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भ्रामक है ‘हिन्दुत्व आतंक’ का जुमला

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कम्युनिस्ट विचारधारा का प्रतिनिधित्व करने वाली स्वरा भास्कर जैसी हिंदुत्व विरोधी शक्तियों के भ्रामक बयान भी चिंता उत्पन्न करते हैं। स्वरा ने ट्वीट करके लिखा है-‘हम हिंदुत्व आतंक के साथ ठीक नहीं हो सकते हैं और तालिबान आतंक से सभी हैरान और तबाह हो गए हैं।’

  • डॉ. कृष्णगोपाल मिश्र, विभाग अध्यक्ष, होशंगाबाद महाविद्यालय
    drkrishnagopalmishra@yahoo.com

कट्टरपंथी तालिबानी ताकतों की जीत पर भारतीय कट्टरपंथियों की प्रसन्नता जहां भारत में आने वाले भावी संकटों का संकेत देती है वहीं कम्युनिस्ट विचारधारा का प्रतिनिधित्व करने वाली स्वरा भास्कर जैसी हिंदुत्व विरोधी शक्तियों के भ्रामक बयान भी चिंता उत्पन्न करते हैं। स्वरा ने ट्वीट करके लिखा है-‘हम हिंदुत्व आतंक के साथ ठीक नहीं हो सकते हैं और तालिबान आतंक से सभी हैरान और तबाह हो गए हैं। स्वरा की नजर में हिंदुत्व और तालिबान समान हैं। जैसे तालिबानी आतंकवादी है वैसे ही हिंदुत्व की बात करने वाले भी आतंकवादी हैं। यह बयान स्वयं को चर्चा में लाने के लिए जानबूझ कर दिया गया है।

स्वरा को इस बात की कोई परवाह नहीं कि उनके ऐसे अनर्गल प्रलाप से न केवल करोड़ों हिन्दुओं की भावनाएं आहत हुई हैं अपितु देश के बहुसंख्यक वर्ग की छवि भी विश्वपटल पर धूमिल होती है। स्वरा को बताना चाहिए कि हिंदुओं ने तालिबानियों की तरह कब-कब लोकतंत्र की हत्या करके अपने देश की सत्ता पर कब्जा किया है और लोकतांत्रिक-संवैधानिक मानमूल्य ध्वस्त किए हैं? हिंदुओं के कौन से समूह ने देश के किस भाग से अन्य धर्मावलंबियों को पलायन करने पर विवश किया है? उनकी संपत्ति लूटी है अथवा उनकी स्त्रियों पर बलात्कार किए हैं? यदि नहीं तो इस प्रकार का गैर जिम्मेदाराना बयान देना कहां तक उचित है ?

यदि स्वरा और हिन्दुत्व को बदनाम करने वाले उन जैसे लोग गुजरात दंगों और विवादित ढांचे के ध्वंस के लिए हिन्दुत्व का आतंक मानते हैं तो उन्हें इन दोनों घटनाओं की अप्रिय और दुखद पृष्ठभूमि को भी देखना चाहिए। गुजरात दंगों में कट्टरपंथियों द्वारा गोधरा स्टेशन पर निर्दोष हिंदुओं को जिंदा जलाया जाना प्रमुख कारण रहा जबकि विवादित ढांचे का ध्वंस इन्हीं शक्तियों द्वारा विगत सैकड़ों वर्षों में बार-बार राममंदिर तोड़े जाने की प्रतिक्रिया का परिणाम था।
स्वतंत्र भारत की यह दोनों ही दुर्घटनाएं भारतीय कट्टरपंथियों की तालिबान जैसी सोच का ही दुखद परिणाम थीं। इन्हें हिंदुत्व का आतंक कहना और तालिबान से इनकी समानता दर्शाना भ्रम उत्पन्न करना है, यह समाज को बहकाना है।

पिछले सत्तर वर्षों में इस्लामिक आतंकवाद ने अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं का लगभग सफाया कर दिया है, अभी भी कर रहे हैं हिंदुओं के शासन में आतंक का स्थान नहीं, हिंदू सहिष्णु हैं, उदार हैं। इसीलिए हिंदुओं ने बहुसंख्यक होकर भी धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र की अवधारणा स्वीकार कर ली। यदि हिंदू कट्टर और आतंकवादी होते तो यह देश हिंदू-राष्ट्र होता। इसमें कश्मीरी पंडितों को पलायन नहीं करना पड़ता और गोधरा में उनसठ हिंदुओं को जिंदा जलाने जैसी भीषण दुर्घटनाएं नहीं होतीं। तब शायद हिंदू-विरोध की पर्याय बन चुकी कम्युनिस्ट विचारधारा का चिन्ह भी इस देश में ना होता।

