Home लेख उजास : स्मृतियों से जुड़ीं भावनाएं

उजास : स्मृतियों से जुड़ीं भावनाएं

23
0

डॉ. ऋतु पाण्डेय शर्मा, प्रधान संपादक, बीईंग माइंडफुल, भोपाल

कई वैज्ञानिक शोधों से यह प्रमाणित हुआ है कि कोविड-19 से पीडि़त लोगों की स्वाद लेने की क्षमता और सूंघने की शक्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है, यहाँ तक की ठीक होने के बाद भी पूरी तरह वापस नहीं लौटी।

हमारी इंद्रियाँ लगातार काम करती रहती हैं। कभी हम चख कर चीजों का पता लगाते हैं तो कभी सूँघकर। हमारे आसपास किसी दुर्घटना या खतरे की आहट भी हम सूँघकर ताड़ लेते हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार घ्राण शक्ति (ऑलफेक्ट्री सेंस) के तार हमारे मस्तिष्क से जुड़े होते हैँ। इसलिए विशेष गंध हमें विशेष स्मृति को सामने ले आती है। इन स्मृतियों से जुड़ीं भावनाएं हमें सुख, दु:ख या उदासीनता का अनुभव देती हैं। किसी गंध के सूंघने पर मस्तिष्क में एक स्मृति ट्रिगर होती है, जो हमारी मन:स्थिति को शांत या विचलित कर सकती है।

वैज्ञानिक कहते हैं कि प्राकृतिक गंध में मन को नियंत्रित करने और तनावपूर्ण विचारों को दूर करने की असाधारण शक्ति होती है। सुगंध और दुर्गन्ध के अलग-अलग प्रभाव मन पर होते हैं। अलग-अलग गंधें हमारे वातावरण में चहुंओर सदा बहती रहती हैं, बस ज़रूरत अपने ध्यान को फोकस करने की, माइंडफुलल रहने की।

‘माइंडफुलनेस’ क्या है?

अपने वर्तमान क्षण के प्रति पूरी समग्रता यानि मन, शरीर और आत्म के साथ उपस्थित होना माइंडफुलनेस है। कर्म करते समय कर्तापन का भाव नहीं रहना, और समय का भी भान न रहना केवल साक्षी होना ही ध्यान या माइंडफुल होना है।

गंध शक्ति वापस लाने के लिए कुछ माइंडफुल उपाय

  • स्थान और समय का चुनाव- अपनी सुविधानुसार घर में कोई खुला, हवादार और प्रकाशयुक्त स्थान चुने।साथ ही सुबह का कोई उपयुक्त समय तय कर लें।
  • गंध पहचानना – आराम से कुर्सी पर या सुखासन में बैठकर तीन बार गहरी सांस लें। अब आसपास मौजूद गंध पर ध्यान फोकस करें।
  • नोट करें- गंध पहचानने के बाद एक अंतराल लेकर रूकें। अब इस गंध/गंधों को सूँघते समय आपके शरीर, मन, भावनाओं पर क्या प्रभाव हुआ, नोट करें।
  • गंध से जुड़ी स्मृतियों के याद आने पर उन्हें बिना जजमेंटल हुए या आलोचना किये केवल साक्षी होकर देखें।जैसे बीमारी की ताज़ा याद आने पर उसे भी गुजर जाने दें, याद रखें, अपने आप को उसमें बहने न दें।
  • अब गंध लेने की प्रक्रिया दोहराएं और अनुभव करें कि आपका मन और मस्तिष्क धीरे-धीरे शांति से भर रहा है।
  • उपरोक्त अभ्यासों को दिन भर की गतिविधियों में फैला दें। गहरी सांस लेने और गंध पर ध्यान फोकस करने से निष्क्रिय तंतु सक्रिय हो जायेंगे साथ ही आप अधिक प्रसन्न और स्थिरता महसूस करेंगे।
Previous articleप्रवाह : अंतरात्मा और अध्यात्म
Next articleयोग के साथ लगवाएं वैक्सीन: मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भाजपा प्रदेश कार्यालय में किया योग, जनता से वैक्सीन लगवाने की अपील

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here