Home लेख तीसरी लहर को रोकने के लिए सतर्कता जरूरी

तीसरी लहर को रोकने के लिए सतर्कता जरूरी

28
0

दूसरी लहर के शिखर के दौरान भारत में हर दिन जहाँ औसतन 4 लाख नए मामले दर्ज किए जा रहे थे

तीसरी लहर टाली नहीं जा सकती लेकिन यह कब आएगी, इसकी भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है लेकिन एहतियात बरतकर इससे कुछ हद तक बचा जा सकता है। कई जगह कोविड-19 दिशानिर्देशों की धज्जियाँ उड़ती देखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बहुरूपिया कोरोना वायरस के हर प्रकार पर नजऱ रखनी होगी। उन्होंने कहा, ‘कई बार लोग सवाल पूछते हैं कि तीसरी लहर के बारे में क्या तैयारी है? तीसरी लहर पर आप क्या करेंगे? आज सवाल यह होना चाहिए हमारे मन में कि तीसरी लहर को आने से कैसा रोका जाए।’

  • सुखदेव वशिष्ठ

भारत में कोविड की तीसरी लहर का प्रश्न बार-बार उठ रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारी काफी जनसंख्या अभी भी जोखिम में है। भले ही हाल में हुए सीरो-सर्वे में दो-तिहाई लोगों में कोरोना वायरस की एंटी-बॉडीज पाई गई हैं लेकिन आईसीएमआर के महानिदेशक डॉक्टर बलराम भार्गव का कहना है कि जिन क्षेत्रों में अधिक लोगों में एंटीबॉडी नहीं बनी है, वहाँ कोविड की लहर आने का खतरा बना हुआ है। कुल मिलाकर हम अभी भी सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता (हर्ड इम्युनिटी) के स्तर तक नहीं पहुँचे हैं और न ही हम संक्रमण के माध्यम से ‘हर्ड इम्युनिटीÓ प्राप्त करना चाहते हैं। सर्वे एक आशा की किरण भी है क्योंकि 6 से 17 वर्ष के बच्चों में आधे से अधिक सीरो पॉजि़टिव मिले हैं। लेकिन साथ ही संकेत भी है कि लापरवाही की अभी बिल्कुल जगह नहीं है।

दुनिया भर में कोविड की तीसरी लहर दस्तक दे चुकी और अगर हमने कोविड नियमों का पालन नहीं किया तो हमें भी इस विपत्ति को झेलना पड़ेगा। नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ वीके पॉल के शब्दों में, ‘कोविड-19 के विरुद्ध लड़ाई में अगले 100-125 दिन महत्वपूर्ण हैं।Ó
इंडोनेशिया में 12,000 से बढ़कर प्रतिदिन 50,000 से अधिक मामले आने लगे थे।

बांग्लादेश में पहले 7,000 मामले मिल रहे थे लेकिन 13,000 से अधिक मामले भी कई दिन आए। ब्रिटेन में अभी कोविड की तीसरी लहर आ चुकी है। वहाँ दूसरी लहर के शिखर में प्रतिदिन 50,000 से अधिक मामले मिल रहे थे पर अब तीसरी लहर में प्रतिदिन 40,000 से अधिक मामले इसी ओर बढ़ते दिख रहे हैं।

ऑस्ट्रेलिया के भी कई शहरों में लॉकडाउन लगाया जा चुका है। स्पेन में सप्ताह में कोविड मामलों की संख्या में 64 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि नीदरलैंड में 300 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। इससे कोविड की अगली लहर काफी गंभीर लग रही है। भारत में भी स्थिति बहुत बढिय़ा नहीं है, 19 जुलाई को नए मामले 30,000 तक गिरने के बाद 20 जुलाई को पुन: बढ़कर 42,000 हो गए।

भारत में कोविड का वर्तमान परिदृश्य

मई महीने में दूसरी लहर के शिखर के दौरान भारत में हर दिन जहाँ औसतन 4 लाख नए मामले दर्ज किए जा रहे थे, वह औसत अब 40,000 के नीचे चला गया है। राज्यों में लगाए गए सख्त लॉकडाउन की वजह से कोविड के नए मामलों में यह गिरावट संभव हो पाई है। टेस्ट सकारात्मकता दर में भी गिरावट देखी गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि गलतियों को अगर दोहराया गया तो ये तीसरी लहर के जल्दी आने का कारण बन सकती हैं। जीविकाओं के लिए अर्थव्यवस्था को खोलना भी आवश्यक है लेकिन कोविड नियमों के पालन पर सख्ती बढऩी चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो वायरस को तेज़ी से फैलने में सहायता मिलेगी जो तीसरी लहर के जल्दी आने का कारण बन सकती है।

कोविड के डेल्टा प्रकार के कारण भारत को दूसरी लहर का सामना करना पड़ा था जिसमें 80 प्रतिशत नए मामलों का उत्तरदायी यह प्रकार ही था। साथ ही वैज्ञानिकों ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर वायरस के प्रसार को अतिसंवेदनशील आबादी में फैलने से रोका नहीं गया तो कोविड के और संक्रामक एवं घातक प्रकार आ सकते हैं।

