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चिंताजनक है केरल का तालिबान कनेक्शन

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रमेश शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार
rsharmamdn@yahoo.co.in


तालिबान के समर्थन को लेकर यूं तो देश भर के विभिन्न प्रांतों से समाचार आये हैं, कहीं-कहीं कुछ गिरफ्तारियों की भी खबर आई। पर केरल से आने वाली तीन खबरें बहुत गंभीर हैं। ये तीनों खबरें केवल चौंकाने वाली भर नहीं हैं बल्कि पूरे देश को सतर्क करने वाली हैं, अर्ध निद्रा से जगाने वालीं हैं कि स्वतंत्र भारत में किस तरह तालिबान मानसिकता गहरी हो रही है। आश्चर्य इन तीनों समाचारों पर देश में जो प्रतिक्रिया आनी चाहिए थी वह देखने सुनने को नहीं मिली।

पहला समाचार इंडियन मुस्लिम लीग के विधायक एम के मुनीर को धमकी देने का है। विधायक ने अपने फेसबुक एकाउन्ट पर तालिबान का समर्थन नहीं किया था। इस पर विधायक को धमकी दी गयी और सोशल मीडिया से अपनी टिप्पणी हटाने के लिए कहा गया। दूसरी खबर आई कि केरल के 17 नौजवान इन दिनों अफगानिस्तान में तालिबान के लिये काम कर रहे हैं। यह खबरें भी आईं कि 26 अगस्त को काबुल विमानतल के पास जो विस्फोट हुआ था उसके पीछे केरल के इन लोगों का भी हाथ रहा है, और यह समाचार भी आया कि विस्फोट के प्रतिशोध के लिये अमेरिका ने जो ड्रोन हमला किया उस हमले में मरने वाला एक आतंकवादी केरल का रहने वाला है। तीसरा समाचार इससे भी अधिक गंभीर है। यह समाचार अमीषा का है जो केरल में मेडिकल की छात्रा रही है।

पहले लव जिहाद की शिकार हुई और उसका धर्मान्तरण कराया गया और अब उसे अफगानिस्तान ले जाया गया है। जहां वह अब तालिबान के लिये काम कर रही है। इस लड़की की मां विन्दु संपत ने भारत सरकार से अपनी बेटी का पता लगाने की याचना की है । हालांकि इस लड़की का मामला पिछले लगभग चार वर्षों से विभिन्न अदालतों में आया है। उसके पिता अपनी बेटी को वापस पाने के लिये लगातार संघर्ष कर रहे हैं। इसमें नया यह है कि इस लड़की को अब फिदायीन बनाकर अफगानिस्तान ले जाया गया है ।

हालांकि इन समाचारों के प्रति सरकार की चुप्पी रही है। न तो इनका समर्थन किया गया और न खंड। लेकिन मीडिया में यहां वहां लगातार आ रहा है। पर इन तीनों समाचारों में इतनी गंभीरता के बाद भारतीय मीडिया, राजनीति और स्थानीय प्रशासन में गंभीरता आनी चाहिए थी उसका अभाव रहा। कुछ संचार माध्यमों में तो ये समाचार थे ही नहीं।

इसका कारण संभवत: केरल में तीन- तीन वैचारिक शक्तियों की एक युति जैसी बन गयी है। ये तीन शक्तियां हैं वामपंथी विचार, मिशनरी मानसिकता और तालिबानी मानसिकता। केरल में वामपंथी सरकार है। उसे इन बाकी दोनों विचारकों का समर्थन है । संभवत: इसलिये सरकार का इन समाचारों के प्रति नरम रुख रहा और इनसे प्रभावित मीडिया का भी। सामान्यत: वामपंथीधार्मिक कट्टरवाद से अलग होने का दावा करते हैं लेकिन यह केवल सनातनियों के मामले में ही है।

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