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विदुर की दूरदृष्टि के दूरदर्शी सत्य श्री नरेंद्र मोदी

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श्री नरेंद्र मोदी जी ने पार्टी की रीति-नीति में आवश्यक परिवर्तनों के साथ इस काम को इतनी कुशलता से संचालित किया है कि भाजपा आज समूचे विश्व में राजनीतिक शुचिता एवं अनुशासन की पर्याय के रूप में स्वीकार की जा रही है।

  • भूपेन्द्र सिंह

कालजयी दार्शनिक विदुर ने लिखा था, ‘अष्टौ गुणा: पुरुषं दीपयन्ति, प्रज्ञा च दम: श्रतुं च। पराक्रमश्चबहुभाषिता च दानं कृतज्ञता च।।Ó अर्थात- इन आठ गुणों से मनुष्य की बहुत प्रशंसा होती है, बुद्धि, कुलीनता, मन का संयम, ज्ञान, बहादुरी, कम बोलना, दान देना और दूसरे के उपकार को याद रखना। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की वर्षगांठ के शुभ अवसर पर विदुर जी की इस पंक्ति में मोदी जी की छवि किसी अतिशयोक्ति से पूरी तरह बचते हुए भी स्थापित की जा सकती है।

विषय सामग्री को वर्ष 2014 से लेकर अब तक के कालखंड में सीमित नहीं किया जा सकता। यह अपूर्ण व्याख्या वाली त्रुटि होगी। उनसे जुड़ी स्मृतियों की रेशमी डोर का पहला छोर वडनगर के उस रेलवे स्टेशन पर ले जाना होगा, जहां नरेंद्र दामोदर दास मोदी नामक बालक अपने परिवार की आजीविका में सहयोग के लिए कभी चाय बेचा करता था। अगले क्रम में गुजरात में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की उस शाखा की मानसिक पुनरावृत्ति करना अनिवार्य है, जहां यही बालक मात्र आठ वर्ष की आयु में संघ के सामीप्य का पुण्य लाभ हासिल कर रहा था। फिर वह देशाटन। साधु-संत तथा आश्रमों में व्यतीत किये गए दिन। तत्पश्चात वह राजनीतिक यात्रा, जो आज अपनी सफलता के चलते सकल विश्व के लिए आश्चर्य तथा शोध का विषय बन चुकी है।


समावेशी दृष्टिकोण


इन समस्त घटनाक्रमों में मैं एक विलक्षण तत्व देखता हूं। पूर्ण विश्वास के साथ। वह यह कि इन समस्त सोपानों के बीच मोदी जी के भीतर से नरेंद्र दामोदर दास मोदी होने का भाव अनंत तत्वों में विलीन होता चला गया है। नि:संदेह, नाम की अनिवार्यता जीवन के उपरान्त भी बनी रहती है। अत: वह श्री नरेंद्र मोदी तो हैं, किंतु यह उनके परिचय की औपचारिकता मात्र है। वास्तविक परिचय की पंक्ति में तो अब ‘प्रखर राष्ट्रवादी ‘वैश्विक सफल छवि वाले ‘लोकप्रिय एवं ‘जनसेवा को कटिबद्ध जैसे विशेषण श्री मोदी के समक्ष उनके सहचर के रूप में दृष्टिगोचर होते हैं। इसी सब के मध्य आप विदुर जी की दृष्टि से श्री मोदी का आकलन उत्तम पुरुष की श्रेणी में कर सकते हैं।

बुद्धिमत्ता तो बड़ी संख्या में लोगों में पायी जाती है, किन्तु मोदी जी जैसे व्यक्तित्व बिरले ही हैं, जो इस बुद्धि का प्रयोग सकारात्मक रूप से सर्व-समावेशी दृष्टिकोण के साथ कर सकें। संघ के राष्ट्रवाद से लेकर जनसंघ एवं भारतीय जनता पार्टी के विकास में मोदी जी ने अपनी प्रखर मेघा से अतुलनीय योगदान दिया है। देश के राजनीतिक इतिहास में पहली बार किसी गैर-कांग्रेसी दल को लगातार दोहरी सफलता के साथ बहुमत दिलाने का भागीरथी प्रयास श्री मोदी जी के चलते ही सफल हो सका। यहां श्री मोदी की कुलीनता का उल्लेख भी स्वाभाविक रूप से किया जाता है। परिवार तथा संघ से मिली कुलीनता की विरासत की पवित्रता को उन्होंने आज तक अक्षुण्ण रखा है। भाजपा को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनाने से भी अधिक चुनौतीपूर्ण था उसके इस स्वरूप को गौरव के साथ स्थायी बनाये रखना।