क्रिया और उसकी प्रतिक्रिया दोनों भिन्न कार्य हैं। उन्हें समान समझना अथवा समान बताना भ्रम उत्पन्न करना है। यदि क्रिया न हो तो प्रतिक्रिया के लिए अवसर ही नहीं रह जाता। अत: क्रिया-प्रतिक्रिया के अंतर को समझते हुए तथ्यों और घटनाओं का विश्लेषण किया जाना चाहिए। सैकड़ों वर्षों तक मंदिरों का बार-बार तोड़ा जाना क्रिया है और विवादित ढांचे का ध्वंस उसकी प्रतिक्रिया है।

दोनों को एक समझना भूल होगी। क्रिया और प्रतिक्रिया की भांति हिंसा और प्रतिहिंसा भी भिन्न अर्थ व्यक्त करते हैं। गोधरा में हिंदुओं का जिंदा जलाया जाना क्रिया थी और उसके बाद हुए गुजरात दंगे उसकी प्रतिक्रिया थे। दोनों एक नहीं थे।

समाज के कर्णधार कहे जाने वाले बुद्धिजीवियों-विचारकों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे तथ्यपरक और सुचिंतित लेखन से समाज को सही दिशा देंगे किंतु दुर्भाग्य से हमारे देश में स्वयं को चर्चा में लाने के लिए जानबूझकर कुछ भी कहने-लिखने की कुरीति चल पड़ी है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर तथाकथित महान लोगों का कुछ भी कहना-लिखना और समाज तथा शासन का उसे चुपचाप सह जाना इस लोकविरोधी दूराचरण को और भी प्रोत्साहित कर रहा है। बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर का ताजा ट्वीट इस तथ्य का साक्षी है। स्वरा भास्कर के ट्वीट की पृष्ठभूमि में हिंदुत्व-विरोधी ताकतों की सक्रियता विद्यमान है।

वोटबैंक की राजनीति करने वाले कुछ बड़े नेताओं ने मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए इस्लामिक आतंकवाद के प्रतिपक्ष में ‘भगवा आतंकवाद ‘ का जुमला गढ़ा था। ओसामा-बिन-लादेन जैसे कुख्यात आतंकवादी सरगना को ओसामाजी कहकर संबोधित करने वाले और जाकिर नायक तथा हाफिज सईद जैसे कट्टरपंथियों को आदर देने वाले नेतृत्व ने इस्लामिक आतंक के बचाव में अपने प्रतिद्वंद्वी हिंदुत्ववादी दल को जनता के बीच बदनाम करने के लिए भगवा आतंकवाद का काल्पनिक और भ्रामक भूत खड़ा किया जिसे उनके समर्थकों ने हिंदुत्व आतंकवाद के नाम से प्रचारित किया है। इस्लाम के नाम पर जिहाद कहकर हिंसक आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त रहने वालों को क्लीन चिट देने के लिए जिन नेताओं ने कहा कि आतंकवाद का कोई रंग नहीं होता उन्होंने ही हिंदुत्व को बदनाम करने के लिए भगवा आतंकवाद कहकर उसे एक रंग दे दिया। कैसे दोहरे बयान हैं!

विश्व को व्यापक स्तर पर आतंकित करने वाला, अशांत बनाने वाला हरा आतंकवाद रंग रहित है और इस विशाल देश के किसी एक भाग में प्रतिक्रिया स्वरूप होने वाली छुटपुट अप्रिय घटनाएं तक भगवा आतंकवाद हैं! जिहादियों के बर्बरतापूर्ण कार्यों से सभी मुसलमानों को आतंकी नहीं कहा जा सकता लेकिन मालेगाँव जैसी दुर्घटनाओं को आधार बनाकर, उसे हिंदुत्व आतंकवाद कहकर सारे हिंदू समाज को कटघरे में खड़ा करने की खुली छूट है। वास्तव में किसी भी निर्दोष की हत्या किसी भी दृष्टि से सही नहीं कही जा सकती।

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