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श्रीअन्न के वैश्विक आंदोलन का शंखनाद

  • नरेंद्र सिंह तोमर
    भारत इस समय जी-20 देशों की अध्यक्षता कर रहा है। इस वैश्विक नेतृत्व के दायित्व को निभाते हुए यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने थीम दी है- एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य, यानी वसुधैव कुटुम्बकम्। इस समय संपूर्ण विश्व की खाद्य प्रणाली में प्रासंगिक, सामयिक व आवश्यक सुधार भी भारत की अगुवाई में तेजी से हो रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी की ही पहल का परिणाम है कि वर्ष 2023 को संयुक्त राष्ट्र संघ की घोषणानुसार, भारत के नेतृत्व में दुनिया “अंतराष्ट्रीय मिलेट्स (श्री अन्न) वर्ष” के रूप मना रही है। संपूर्ण विश्व की खाद्य सुरक्षा व सेहत को ध्यान रखते हुए यह जरूरी हो गया है कि श्री अन्न के लिए वैश्विक आंदोलन खड़ा किया जाए। हम पूरे आत्मविश्वास और गर्व के साथ कह सकते है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व व मार्गदर्शन में गत 18 एवं 19, 2023 मार्च को नई दिल्ली में आयोजित ‘ग्लोबल मिलेट्स (श्री अन्न) कांफ्रेंस‘ में श्री अन्न को दुनियाभर के लोगों के आहार का प्रमुख हिस्सा बनाने के लिए एक वैश्विक आंदोलन का शंखनाद हुआ है। इस कांफ्रेंस में गयाना, ज़ाम्बिया, मॉरीशस, श्रीलंका, सूडान, सूरीनाम व गाम्बिया जैसे उन देशों के मंत्रियों की भागीदारी रही, जहां की जलवायु श्री अन्न के लिए अनुकूल है। मिलेट्स की मोटे अनाज के रूप में पहचान रही हैं। मोदीजी ने इन्हें श्री अन्न की उपमा देकर नया अर्थ-आयाम प्रदान किया हैं। कांफ्रेंस के उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्रीजी ने कहा-‘श्रीअन्न खेती या खाने तक सीमित नहीं हैं, जो लोग भारत की परंपराओं से परिचित हैं, वे ये भी जानते हैं कि हमारे यहां किसी के आगे ‘श्री’ ऐसे ही नहीं जुड़ता है, जहां श्री होती है, वहां समृद्धि होती है, समग्रता भी होती है। श्री अन्न भारत में समग्र विकास का माध्यम बन रहा है। इसमें गांव जुड़ा, गरीब भी जुड़ा है।
    श्री अन्न यानी छोटे किसानों की समृद्धि का द्वार, करोड़ों लोगों के पोषण का कर्णधार, आदिवासी समाज का सत्कार, कम पानी में ज्यादा फसल की पैदावार, रसायनमुक्त खेती का बड़ा आधार और जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में मददगार।’ गेहूं-चावल के उत्पादन की प्रतिस्पर्धा ने मृदा की उर्वरता संबंधी विसंगतियां तो पैदा की ही, इनके अधिक सेवन से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना पूरी दुनिया को करना पड़ रहा है। अमेरिकी ह्रदय विशेषज्ञ डा. विलिमय डेविस की किताब ‘व्हीट बैली‘ और ऐसे ही कई शोधपरक प्रकाशन गेहूं−चावल के अत्यधिक सेवन से उपजी समस्याओं को लेकर आगाह करते रहे हैं। कृषि अर्थव्यवस्था में भी यह खेती छोटे किसानों के लिए प्रतिकूल है। ऐसे में पोषक अनाज यानि “श्री अन्न” को दुनिया की हर थाली का मुख्य आहार बनाने का बीड़ा भारत जैसा देश ही उठा सकता है। मोदीजी के रूप में हमारा सामर्थ्यवान नेतृत्व, जिनका वैश्विक स्तर पर प्रभाव व वर्चस्व है, श्री अन्न की व्यापकता के लिए विगत कुछ वर्षों में हमारे द्वारा उठाए कदम दुनिया के लिए अनुगामी पदचिन्ह बनते जा रहे हैं। श्री अन्न को ग्लोबल मूवमेंट बनाने की दिशा में हमने लगातार काम किया है। 2018 में भारत ने श्री अन्न को पोषक-अनाज के तौर पर घोषित किया था। हमारे प्रयास एक तरफ किसानों को श्री अन्न की खेती बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़े, तो दूसरी तरफ इसके ज्यादा से ज्यादा उपभोग पर ध्यान केंद्रित किया गया। यही कारण है कि कुछ वर्ष पहले तक जहां श्री अन्न की घरेलू खपत प्रति व्यक्ति-प्रति माह 2-3 किलो थी, वह बढ़कर अब 14 किलो प्रति व्यक्ति-प्रति माह हो गई है। श्री अन्न खाद्य उत्पादों की बिक्री 30 फीसदी बढ़ी है।
    इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय नेताओं ने अपने वीडियो संदेश दिए। इथियोपिया की राष्ट्रपति श्रीमती सहले-वर्क जेवडे ने कहा कि इस समय लोगों को खिलाने के लिए मिलेट एक सस्ता और पौष्टिक विकल्प है। उप-सहारा अफ्रीका में इथियोपिया एक महत्वपूर्ण मिलेट उत्पादक देश है। उन्होंने मिलेट के प्रसार के लिए नीतिगत तौर पर आवश्यकतानुसार जोर देते हुए उनके इकोसिस्टम के अनुसार फसलों की उपयुक्तता के अध्ययन की उपयोगिता पर जोर दिया।