भारत सरकार ने पहले ही ‘डेल्टा प्लस’ प्रकार को ‘वेरिएंट ऑफ़ कंसर्न’ यानी चिंताजनक घोषित कर दिया है। मार्च जैसी स्थिति अभी फिर से बन गई है। दिल्ली समेत उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों में कोविड नियंत्रित नजऱ आ रहा है लेकिन मार्च की तरह केरल और महाराष्ट्र में केस लगातार बढ़ रहे हैं। केरल में फिर से लॉकडाउन लगाना पड़ा है। वहां ठीक मार्च की तरह ही बाज़ारों में भीड़ होने लगी है, सामाजिक दूरी की बजाय मास्क से दूरी होने लगी है। कम होते सक्रिय मामलों के बीच तीसरी लहर की आहट सुनाई नहीं देती लेकिन कुछ राज्यों से आते मामलों की संख्या अत्यधिक चिंताजनक है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़े के अनुसार अकेले केरल की ही भारत के कुल कोविड मामलों का 30.3 प्रतिशत की भागीदारी है।अप्रैल में यह आँकड़ा मात्र 6.2 प्रतिशत का ही था और जून में यह क्रम से बढ़ते हुए 10.6 प्रतिशत और 17.1 प्रतिशत हो गया। कुछ ऐसी ही स्थिति महाराष्ट्र की है। देश के कुल मामलों का 20.8 प्रतिशत महाराष्ट्र में है। अप्रैल में जब दूसरी लहर गति पकड़ रही थी, तब यह 26.7 प्रतिशत था।

इसके साथ ही तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा में भी अप्रैल-मई की अपेक्षा वर्तमान में भारत के कुल मामलों में भागीदारी बढ़ गई है। सिक्कीम, मणिपुर, मिज़ोरम, त्रिपुरा, नागालैंड, असम और अरुणाचल प्रदेश जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में भी कोविड-19 केसों में बढ़ोतरी देखने को मिली है।

नए प्रकार और भारत में कोविड की तीसरी लहर

विशेषज्ञों के अनुसार, नए प्रकारों की शीघ्र अति शीघ्र पहचान आवश्यक है। इसलिए हमें जीनोम सीक्वेंसिंग के और प्रयास करने होंगे और नए प्रकारों को जल्द से जल्द पहचानना होगा। कंटेनमेंट के नियमों का पालन नए प्रकारों के खतरे को कम करने के लिए करना ही होगा।
भारत में जून महीने तक लगभग 30,000 नमूने सीक्वेंस किए गए हैं, लेकिन विशेषज्ञों की राय है कि गति बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।

तीसरी लहर का प्रभाव और इसका प्रसार इस बात पर भी निर्भर करेगा कि भारतीय जनसंख्या में इम्युनिटी कितनी है। यग जानने के दो माध्यम हैं- पहला, जिन लोगों को टीका लग चुका है, उन्हें कोविड से संभावित इम्युनिटी मिल चुकी है। दूसरा, जिन लोगों को एक बार कोरोनावायरस संक्रमण हो चुका है, उन्हें भी इस वायरस से कुछ हद तक इम्युनिटी मिल गई है। हालाँकि, कोवि की दूसरी लहर में टीका लगवा चुके और पहले संक्रमित हो चुके, दोनों तरह के लोगों को भी संक्रमण हुआ था।

विशेषज्ञ और भारत में तीसरी लहर का संभावित समय

एम्स में पाँच राज्यों में 10,000 नमूनों के साथ सीरो प्रिवलेंस अध्ययन किया गया। 4,500 प्रतिभागियों का डाटा लिया गया है जिसके बाद कहा गया कि भारत में तीसरी लहर आई तो उसमें बड़े और बच्चे बराबर खतरे में होंगे। ऐसा नहीं कह सकते कि बच्चों को खतरा अधिक होगा।

रॉयटर्स के एक सर्वे में 100 प्रतिशत विशेषज्ञों ने माना है कि भारत में तीसरी लहर आएगी ही। 85 प्रतिशत ने कहा कि अक्टूबर में तीसरी लहर आएगी। कुछ ने अगस्त-सितंबर और कुछ ने नवंबर-फरवरी के बीच तीसरी लहर की आशंका जताई है। प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन का कहना है- तीसरी लहर टाली नहीं जा सकती लेकिन यह कब आएगी, इसकी भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है लेकिन एहतियात बरतकर इससे कुछ हद तक बचा जा सकता है।

कई जगह कोविड-19 दिशानिर्देशों की धज्जियाँ उड़ती देखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बहुरूपिया कोरोनावायरस के हर प्रकार पर नजऱ रखनी होगी। उन्?होंने कहा, ‘कई बार लोग सवाल पूछते हैं कि तीसरी लहर के बारे में क्या तैयारी है? तीसरी लहर पर आप क्या करेंगे? आज सवाल यह होना चाहिए हमारे मन में कि तीसरी लहर को आने से कैसा रोका जाए।’

मोदी ने कहा कि ‘कोविड ऐसी चीज है, वह अपने आप नहीं आती है। कोई जाकर ले आए, तो आती है। इसलिए हम अगर सावधानी से रहेंगे, तो तीसरी लहर को रोक पाएँगे। कोविड की तीसरी लहर को आते हुए रोकना बड़ी बात है। इसलिए कोविड नियमों का पालन आवश्यक है।’ आएँ मोदी के तीसरी लहर को रोकने के लक्ष्य को संगठित होकर पूरा करें और सभी टीका लगवाएँ।
(सुखदेव वशिष्ठ विद्या भारती के सदस्य हैं। लेख स्वराज्य से साभार)

Previous articleप्रदेश के ज्यादातर जिलों में जारी है बारिश का सिलसिला
Next articleस्वतंत्रता संघर्ष के दो महानायक : तिलक और चंद्रशेखर आजाद

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here