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सही कौशल प्रबंधन से ही बेरोजगारी दूर होगी

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  • कोरोना महामारी ने इस समस्या को और बढ़ा दिया

अगस्त के महीने में सालाना आधार पर 89 प्रतिशत ग्रोथ हुई है जो अगस्त 2019 के मुकाबले 24 प्रतिशत अधिक है। आई.टी. सेल से लेकर रियल स्टेट, टेलीकॉम, हेल्थकेयर, फार्मा क्षेत्र में कोरोना के पूर्व के मुकाबले अधिक भर्तियां की गयी। सेवा क्षेत्र जैसे पर्यटन, ट्रेवल और हॉस्पिटलिटी क्षेत्र में भी भर्तियां में तेजी हुई है। भारत एक युवा देश है। कौशल एक ऐसा साधन है जिसके द्वारा युवाओं को सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही उद्योगों की मांग के अनुसार कुशल कार्यबल तैयार कर स्किल गैप को कम किया जा सकता है।

  • आर.जी. द्विवेदी, राष्ट्रीय नियोक्ता फेडरेशन के क्षेत्रीय निदेशक है
    rgdwivedi@yahoo.com

देश में बेरोजगारी बहुत बड़ी समस्या है। वर्तमान में बेरोजगारी की दर लगभग 8 से 10 प्रतिशत के बीच है। कोरोना महामारी ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है। फिर भी धीरे-धीरे जैसे विनिर्माण में वृद्धि व्यापारिक एवं सेवा क्षेत्र में सुधार हो रहा है उसी तरह से रोजगार में भी बढ़त हो रही है। अगस्त के महीने में सालाना आधार पर 89 प्रतिशत ग्रोथ हुई है जो अगस्त 2019 के मुकाबले 24 प्रतिशत अधिक है। आई.टी. सेल से लेकर रियल स्टेट, टेलीकॉम, हेल्थकेयर, फार्मा क्षेत्र में कोरोना के पूर्व के मुकाबले अधिक भर्तियां की गयी। सेवा क्षेत्र जैसे पर्यटन, ट्रेवल और हॉस्पिटलिटी क्षेत्र में भी भर्तियां में तेजी हुई है।

भारत एक युवा देश है। कौशल एक ऐसा साधन है जिसके द्वारा युवाओं को सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही उद्योगों की मांग के अनुसार कुशल कार्यबल तैयार कर स्किल गैप को कम किया जा सकता है। युवकों को सही दिशा में उनके क्षमतानुसार कौशल विकास से ही बेरोजगारी दूर हो सकती है। परम्परागत उद्योगों को बढ़ावा देकर तथा उसी क्षेत्र में कौशल में गुणवत्ता में वृद्धि करने से भी रोजगार में वृद्धि हो सकती है। जिस औद्योगिक इकाई स्थापित करने की सरकार की योजना हो तो उसी से सम्बंधित कौशल विकास किया जाना चाहिए। उदाहरण स्वरूप यदि खाद्य प्रसंस्करण की इकाईयों को स्थापना करने की योजना है तो उसी से सम्बन्धित कौशल विकास किया जाना चाहिए। कई बार दोनों में समन्वय नहीं होने से कठिनाई आती है तथा वांछित फल भी नहीं मिलता है।

उभरते उद्योगों की मांग के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार करके स्किल गैप को भरा जा सकता है। कौशल विकास और उद्यमशीलता प्रशिक्षण भागीदारों तथा उद्योगों के साथ मिलकर आपस में समन्वय करके युवकों का कौशल विकास किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने युवाओं को प्रासंगिक रहने के लिए स्किल अपस्किल और रीस्किल का मंत्र दिया है। इस मंत्र को उपयोग कर युवकों को कौशल विकास संस्थान कुशल कार्यबल बना सकते है। कौशल विकास जिला स्तर पर उद्योगों एवं अन्य सेवा क्षेत्रों पहचान की जानी चाहिए। असंगठित क्षेत्र जिसमें सुक्ष्म इकाईयां भी शामिल है उसमें अकुशल एवं अर्द्धकुशल युवकों को काम मिलता है।

करीब 40 प्रतिशत असंगठित कामगार खुद ही नियोक्ता भी है और कर्मचारी भी है। असंगठित क्षेत्र तक औपचारिक या सांगठनिक कौशल भी पहुंच आसान करनी चाहिए। इसके लिए परम्परागत प्रशिक्षण के साथ आधुनिक तकनीक और विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलीजेन्स रोबोटिक्स, ड्रोन तथा इंडस्ट्री 4 के युग में कौशल की प्रगति तेजी से बदल रही है। तकनीक ना सिर्फ व्यापार पर हावी होने जा रही है पर प्रशासन और पुलिस में भी । पूरा बाजार उद्योग तकनीक से संचालित हो रहा है। अत: शिक्षा संस्थानों, कौशल विकास संस्थानों को वैसे युवा तैयार करने पर गंभीरता से ध्यान देना होगा जो तेजी से बदलते उद्योग जगत की जरूरत को पूरा कर सकें तथा बेरोजगारी दूर हो सके।

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