही नरसंहार चलता रहेगा। अभी अमेरिका के लिए दफ्तर में काम करने वाले एक व्यक्ति को हेलीकॉप्टर के ऊपर बांध कर फांसी दे दी गई।

तालिबान राज में क्रूर हरकतों से दिल दहला देने वाला एक वीडियो वायरल हो है। तालिबान ने कंधार के ऊपर हवा में गश्त करते हुए अमेरिकी निर्मित ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर, जिससे अमेरिका के दुभाषिये को गले से लटकाया गया था, उड़ाने वाले लड़ाकों का एक वीडियो जारी करके उन्होंने अमेरिका को एक संदेश देने की कोशिश की है। इससे बड़ी हैवानियत क्या होगी। इन्होंने तो खूंखार जंगली जानवरों को भी मात दे दी है। इसकी सबसे बड़ी हानि उस मुसलमान को हो रही है जो सही मानों में राष्ट्रवादी, मानवतावादी और सही इस्लाम को मानता है।

यह भी समझ में नहीं आ रहा कि आखिर इतने सारे मुस्लिम देश इस नरसंहार पर खामोशी क्यों इख्तियार करे बैठे हैं। कुछ रोज पहले काबुल के हवाई अड्डे पर जो हमला फिदाईन हुआ था और उसमें जो लोग मारे गए थे, उनमें आई.एस.आई.एस.का हाथ बताया जा रहा है। मगर यह तो ऐसा ही लगता है कि इसमें कहीं न कहीं तालिबान का भी हाथ है। अमेरिका, तालिबान, पाकिस्तान आदि की यह बड़ी घिनवनी साजिश लगती है जो समय के चलते शायद सामने आए।


एक महिला पायलट को पत्थरों से गोद कर उसकी जान ले ली गई। एक और महिला की आंखें निकाल ली गईं। किसी भी उम्र की महिलाओं की सुरक्षा का कुछ पता नहीं क्योंकि कुछ समय पूर्व इन तालिबान ने कहा था कि उन्हें 15 वर्ष से ऊपर और 45 से कम आयु वाली महिलाओं की अपनी वासना के लिए आवश्यकता है। जो महिलाएं बुर्के में नहीं हैं, उनके साथ कोई भी सजा से लेकर बलात्कार और जान लेने तक कुछ भी हो सकता है। यह सब तो इस्लाम और शरिया का भाग नहीं है। इसको क्या नाम दिया जाए।

लेखक ने कई अफगानी युवतियों की दिल को छलनी कर देने वाली दास्तानें कई टीवी चैनलों पर सुनीं तो पता चला कि क्या कारण है कि ये युवतियां अफगानिस्तान के बजाए भारत में रहना क्यों पसंद करती हैं। दिल्ली के भोगल में अफगान मूल के कई लोग रहते हैं। यहीं अरफा भी रहती हैं, जो अफगानिस्तान के मजार-ए-शरीफ की रहने वाली हैं। अरफा कहती हैं, तालिबान भले ही कह रहा है कि महिलाओं को आजादी होगी। उनके साथ अत्याचार नहीं होगा। लेकिन पहले तालिबान राज में सबने देखा है कि क्या हुआ था। उन्होंने बताया, उस वक्त महिलाओं और खासतौर से युवा लड़कियों के साथ बहुत अत्याचार हुआ।

अरफा बताती हैं, उस समय तालिबान के लड़ाके आते थे, लड़कियों को उठाते , लड़कियों को उठाते थे, जबरन शादी करते थे, गलत काम करते थे और छोड़ देते थे। उसके बाद से किसी भी महिला को इन पर भरोसा नहीं है। अरफा का कहना है कि उनकी परिवार वालों से बात हुई है। वहां सभी महिलाएं डरी हुई हैं। कोई भी घर से नहीं निकल रहा है। सिर्फ बुजुर्ग महिलाएं निकल रहीं हैं, और वे भी घर के किसी मर्द के साथ जिसकी शिनाख्ती कार्ड की पहचान की जा रही है। अरफा की तरह ही जवाद बाजून को भी यही चिंता सता रही है। जवाद एक स्टूडेंट हैं और भोगल में रहते हैं। उनका कहना है कि अशरफ गनी ने उनके देश को बेच दिया है।

तालिबानी बेरहमी का आलम यह है कि वे महिलाओं को मारने, उनकी आंखें निकालने और उनकी लाशों को कुत्तों को खिलाने से भी गुरेज नहीं करते हैं। ऐसे ही क्रूर अत्याचार से गुजरी एक अफगानी महिला ने अफगानिस्तान महिलाओं के साथ हुए अत्याचारों की जो कहानी सुनाई है, वह मजबूत दिल वालों को भी भावुक कर देगी। 33 साल की महिला खतीरा ने अपने साथ हुए अत्याचार की जो दास्तां सुनाई है वह दहलाने वाली है। इस महिला को पहले तो तालिबानी लड़ाकों ने उन्हें कई बार चाकू घोंपे और फिर उनकी आंखें निकाल लीं। उस समय यह महिला 2 महीने की गर्भवती थी। तमाम मिन्नतें भी उसे तालिबानियों से नहीं बचा सकीं लेकिन किस्मत से वो जिंदा बच गईं और अपनी आंखों का इलाज कराने किसी तरह दिल्ली पहुंच गई। जिस समय तालिबानियों ने खतीरा को घेरा था वे गजनी शहर में अपने काम के बाद लौटकर घर जा रही थीं।

