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कोरोना काल में हर तबके का सुरक्षा चक्र बने शिवराज सरकार के निर्णय

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  • अनूप पौराणिक

मध्यप्रदेश में अब कोरोना के सक्रिय मामलों की संख्या लगातार घट रही है। इसके पीछे बड़ा कारण है मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार के त्वरित और जनकल्याणकारी निर्णय। जब से कोरोना की दूसरी लहर शुरू हुई उसके बाद से सरकार के सही निर्णयों का ही परिणाम है कि आज स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और राज्य में अनलॉक प्रक्रिया शुरू हो पाई है। इस कोरोना काल के दौरान सरकार ने अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं भी शुरू की हैं, जो अन्य राज्यों के लिए मिसाल साबित हुई हैं। शिवराज सरकार के लिए निर्णयों से कोरोना के कारण रुकी हुई विकास की रफ़्तार एक बार फिर तेज़ी पकड़ती दिखाई दे रही है।

मध्यप्रदेश में किल कोरोना अभियान के तहत सरकार ने गांवों में आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य विभाग के लोगों की मदद से घर-घर जाकर सर्वे कराया, टेस्टिंग और प्रभावित लोगों को मेडिकल किट भी उपलब्ध कराई। साथ ही, लोगों को बीमारी के प्रति जागरुक किया गया और लोगों से मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग बरतने की अपील की गई। सरकार की इस कोशिश का असर भी दिखा और एक वक्त गांवों में बेकाबू होता दिखाई दे रहा कोरोना अब ग्रामीण इलाकों में भी नियंत्रण में दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के इस अभियान की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रशंसा करते हुए इसे अन्य राज्यों के लिए मिसाल बताया।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहचान बच्चों के मामा और एक संवेदनशील नेता के रूप में होती है। कोरोना के चलते सैकड़ों बच्चे अपने माता-पिता एवं अभिभावकों को खो चुके हैं। इनमें से कुछ परिवारों में कमाने वाले नहीं रहे हैं। ऐसे में राज्य सरकार ने इन बच्चों के लालन-पालन की जिम्मेदारी ली है। मुख्यमंत्री कोविड बाल सेवा योजना के तहत मध्य प्रदेश में पहली मार्च 2021 से 30 जून 2021 के बीच अपने माता-पिता या अभिभावकों को खोने वाले अनाथ बच्चों को राज्य सरकार ने 5 हजार रुपये आर्थिक सहयोग और नि:शुल्क राशन देने का निर्णय लिया।

यही नहीं मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि इन बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी उनका मामा मुख्यमंत्री उठाएगा।शिवराज सिंह चौहान की संवेदनशीलता से निकली इस योजना से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रभावित होकर पीएम-केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना शुरू की है। वही हरियाणा, उत्तरप्रदेश और बिहार ने भी इस योजना का अनुसरण करते हुए इसे अपने यहां लागू किया है।

मध्य प्रदेश सरकार ने कोरोना से मरे व्यक्ति के परिवार को 1 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का निर्णय लेकर पीडि़त परिवार को सम्बल दिया। जिन महिलाओं के पति नहीं रहे हैं और वे रोजगार शुरू करना चाह रहीं हैं तो उनको सरकार की गारंटी पर बिना ब्याज का ऋण काम-धंधे के लिए उपलब्ध करवाने का जिम्मा उठाया है।

इसके अलावा राज्य सरकार ने शासकीय कर्मियों सहित संविदा, दैनिक वेतनभोगी और आउटसोर्स कर्मचारियों की कोरोना से मौत पर उनके परिजनों कि अनुकंपा नियुक्ति के लिए योजना शुरू की है तो वहीं उनके परिजनों को 5 लाख रुपये की अनुग्रह राशि के लिए भी मुख्यमंत्री कोविड -19 विशेष अनुग्रह योजना शुरू की जा चुकी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कोविड 19 की लड़ाई लडऩे वाले ड्यूटी पर तैनात फ्रंटलाइन वर्कर की मुत्यु हो जाने पर परिवार को 50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता का प्रावधान करके संवेदनशीलता का परिचय दिया है जिसके लिए वे जाने जाते है।

कोरोना काल में छोटे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के प्रवासी मजदूरों, सड़क विक्रेताओं, रेहड़ी, फेरीवाले, रिक्शा चालक, मजदूरों आदि का जीवन बदहाल हुआ है। इसलिए उनको लाभ पहुंचाने के लिए उन्हें वित्तीय सहायता कर जीवन फिर पटरी पर लाने का काम शिवराज सरकार ने किया।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार है)

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