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शहरी कायाकल्प: शहरों का जीवन स्तर सुधारने की अभिनव पहल

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केंद्र के तीन प्रमुख मिशनों ने छह साल पूरे कर लिए हैं। इस दौरान राज्यों को विकास की योजनाओं का मूल्यांकन व अनुमोदन करने की शक्तियां सौंपकर उन्हें सक्षम और कुशल प्रशासन देने योग्य बनाया गया है। विभिन्न राज्यों में स्पर्धा की भावना पदा की गई।

  • हरदीप एस. पुरी

आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के तीन प्रमुख मिशनों का शुभारम्भ 25 जून, 2015 को हुआ था। इनके छह साल पूरे हो रहे हैं। इसी दिन प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन (एएमआरयूटी, अमृत) तथा स्मार्ट सिटी मिशन को लॉन्च किया गया था। यह एक दिलचस्प प्रयोग है, जिसके माध्यम से स्थापित प्रतिमानों में बदलाव हुआ है, इनके संदेश में सूक्ष्मता है, लेकिन प्रभाव में मौलिकता है। श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार, देश के नागरिकों द्वारा अपने भविष्य को परिभाषित करने के तरीके को फिर से नया रूप दे रही है।

शहरी परिदृश्य को शहरों से और शहरों को इसके निवासियों से परिभाषित किया जाता है। अपने नीति-निर्माताओं के माध्यम से लोगों की सामूहिक इच्छा और बुद्धिमत्ता, शहरों का निर्माण करती है। मई,2014 के बाद से सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तनों में से एक है – सहकारी संघवाद की भावना का वास्तविक आह्वान। प्रत्येक मिशन के तहत परियोजनाओं के मूल्यांकन और अनुमोदन के लिए, राज्यों को शक्तियां सौंपी गईं। इससे पहले, दिल्ली स्थित मंत्रालय मेंप्रत्येक परियोजना का मूल्यांकन और अनुमोदन किया जाता था। इस तथ्य को नजऱअंदाज किया जाता था कि राज्यों में समान रूप से सक्षम अधिकारी काम करते हैं और अपने नागरिकों के हित में निर्णय लेने के लिए राज्य नेतृत्व पर भरोसा किया जाना चाहिए।

राज्यों और केंद्र सरकार के बीच विश्वास कायम करने के इस बड़े कदम के सुखद परिणाम सामने आए। 2004से 2014 तक यूपीए शासन के दस वर्षों में, शहरी क्षेत्र में कुल निवेश लगभग 1,57,000 करोड़ रुपये था, जबकि 2014से 2021तक एनडीए के सात वर्षों में यह आंकड़ा लगभग 11,83,000 करोड़ रुपये रहा! इसी तरह, यूपीए शासन के दस वर्षों में, लगभग 12 लाख घर बनाए गए। जून, 2015में पीएमएवाई (यू) के शुभारंभ के बाद से, मोदी सरकार ने पहले ही 1.12 करोड़ से अधिक घरों को मंजूरी दे दी है, लगभग 49 लाख घरों को पूरा कर लिया गया है और इन्हें लाभार्थियों को सौंप दिया है। शेष घरों का निर्माण कार्य, मार्च, 2022 में मिशन की अवधि समाप्त होने से पहले पूरा हो जाएगा।

सरकारी कार्यक्रमों का परंपरागत रूप से एक अभिशाप धीमा कार्यान्वयन और लीकेज रहा है। इनको रोका गया है। जियो टैगिंग के माध्यम से घरों के निर्माण की प्रगति की निगरानी की जा रही है और इसे धनराशि जारी करने से जोड़ा गया है। पहली बार, प्रधानमंत्री ने हमारी विश्व स्तरीय अंतरिक्ष एजेंसी, इसरो को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी उपकरणों के उपयोग में सरकारी विभागों को सहायता देने का अनुरोध किया था। सभी मिशन जीआईएस आधारित उपकरणों का व्यापक रूप से उपयोग करते हैं।

निर्माण की गति को तेज करने और सर्वोत्तम नई तकनीकों को लाने के लिए, एक वैश्विक आवास प्रौद्योगिकी चुनौती शुरू की गई थी और चुनौती प्रक्रिया के आधार पर देश के छह भू-जलवायु क्षेत्रों में छह प्रकाशस्तंभ परियोजनाओं की पहचान की गई है। देश भर के इंजीनियरिंग संस्थानों के साथ मजबूत जुड़ाव के माध्यम से इन प्रौद्योगिकियों को मुख्यधारा में लाने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

केंद्र सरकार द्वारा पीएफएमएस-सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली- के माध्यम से धनराशि जारी की जा रही है। यह इलेक्ट्रॉनिक मोड सुनिश्चित करता है कि केंद्रीय धन राज्य के खजाने में निर्बाध रूप से पहुँच जाए। इससे कार्य-कुशलता में सुधार होता है और धोखाधड़ी पर रोक लगती है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी), जहां लाभार्थी के लिए इच्छित धन सीधे उसके बैंक खाते में जमा किया जाता है, के साथ यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि बिचौलियों को प्रणाली से जुआ खेलने या लाभार्थी को लाभ नहीं देने या बदल देने जैसे गलत कार्य करनेसे बाहर कर दिया गया है।