तालिबानी लड़ाकों द्वारा अफगानिस्तान में मचाए जा रहे आतंक को लेकर एक वीडियो में अफगानिस्तान की एक लड़की ने ऐसी बातें बयां की हैं, जो दिल दहलाने के लिए काफी है। कहीं घर से उठाकर उन्हें तालिबानी अपनी दरिंदगी का शिकार न बना लें, इस डर से सहमी ये वो लड़की हैं, जिन्हें हर पल जिंदगी की चिंता सताने लगी है। वीडियो में लड़की कहती है, ‘तालिबान काबुल में घुस चुके हैं। हम सब भागने को मजबूर हैं। हर कोई डरा हुआ है। हमारे होने या ना होने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि हम अफगानिस्तान में पैदा हुए हैं। मैं मदद के लिए भी नहीं कह सकती। मैं बस अपने आंसुओं के साथ रो सकती हूं और वीडियो बना सकती हूं।

हमारे बारे में कोई नहीं सोचता है। हम धीरे-धीरे मर रहे हैं और जल्द ही इतिहास बन जाएंगे। ये मजाक नहीं है। तालिबान जो भी प्रोपगण्डा कर रहे हैं कि वे बादल गए हैं और महिलाओं के साथ उनका सहयोग होगा, सब झूठ साबित हुआ क्योंकि उनके कट्टरपंथी शिक्षामंत्री ने अपना फरमान जारी कर दिया कि लड़के और लड़कियां स्कूल-कॉलेज आदि में एक साथ पढ़ाई नहीं कर सकते। यह वही घृणित मानसिकता है जिसके चलते, पाकिस्तान के स्वात कस्बे में मलाला और उसकी सहेलियों को मात्र इस लिए गोलियों से भून दिया गया था कि वे स्कूल जा रही थीं! तालिबान और पाकिस्तान के संबंधों को लेकर भी कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। भारत ने पूरे मामले में पाकिस्तान का नाम लेते हुए कोई सीधा बयान नहीं दिया है, लेकिन तालिबान की जीत पर पाकिस्तान के भीतर से कई तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

भारत में पाकिस्तान के राजदूत रहे अब्दुल बासित ने तालिबान की जीत को भारत की हार की तरह देखा। अब्दुल बासित ने अपने एक ट्वीट में कहा था, ‘अफगानिस्तान में पाकिस्तान को अस्थिर करने वाली जगह भारत के हाथ से निकलती जा रही है। वास्तव में देखा जाए तो पाकिस्तान की सेना के कई अफसरों ने तालिबानी लड़ाकों को न केवल शरण दी है बल्कि अफगानिस्तान जाकर भी उन्हें ट्रेनिंग दी है। उधर तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने ‘पाकिस्तान को तालिबान का दूसरा घर’ बताया है। पाकिस्तानी न्यूज वेबसाईट एआरवाई न्यूज टीवी के मुताबिक, मुजाहिद ने बुधवार को कहा कि पाकिस्तान दूसरा घर है और अपने घर के खलीफा कुछ नहीं होने देंगे। एआरवाई न्यूज को दिए एक विशेष इंटरव्यू में मुजाहिद ने अफगानिस्तान में चरमपंथी संगठनों की उपस्थिति, भारत प्रशासित कश्मीर और इस्लामिक स्टेट से लेकर भारत-पाकिस्तान संबंधों पर भी अपनी राय रखी।

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान जो कि अफगानिस्तान के तालिबान को अपना गुरु मानती है, के बारे में मुजाहिद ने कहा कि यह मुद्दा पाकिस्तान को देखना है और उनका इससे कोई सीधा वास्ता नहीं है। वास्तव में तो भारत सरकार को तालिबान जैसे हैवान संगठन से कोई संबंध नहीं रखना चाहिए मग इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक कमेटी बनाई है जिसमें अमित शाह, राजनाथ सिंह और सुरक्षा सलाहकार अजित कुमार दोभाल के अतिरिक्त अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर नजर रखने वाले सरकारी सलाहकार भी हैं। भारत को बहुत सोच-समझ कर यह निर्णय लेने की आवश्यकता है।

Previous articleसर्वे : उप्र, उत्तराखंड और गोवा में फिर लौटेगी भाजपा, कांग्रेस से छिनेगा पंजाब
Next articleचौरी चौरा और मालाबार के दंगाई स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नहीं हो सकते

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here