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आज का भारत और अधिक सशक्त

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जब दुनिया के अनेक देश केवल अपने ही भले के बारे में सोच रहे थे, तब श्री मोदी ने देश और परदेश को एक ही नजरिए से देखा। उन्होंने देशवासियों को वैक्सीन मुहैया कराने में जितनी तत्परता दिखाई, उतना ही दूसरे देशों के भले का ध्यान भी रखा। उसी का परिणाम रहा कि विश्व के अधिकांश देशों ने मुक्त कंठ से भारत की प्रशंसा की और श्री मोदी को संजीवनी बूटी का पर्वत उपलब्ध कराने वाला हनुमान तक कह दिया। भारत के प्रति विश्व समुदाय की सद्भावनाएं उस वक्त भी देखने को मिलीं, जब हम कोरोना महामारी की दूसरी लहर से रूबरू हुए।

  • राघवेंद्र शर्मा


आज जब देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का 71वां जन्मदिन है, तब विचार ये उठता है कि उनके बारे में कहां से लिखना प्रारंभ किया जाए। काफी सोच विचार के बाद मन मष्तिस्क से ये आवाज आई कि श्री मोदी के बारे में ऐसा कोई सूत्र सुनिश्चित है ही नहीं, जिसके बारे में दावा किया जा सके कि उनके बारे में लिखे जाने का आगाज एक निश्चित घटनाक्रम से किया जा सकता है। दरअसल नरेंद्र मोदी एक ऐसे विरले व्यक्ति हैं, जिन्हें किसी एक परिधि में नहीं बांधा जा सकता। वे कहीं एक राजनेता हैं, तो उसी क्षण सबके मन की बात समझने वाले व्यापक परिवार के मुखिया दिखाई देते हैं। राष्ट्र द्रोहियों के लिए जहां वे काल के समान ही हैं, तो देशहित के लिए बड़ा से बड़ा राजनैतिक नुकसान झेलने के लिए तत्पर दिखाई देते हैं। लेकिन इस बात की भी अनदेखी नहीं कर पाते कि अपने हितों की कीमत पर विश्व के हितों से बेपरवाह नहीं हुआ जा सकता। यही वजह है कि अब नरेंद्र मोदी केवल भारत के ही नहीं, वरन वैश्विक नेता के रूप में स्थापित हो चले हैं।

उसका प्रमाण हैं वे अंतर्राष्ट्रीय सम्मान और पुरष्कार, जो नरेंद्र मोदी के नाम समर्पित होकर दुनिया भर में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। यूं तो भारत मां ने दुनिया को एक से बढकऱ एक महान सपूत दिए हैं। लेकिन जब बात भारत के स्वाभिमान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की आती है तो फिर वर्तमान नेताओं की भीड़ में दृष्टि नरेंद्र मोदी पर जाकर ही ठहर जाती है। क्यों कि वे आज एक ऐसे नेता के रूप में सम्मानित हैं, जो भारत के साथ दुनियां की भी चिंता करते हैं। ठीक उस तरह, जैसे स्वामी विवेकानंद के नाम से विख्यात एक और नरेंद्र ने शिकाागों में उपस्थित जन समुदाय को माताओ, बहिनो और भाइयो कहकर संबोधित किया था, तथा यह स्पष्ट कर दिया था कि हम इस पूरे विश्व को भौगोलिक सीमाओं में बांटकर देखना पसंद ही नहीं करते। ये पूरा जगत हमारा ही परिवार है और इसमें रहने वाले लोग एक व्यापक परिवार के सदस्य ही हैं।

जनसंघ के संस्थापक दीन दयाल उपाध्याय जी का जीवन दर्शन भी तो एकात्म मानववाद रहा है। वे भी यही मानते रहे कि दुनिया को राज नेताओं द्वारा अपने स्वार्थों के लिए खींची गईं विभाजक लकीरों से बांटना कतई उचित नहीं है। वे मानवमात्र को एक ही माना करते थे और इस सत्य को स्थापित कर चुके थे कि जब तक समूची दुनिया के मानव को एक नहीं मानोगे, उसे एक नजर से नहीं देखोगे, तब तक मानवमात्र का भला होने वाला नहीं है। गौर से देखें तो प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी स्वामी विवेकानंद और दीन दयाल उपाध्याय के विचारों को द्रुतगति से आगे बढ़ाते ही दिखाई देते हैं। इस बात का जीता जाागता प्रमाण हमने कोरोना काल में देखा।

