Home लेख भारत व रूस के बीच संबंधों का बारीक संतुलन: रूसी विदेश मंत्री...

भारत व रूस के बीच संबंधों का बारीक संतुलन: रूसी विदेश मंत्री की यात्रा का क्या हासिल

61
0

भूमि श्रीवास्तव

भारतीय उपमहाद्वीप में सदियों से स्थापित भू राजनीतिक स्थितियों में बदलाव के संकतों और कसमसाहट के बीच रूस के विदेश मंत्री सर्गे लवरोव की सोलह घंटे की भारत यात्रा और उसके बाद पाकिस्तान जाने के निहितार्थों को समझने की जरूरत है। रूसी विदेश मंत्री की मंगलवार को भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ पत्रकार वार्ता के साथ मंगलवार को यात्रा समाप्त हुई। पहले अमेरिका के राजनयिकों व नेताओं का भारत के साथ पाकिस्तान जाना तय होता था, अब रूस का क्षेत्र में पाकिस्तान की तरफ रुझान है। लवरोव की यह यात्रा 2012 के बाद किसी रूसी विदेश मंत्री की पहली पाकिस्तान यात्रा है। यद्यपि भारतीय विदेश मंत्री ने इस यात्रा को उत्साहवर्धक, ठोस और कामयाब बताया जिसमें अफगानिस्तान शांति वार्ता, रक्षा सौदों में द्विपक्षीय समझौते, नाभिकीय और अंतरिक्ष के क्षेत्र में दूरगामी सहयोग तथा आर्थिक सहयोग के साथ राष्ट्रपति पुतिन की इस साल होने वाली भारत यात्रा पर चर्चा हुई।

राजनय में शब्दों की बड़ी अहमियत होती है। यद्यपि दोनों मंत्रियों ने द्विपक्षीय संबंधों को समय की कसौटी पर खरा बताया लेकिन भारत के भारत-प्रशांत की जगह रूस द्वारा एशिया-प्रशांत शब्द का प्रयोग किया जाना गौरतलब है। रूस के रुख में यह बदलाव रूस व अमेरिका के बीच उत्पन्न तनाव की परिणति है। अमेरिका के राष्ट्रपति बाइडेन ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन को हत्यारा बताया था और वह रूस के चीन की तरफ झुकने को भी ऐतराज की नजर से देख रहा है। लेवरोव कह चुके हैं कि रूस और चीन के रिश्ते इतिहास में सबसे अच्छे मुकाम पर हैं लेकिन साथ ही वह किसी भी सैन्य गठजोड़ से इंकार करते हैं। भारत द्वारा प्रेरित क्वाड गठजोड़ जिसे वह पहले विभाजक मान चुके हैं, को लेकर उन्होंने कहा कि भारत व रूस दोनों ही मानते हैं कि कोई सैन्य गठजोड़ आपसी हितों को नुकसानदेह होगा।

बदलते हुए वैश्विक आर्डर में संतुलन की साधने की भारतीय नीति के मद्देनजर विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि क्वाड बहुपक्षीय विश्व के बहुपक्षीय चरित्र का प्रकटीकरण करता है। यह भारत के आशियान देशों के साथ प्रतिबद्धता और एक्ट ईस्ट नीति के लिहाज से है और रूस इस नीति से आगे जाकर भारत का महत्वपूर्ण साझीदार है। अफगानिस्तान समस्या के समाधान के संदर्भ में रूस ने हालांकि तालिबान को अफगान समाज का हिस्सा बताते हुए समस्या के समाधान का अहम हिस्सा बताया पर भारत सार्वभौम, स्वतंत्र, लोकतांत्रिक व संयुक्त अफगानिस्तान बनाने के अपने रुख पर कायम रहा। लेवरोव ने इस्लामाबाद में कहा रूस व पाकिस्तान का रुख इस मामले में खुला है। रूस की हमारे दुश्मन व चीन के दोस्त पाकिस्तान के साथ निकटता भारत-रूस मैत्री संबंधों को प्रभावित कर सकती है लेकिन रूस के सैन्य उपकरणों पर ज्यादा निर्भरता भारत को सुरक्षा संबंधी खतरा भी पैदा कर सकती है।

भारत की अमेरिका के साथ बढ़ती रणनीतिक साझेदारी, खासतौर पर भारत-प्रशांत क्षेत्र में कम्युनिस्ट चीन की महत्वाकांक्षाओं पर लगाम लगाने की मंशा से इस क्षेत्र में अपनी राजनयिक उपस्थिति बढ़ाने और बहुपक्षीय साझेदारियां करने के साथ-साथ रूस से द्विपक्षीय संबंध मजूबत करने की अनदेखी नहीं की जा सकती। भारत व रूस के बीच वर्ष 2018 में एस-400 मिसाइल खरीदने के समझौता भारत की शीतयुद्ध के समय के दो प्रतिद्वंद्वियों के बीच रिश्तों में विश्वास कायम रखने की इच्छा को व्यक्त करता है, बावजूद अमेरिका की पाबंदियों की धमकियों के। वैश्विक स्तर पर कई भूराजनीतिक उतार-चढ़ाव के बाद भी दोनों देशों के बीच मेक इन इंडिया के तहत रूस के सुदूर पूर्व देशों, व्लाडीवोस्टोक-चैन्नई समुद्री मार्ग विकास जैसे निवेश में भारत की बढ़ती रुचि नए रक्षा निर्माण सहयोग को रेखांकित करती है। यद्यपि रूसी मंत्री की यात्रा ने द्वपक्षीय संबंधों में कुछ विचलन प्रदर्शरि़त किया लेकिन फिर भी यह हमारे मजबूत संबंधों व सहयोग की निशानी है जो पुतिन की यात्रा से जारी रहेंगे।

Previous articleहमारे देश के प्रबुद्ध वर्ग का मौन समझ से परे है : क्या हम राष्ट्रधर्म का निर्वाह कर रहे हैं ?
Next articleकोरोना का कहर: बीते 24 घंटों में रिकॉर्ड 4324 केस, 27 की मौत

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here