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निजी डेटा के लिए यूपीआई से जुड़ा क्षण

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भारत ने यथास्थिति को बुनियादी रूप से बदलने के लिए पिछले सप्ताह एक और महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की। इस बार बदलाव व्यक्ति विशेष और छोटे उद्यमों को उनके निजी डेटा के माध्यम से सशक्त बनाने के इरादे से किया गया है।

  • अनिल पद्मनाभन

भारत ने यथास्थिति को बुनियादी रूप से बदलने के लिए पिछले सप्ताह एक और महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की। इस बार बदलाव व्यक्ति विशेष और छोटे उद्यमों को उनके निजी डेटा के माध्यम से सशक्त बनाने के इरादे से किया गया है। निजी डेटा के इस मुद्रीकरण को संभव बनाने वाले एकाउंट एग्रीगेटर (एए) ढांचे का शुभारंभ आईस्पिरिट द्वारा आयोजित एक आभासी कार्यक्रम में किया गया। आईस्पिरिट बेंगलुरु के बाहर स्थित प्रौद्योगिकी के प्रसार के लिए काम करने वाला एक समूह है और इसने यूपीआई या यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस को सशक्त बनाने वाले इंडिया स्टैक आर्किटेक्चर के निर्माण में मदद की है। भारतीय स्टेट बैंक, आईडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई सहित आठ अधिकृत संस्थाएं भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नियामक दायरे में हैं।

एकाउंट एग्रीगेटर (एए) से संबंधित यह ढांचा विशेष रूप से व्यक्ति विशेष और छोटे उद्यमों के लिए डेटा के सहमति-आधारित मुद्रीकरण को संभव बनाता है, जोकि अन्यथा अधिकांश वित्तीय मध्यस्थों की नजरों से ओझल था। लंबित पड़े डेटा प्राइवेसी कानून को एक बार संसद की मंजूरी मिल जाने के बाद इस रणनीति से जुड़े सभी पहलू लागू हो जायेंगे।

सत्यापित व्यक्तिगत डेटा का यह आदान-प्रदान न केवल वित्तीय समावेशन के एक और दौर को बढ़ावा देगा, बल्कि खपत में एक नया उछाल ला सकता है। वित्तीय समावेशन के इस नए दौर में जहां अधिक से अधिक व्यक्ति विशेष और छोटे उद्यमों को उनके व्यक्तिगत डेटा के माध्यम से ऋण प्राप्त करने के लिए और भारत में चल रही फिनटेक क्रांति को सशक्त बनाया जाएगा, वहीं कोविड के बाद की दुनिया में भारत को खपत में एक नए उछाल की सख्त जरूरत है।

डेटा के मामले में लोकतंत्र

नजान लोगों के लिए एकाउंट एग्रीगेटर (एए) बहुत कुछ एक वित्तीय मध्यस्थ जैसा है। हालांकि दोनों के बीच एक बड़ा अंतर है। एकाउंट एग्रीगेटर (एए) धन हस्तांतरण को सुविधाजनक बनाने के बजाय किसी व्यक्ति के डेटा के आदान-प्रदान की देख-रेख करता है। इसका मतलब यह है कि किसी व्यक्ति के सभी आंकड़ों, चाहे वो धन या स्वास्थ्य से जुड़े हों, को अब डिजिटल माहौल में हासिल किया जा सकता है और उसे एकाउंट एग्रीगेटर (एए) का उपयोग करके साझा किया जा सकता है।

यह लेन-देन सहमति पर आधारित होगा और एकाउंट एग्रीगेटर (एए) डेटा के मामले में अनजान रहता है- ये संस्थाएं न तो अपने से होकर गुजरने वाले डेटा को देख सकती हैं और न ही इसे इक_ा कर सकती हैं और जो कंपनियां इस डेटा का व्यावसायिक उपयोग के इरादे से इस्तेमाल करना चाहती हैं, उन्हें इसके लिए भुगतान करना होगा।

भुगतान की दरें अलग-अलग होंगी और यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इसका उपयोग एक बार किया जा रहा है या कई बार। अब तक यह मूल्य या तो अप्राप्त रह जा रहा था या फिर इस डेटा का इस्तेमाल विभिन्न प्लेटफार्मों द्वारा मुफ्त में किया जा रहा था। यह कुछ ऐसी बात है जिसके बारे में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के पूर्व प्रमुख, इंफोसिस के अध्यक्ष और एकाउंट एग्रीगेटर (एए) के प्रमुख समर्थक नंदन नीलेकणि अक्सर संक्षेप में कहते हैं : भारतीय भले ही आर्थिक रूप से गरीब हैं, लेकिन डेटा के मामले में समृद्ध हैं।