दुनियों के अनेक देशों ने यह कहकर कंधे से कंधा मिलाकर हमारा साथ दिया कि जब इस देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी आफतकाल में हमारी सहायता करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ते तो इस मुसीबत की घड़ी में भारत को कैसे अकेला छोड़ा जा सकता है? इस तरह की घटनाएं बताती हैं कि हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री श्री मोदी की कार्य प्रणाली की वजह से भारत अब दुनिया भर के अनेक देशों में से केवल एक देश भर नहीं रह गया है, बल्कि अब हमारे मित्रों की संख्या बढ़ रही है। परंपरागत शत्रुओं की रातों की नींद हराम है तो मित्र देशों में हमारे प्रधान मंत्री को सम्मानित करने की होड़ सी मची हुई है। संतोष की बात तो ये है कि जिन मोदी को राजनैतिक विरोधियों द्वारा मुसलमानों का शत्रु बताया जाता रहता है, उनका सम्मान करने वालों में मुस्लिम देशों की संख्या ही सर्वाधिक बनी हुई है। विश्व की जानी मानी ताकतें भी अब ये चिंता करने लगी हैं कि भारत क्या सोचता है और उसे क्या अच्छा लगता है, अथवा वह किस बात का बुरा भी मान सकता है।

ऐसा पहली बार देखने में आ रहा है कि एक ओर अमेरिका हमारी मित्रता को हर हाल में बनाए रखना चाहता है तो दूसरी ओर रूस भी हमारा परंपरागत सखा बना हुआ है। यही नहीं, ये दोनों देश वर्तमान भारत और उसके नेतृत्वकर्ता में अपार संभावनाएं भी देख रहे हैं। वह भी तब, जबकि भारत और भारत के वर्तमान प्रधान मंत्री श्री मोदी अपनी सुरक्षा व संप्रभुता को लेकर पहले से कहीं ज्यादा कठोर और कृत संकल्पित बने हुए हैं। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति यही भाव देश के भीतर भी विद्यमान है। इसी भाव का ही तो परिणाम है कि वे ऐसे पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री बन गए हैं जो अभूतपूर्व जन समर्थन के साथ लगातार दूसरी बार देश की बागडोर मजबूती के साथ संभाले हुए हैं। यही वजह है कि भारत सुरक्षा के क्षेत्र में लगातार आत्मनिर्भर हो रहा है।

अनेकों देश जहां आर्थिक दृष्टि से अनिश्चितता के शिकार हैं, वहीं भारत की आर्थिक व्यवस्था लगातार मजबूती की ओर अग्रसर है तथा विदेशी निवेश भी बढ़ता जा रहा है। प्रधान मंत्री श्री मोदी की सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास की नीति ने देश की जनता में नए भरोसे को स्थापित किया है। इसी का नतीजा है कि जिन राज्यों में कल तक भाजपा की राजनैतिक जमीन तक नहीं थी, अब वहां पर भी उसकी और उसके मित्र दलों की सरकारें आकार लेती चली जा रही हैं। बेहिचक लिखा जा सकता है कि ये सब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की कार्य प्रणाली और उनकी दृढ़ राजनैतिक इच्छा शक्ति का ही नतीजा है।

दीगर राजनैतिक दलों के सरपरस्तों का जन्मदिन धूमधाम से मनाए जाने के ठीक उलट आज प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिन को सेवा दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। इस संदेश के साथ कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में सरकारें जन आस्थाओं के भरोसे पर ही स्थिरता को प्राप्त होती हैं। अत: सेवा पर भी पहलाा अधिकार जनता का ही है। इन्हीं भावनाओं के साथ हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को जन्म दिवस की अनंत शुभ कामनाएं और देशवासियों को बधाइयां।
(लेखक- मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार व राष्ट्रवादी विचारक हैं)

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