पीएमएवाई(यू) के तहत बनाया गया घर, घर की महिला के नाम पर है या संयुक्त स्वामित्व में है और इसमें अनिवार्य रूप से एक शौचालय है। यह महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देता है और बालिकाओं की गरिमा की रक्षा करता है। आधार संख्या एक और दुर्जेय हथियार है, जो यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक पंजीकृत लाभार्थी को घर मिले। इसमें बॉयोमीट्रिक्स मदद करेगा। दशकों तक, गरीबों को सरकारी लाभ से वंचित रखा गया था। सरकारी लाभ नाम बदलकर दूसरे लोग हड़पते रहे हैं। बिचौलियों और भ्रष्ट अधिकारियों के बीच गलत गठजोड़ अब समाप्त हो गया है।

अमृत मिशन हमारे शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) – बिजली, पानी की आपूर्ति, सीवरेज, आदि को प्रभावित करने वाले बुनियादी ढांचे से सम्बंधित समस्यायों का समाधान करता है। अमृत मिशन, हमारे शहरी शासन की सबसे कमजोर कड़ी-शहरी बुनियादी ढांचा और घरों की बुनियादी आवश्यकता- को दूर करने का प्रयास कर रहा है। करीब 6,000परियोजनाओं के लिए 81,000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। कुछ राज्यों में मिशन शुरू होने पर राज्य स्वीकृत कार्य योजना (एसएएपी) के तहत अनुमोदित धनराशि से अधिक धनराशि मंजूर की गयी है। राज्य, एसएएपी के अतिरिक्त धन व्यय करने के लिए तैयार हैं। इसमें एक लाख से अधिक आबादी वाले 500 शहरों को शामिल किया गया है।

अमृत मिशन, सुधार एजेंडा के साथ सम्पूर्ण शहरी शासन पर ध्यान केंद्रित करता है। टिकाऊ यूएलबी पर जोर देने से परिणाम मिल रहे हैं, क्योंकि दस यूएलबी पहले ही म्युनिसिपल बॉन्ड के जरिए 3,840 करोड़ रुपये जुटा चुके हैं। शिक्षा मंत्रालय के साथ साझेदारी में ‘द अर्बन लर्निंग इंटर्नशिप प्रोग्राम (ट्यूलिप)’ के माध्यम से यूएलबी को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

205,000 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश के साथ, स्मार्ट सिटीज मिशन लोक- केंद्रित विकासवादी प्रक्रिया है, जिसमें नागरिक उन शहरों के विजन में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं, जिनमें वे रहते हैं। युवा-वर्ग ही उस शहर की प्रकृति का निर्धारण करेंगे,जिनमें वे निवास करना चाहते हैं। लोगों, आदतों, व्यवहार सभी को बदलना होगा। कोविड 19 महामारी के दौरान, स्मार्ट शहरों के लिए एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र, जो पहले से ही 100 स्मार्ट शहरों में से 50 से अधिक में कार्यरत हैं, ने स्वास्थ्यकर्मियों और शहर के प्रशासकों को सक्षम करने के लिए वास्तविक समय पर जानकारी प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन कार्यक्रम संबंधी हस्तक्षेपों के साथ-साथ, एनडीए सरकार ने रियल एस्टेट क्षेत्र में नियामक ढांचे को मजबूत किया है। इसके लिए रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 लागू किया गया है।

इसके साथ, हाल ही में किराये के आवास क्षेत्र के विकास के लिए,मॉडल किरायेदारी अधिनियम पेश किया गया है। प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोग के साथ शहरी क्षेत्र में तीव्र गति से बदलाव हो रहे हैं। यही आगे का भी रास्ता है। शहर के प्रशासक, मिशनों में प्रतिस्पर्धा की भावना और विभिन्न मानकों पर शहरों की समय-समय पर रैंकिंग के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। यह लोगों के लिए शुभ संकेत है। उच्चतम स्तरों पर मिशनों की निरंतर निगरानी की जा रही है। कठोर समीक्षा बैठकों में, जिनकी अध्यक्षता स्वयं प्रधानमंत्री करते हैं, जवाबदेही की सावधानीपूर्वक जांच की जाती है। काम न करने वालों को चुपचाप बाहर निकाला जा रहा है, कमियों को दूर किया जा रहा है और लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। सभी कार्यक्रमों के केंद्र में गरीबों को स्थान दिया गया है। पिछले सात वर्षों में एक बात स्पष्ट रूप से रेखांकित हुई है। मोदी सरकार गरीबों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता में अटल है और यह इससे विचलित नहीं होगी।
(लेखक केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री हैं।)

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