श्री नरेंद्र मोदी जी ने पार्टी की रीति-नीति में आवश्यक परिवर्तनों के साथ इस काम को इतनी कुशलता से संचालित किया है कि भाजपा आज समूचे विश्व में राजनीतिक शुचिता एवं अनुशासन की पर्याय के रूप में स्वीकार की जा रही है। निश्चित ही नरेंद्र मोदी जी भाजपा के इस कुल को अपनी कुलीनता के साथ गौरवमयी सफलता के पथ पर शेष सभी दलों से कई युग आगे तक ला चुके हैं। यदि विदुर जी के दृष्टिकोण में ही हृदय का संयम, ज्ञान तथा साहस की बात की जाए, तब भी मोदी जी इन समस्त मापदंडों पर भी पूर्णत: खरे सिद्ध हुए हैं। गुजरात में घोर विपरीत परिस्थितियों के बीच भी आपने लगातार तीन विधानसभा चुनावों में अपने सामर्थ्य से भाजपा को विजय दिलाई। वर्ष 2014 तथा 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की सफलता में मोदी फैक्टर का ही प्रमुख योगदान रहा।

आज विश्व की महाशक्तियां भारत से संबंध बनाने तथा उन्हें स्थायित्व प्रदान करने के लिए लालायित हैं। वैश्विक प्रकृति के निर्णयों में भारत के परामर्श को अभूतपूर्व रूप में महत्व दिया जा रहा है। वर्ष 2014 से पहले वाले कालखंड में जो देश अधिकांश समय हमारे महान राष्ट्र के लिए निरंतर कष्ट का कारण बने रहे, वह देश अब श्री मोदी के कारण ही स्वयं को कष्ट में पा रहे हैं। भारत के संदर्भ में इन अद्वितीय सफलताओं के पीछे श्री नरेंद्र मोदी का ज्ञान तथा साहस स्पष्ट देखा जा सकता है, साथ ही यह भी देखा जा सकता है कि इस सबके बाद भी क्षण भर के लिए भी श्री मोदी ने हृदय के संयम को विचलित होने नहीं दिया।

वह उतने ही सहज, सौम्य और सरल हैं, जितने कि वर्ष 2014 से पूर्व हुआ करते थे। वही ‘अपनों से अपनी बात वाली ‘मन की बात की शैली। वही देश के किसी बहुत ख़ास से लेकर आम व्यक्ति तक से स्नेहिल भाव में चर्चा और संपर्क। तोक्यो ओलंपिक के बाद वाली भारतीय महिला हॉकी टीम का वह दृश्य याद कीजिए। श्री नरेंद्र मोदी जी की बात सुनकर टीम की सदस्यों के जो आंसू बह निकले, वह इस दिशा में ही इंगित कर रहे थे कि यह आंसू किसी विपरीत परिस्थिति में अभिभावक की ओर से मिले संबल तथा साहस के चलते खुशी के चलते छलक जाने का प्रतीक हैं।
वाणी के धनी
विदुर नीति में कम बोलने से आशय यह है कि व्यक्ति अनावश्यक न बोले। यह मोदी जी की अनंत विशिष्टताओं में से एक है। संसद से लेकर किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में वह जो बोलते हैं, वह इतना तथ्यपरक तथा सत्य होता है कि हर कोई मंत्रमुग्ध होकर उन्हें सुनता ही चला जाता है। न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर पर उस रात ‘मोदी-मोदी का हर्षनाद करता अपार जनसमूह भी श्री नरेंद्र मोदी की बातों से प्रभावित होकर अपनी प्रसन्नता का इस तरह प्रदर्शन कर रहा था। मोदी जी जो बोलते हैं, वह मात्र सुनने ही नहीं अपितु गुनने के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण हो जाता है। उनकी वाणी को साक्षात वीणावादिनी मां सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त है।


श्री नरेंद्र मोदी ने इस देश को अपना सर्वस्व दान किया है। सात साल से अधिक की अवधि का प्रत्येक क्षण उन्होंने मानवता की सेवा को अर्पित किया है। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र ने लगातार दूसरी बार बहुमत के रूप में जो उपकार किया, मोदी जी उसे न कभी भूले हैं और न ही भूलेंगे। ये निरंतर देश की चिंता, देशवासियों की खुशहाली का चिंतन और इस दिशा में अथक प्रयास बताते हैं कि किस तरह आज विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय प्रधानमंत्री ने इस उपकार को अपने परोपकार से चुकाने की साधना को निरंतरता प्रदान की हुई है। यदि विदुर जी की उत्तम मानव वाली व्याख्या को उनकी दूरदर्शिता से देखूं तो मुझे यह कहने में अपार प्रसन्नता होती है कि द्वापर युग की वह व्याख्या श्री नरेंद्र मोदी के रूप में इस युग में भी सार्थक हो रही है। आदरणीय प्रधानमंत्री जी को वर्षगांठ की शुभकामनाएं देते हुए स्वयं को धन्य पा रहा हूं। आपकी निरोगी दीर्घायु की परम पिता परमेश्वर से प्रार्थना है।

-(लेखक मध्यप्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री है

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