    गयाना के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद इरफान अली ने कहा कि भारत के नेतृत्व में मिलेट को बढ़ावा दिया जा रहा है और ऐसा करने में यह शेष दुनिया के उपयोग के लिए अपनी विशेषज्ञता भी दे रहा है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष की सफलता सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में काफी मददगार साबित होगी। उन्होंने बताया कि गुयाना ने खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मिलेट्स को एक महत्वपूर्ण कारक के रूप में मान्यता दी है। गुयाना विशिष्ट मिलेट्स उत्पादन के लिए 200 एकड़ भूमि निर्धारित करके मिलेट्स के बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए भारत के साथ सहयोग शुरू कर रहा है, जहां भारत प्रौद्योगिकी के साथ तकनीकी मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करेगा। उद्घाटन सत्र के बाद एपीडा द्वारा आयोजित एक प्रदर्शनी के साथ-साथ आईसीएआर, एफएसएसएआई और विभिन्न उद्योग संघों द्वारा समानांतर सत्रों का आयोजन किया गया।
    आईसीएआर ने मिलेट मूल्य श्रृंखला के ऊपर 6 अलग-अलग सत्र आयोजित किए । इन सत्रों मे मिलेट मूल्य श्रृंखला मे प्रमुख चुनौतियों, मुद्दों और अवसरों पर विचार-विमर्श और पारिस्थितिकी तंत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के लिए विभिन्न अंतराष्ट्रीय और राष्ट्रीय वैज्ञानिकों, उद्योगियों, स्टार्ट-अप, किसानों, भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय छात्रों, केन्द्र एवं राज्यों के अधिकारी गण, एपीडा, एफएसएसएआई आदि शामिल हुए। इन सत्रों में लगभग 400-500 राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभागियों ने भाग लिया ।
    मिलेट्स (श्री अन्न) के स्वास्थ्य और पोषण संबंधी पहलुओं पर गहन चर्चा के लिए, एफएसएसएआई, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 6 सत्रों का आयोजन किया गया। इन सत्रों में उद्योग, प्रमुख खिलाड़ियों, वकीलों, उद्योग संघ, खाद्य प्राधिकरण के सदस्य, किसान प्रतिनिधि, और एफएसएसएआई अधिसूचित प्रयोगशालाओं के अधिकारी, स्वास्थ्य, पोषण एवं आहार विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, प्रमुख डॉक्टरों, गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों, शेफस , शिक्षाविदों और अनुसंधान कर्मियों, विदेशी राजदूतों ने भाग लिया । इन सत्रों में लगभग 275-300 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
    सम्मेलन के दूसरे दिन विभिन्न देशों के कृषि मंत्रियों के साथ भारत के प्रतिनिधि के रूप में मेरे द्वारा द्विपक्षीय बैठक में सहभागिता की गई। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। द्विपक्षीय बैठकों में गयाना के कृषि मंत्री श्री जुल्फिकार मुस्तफा के साथ बैठक ने भारत व गयाना के बीच कृषि और कृषि-प्रसंस्करण उद्योग के साथ ही श्री अन्न की खेती को विस्तार देने की दिशा में काम किया है। इसके साथ ही सूरीनाम के कृषि मंत्री श्री परमानंद प्रह्लाद स्यूडिएन के साथ हुई बैठक में मेरे साथ ही कृषि राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी व कृषि अधिकारी भी उपस्थित रहे। सूरीनाम के साथ कृषि पर संयुक्त कार्य समूह की दूसरी बैठक के दौरान हुई चर्चा अनुसार 5 वर्षों (2023-27) के लिए संयुक्त कार्ययोजना का मसौदा जल्द तैयार होने की उम्मीद है। इस दौरान जाम्बिया के कृषि मंत्री श्री रूबेन फिरी मटोलो, मॉरीशस के कृषि-उद्योग और खाद्य सुरक्षा मंत्री श्री मनीष गोबिन व श्रीलंका के कृषि मंत्री श्री महिंदा अमरवीरा के साथ हुई बैठकें परिणामजनक रही। इनसे श्री अन्न की व्यापकता के लिए साझा रणनीति बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी जी ने ग्लोबल मिलेट्स कांफ्रेंस में यह भी कहा कि ‘जब हम किसी संकल्प को आगे बढ़ाते हैं, तो उसे सिद्धि तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी उतनी ही अहम होती है।‘ श्री अन्न को दुनिया के हर व्यक्ति की थाली का आहार बनाने का संकल्प भारत ने स्वतंत्रता के अमृतकाल में लिया है। प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में हम इस सिद्धि के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। दुनिया के कई देश इस आंदोलन में हमारे सहयात्री बन चुके हैं। किसानों के कल्याण, मानव स्वास्थ्य जैसे शुचितापूर्ण उद्देश्यों के लिए शुरू श्री अन्न का आंदोलन वैश्विक बन चुका है, आने वाले वर्षों में इसके सुखद परिणाम हमारे लिए गर्वानुभूति के साथ आत्मसंतोष का कारण बनेंगे।

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