एकाउंट एग्रीगेटर (एए) का शुभारंभ डेटा के मामले में सशक्तिकरण के जरिए इन दो चरम स्थितियों के समेकन की मांग कर रहा है। इस लिहाज से यह ‘मध्यरात्रि में आजादी’ का एक और पल के जैसा है और यह अद्भुत संयोग है कि ऐसा भारत की आजादी की 75वीं वर्षगांठ के दौरान हो रहा है। वास्तव में, यह नियति के साथ एक और साक्षात्कार है।

डेटा के मामले में समृद्धि

एकाउंट एग्रीगेटर (एए) से संबंधित ढांचे के शुरुआती उपयोगों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) जैसे जनसांख्यिकीय वर्गों के लिए पहली बार ऋण संबंधी अवसर पैदा करना शामिल होगा। देश की राष्ट्रीय आय में लगभग एक तिहाई का योगदान देने के बावजूद, देश के 400 मिलियन से अधिक की श्रमशक्ति के एक चौथाई को रोजगार देने और जोखिम लेने की अदम्य भूख होने के बावजूद, औपचारिक क्रेडिट लाइनों तक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की पहुंच सीमित है। यह काफी हद तक उनकी आर्थिक स्थिति की अनौपचारिक प्रकृति के कारण है, जोकि बैंकों से पारंपरिक ऋण के लिए पात्र होने के लिए जरूरी प्रभाव उत्पन्न करने की उनकी क्षमता को सीमित करता है। यह सब कुछ बदल जाने वाला है।

एकाउंट एग्रीगेटर (एए) से संबंधित ढांचे की शुरुआत एक ऐसे समय में हो रही है जब फिनटेक कंपनियां पहले ही जमानत के अलावा अन्य पहलुओं पर ध्यान केन्द्रित करके कर्ज देने के कारोबार को अस्त-व्यस्त करना शुरू कर चुकी हैं। उधार लेने वाले लोगों को ठीक-ठीक चिन्हित करने के लिए इन फिनटेक कंपनियों द्वारा आजमाए जा रहे मनोविज्ञान के नए तरीकों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को मिलने वाले नकदी प्रवाह या वस्तु एवं सेवा कर प्राप्तियों की थाह लेना शामिल है।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को मौसमी व्यवसाय के लिए धन देने के उद्देश्य से जमानत मुक्त व्यापारिक ऋण और लचीली कार्यशील पूंजी पहली बार औपचारिक रूप से एक ऋण संबंधी ब्यौरा तैयार करेगी। यह कदम अकेले अपेक्षाकृत अधिक पारंपरिक कर्जदाताओं की नजर में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को आंशिक रूप से जोखिम से मुक्त करेगा। इस किस्म का ऋण संबंधी सशक्तिकरण, जिसे व्यक्ति विशेष तक भी बढ़ाया जा सकता है, अपेक्षाकृत और अधिक व्यावसायिक गतिविधियों को संभव बना सकता है यानी सभी के लिए एक फायदेमंद स्थिति।

एकाउंट एग्रीगेटर (एए) से संबंधित ढांचे का एक दमदार उपयोग यह हो सकता है कि लगभग 1 ट्रिलियन रुपये वाली ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के 100 मिलियन से अधिक लाभार्थी कैसे सरकार से अपनी मजदूरी की प्राप्तियों को दर्ज करने वाले अपने डेटा का उपयोग ऋण प्राप्त करने के लिए कर सकें। फिलहाल ऐसा संभव नहीं है क्योंकि ऋण जमानत की पूर्व–शर्त पर दिया जाता है और इससे संबंधित डेटा को साझा नहीं किया जाता है।

यूपीआई की सफलता, जोकि एकाउंट एग्रीगेटर (एए) से संबंधित ढांचे द्वारा उपयोग किए जा रहे ‘आधारÓ पर आधारित इंडिया स्टैक प्रौद्योगिकी आर्किटेक्चर का ही लाभ उठाती है, यह बताती है कि इस क्षमता का दोहन किया जा सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, यूपीआई के उपयोग के जरिए होने वाले लेन-देन तीन वर्षों में तेजी से बढ़े हैं। मई 2018 में यह लेन-देन 189.3 मिलियन था, 2019 के इसी महीने के दौरान 733.4 मिलियन और इस साल मई में आश्चर्यजनक रूप से 2.54 ट्रिलियन रहा।

अंतिम रूप से विश्लेषण में यह स्पष्ट है कि एकाउंट एग्रीगेटर (एए) से संबंधित ढांचा क्रेडिट लाइनों को पैदा करने के लिए निजी डेटा के मुद्रीकरण के दुस्साहसी विचार को शक्ति प्रदान कर रहा है, जोकि जमानत-आधारित कर्ज देने के वर्तमान चलन के ठीक उलट है। यही वजह है कि डेटा को नया ईंधन कहा जाता है।

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