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हौसले से जीती जा सकती है कोरोना से जंग : सही तंत्र, मंत्र, यंत्र उपयोगी

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आज समाज में सुरक्षा एवं हौसले की महती आवश्ययकता है। यही सुरक्षा की भावना एवं संबल यदि कोरोना पीडि़त में चिकित्सो टीम, परिजन के द्वारा या प्रशासन के माध्यम से पैदा हो कि वह सुरक्षित हाथों में है, तो अनेक जिंदगियां कोरोना जंग जीत सकती हैं। अनेक व्यक्ति शारीरिक बीमारी से ज्यादा कोरोना से भय एवं असुरक्षा के कारण जीवन की जंग ऐसे संकट काल में हार जाते हैं।


ए.पी. सिंह


वर्तमान वैश्विक महामारी के संक्रमण काल में मानव को प्राण वायु एवं सांसों के संकट का सामना करना पड़ रहा है, साथ ही कोरोना महामारी के इस दौर में मनुष्य को मनुष्य से दूरी बनाकर चलने को मजबूर होना पड़ रहा है। इस स्थिति के कारण समाज में असुरक्षा का भाव भी पैदा हो रहा है जिसके कारण स्वस्थ व्यक्तियों मेंअवसाद व अन्य बीमारियों से ग्रसित होने की स्थिति निर्मित हो रही ह।ै इस तरह की घटनायें नित्य प्रतिदिन परिलक्षित हो रहीं हैं।


आज समाज में सुरक्षा एवं हौसले की महती आवश्ययकता है। यही सुरक्षा की भावना एवं संबल यदि कोरोना पीडि़त में चिकित्सा टीम, परिजन के द्वारा या प्रशासन के माध्यम से पैदा हो कि वह सुरक्षित हाथों में है, तो अनेक जिंदगियां कोरोना जंग जीत सकती हैं। अनेक व्यक्ति शारीरिक बीमारी से ज्यादा कोरोना से भय एवं असुरक्षा के कारण जीवन की जंग ऐसे संकट काल में हार जाते हैं।

ऐसी परिस्थिति में पीडि़त मानवता को परस्पर सुरक्षा भाव से हौसला बढ़ाकर बचाया जा सकता है। कितना भी कठिन या विपरीत समय हो लेकिन वह गुजर जाता है, परंतु हमें ऐसी विपरीत परिस्थितियों में धैर्य एवं सशक्त मानसिकता बनाये रखने के साथ ऐसे समय परस्पर्र एक-दूसरे का हाथ थामें रखकर हौसला एवं आंतरिक विश्वास को मजबूत रखने की आवश्यकता है। यह हौसला आता है मन की शक्ति से। हमारे मन की शक्ति अद्भुत है। मन में धैर्य है तो आप बड़ी से बड़ी परिस्थिति का सामना सफलतपूर्वक कर सकते हैं, इसलिए कहा गया है कि मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।


इसी तारतम्य में महाभारत का प्रसंग अनुकरणीय प्रतीत होता है। अर्जुन श्रेष्ठ धनुर्धर थे। उनके पास तंत्र व यंत्र दोनों थे, परंतु युद्ध क्षेत्र में वह गांडीव छोड़कर घुटनों के बल झुक गए और युद्ध लडऩे से मना कर दिया, क्यों? क्योंकि हौसला अर्थात् मन कमजोर था, डिप्रेशन जैसी स्थिति थी। तब कृष्ण ने गीता के माध्यम से अर्जुन को मानसिक रूप से मजबूत बनाया, हौसला दिया और तत्पश्चात महायुद्ध लड़ा और वह जीत गये। लेकिन वास्तव में यह युद्ध जीता कौन?
पांडवों के पास संसार के श्रेष्ठ अस्त्र-शस्त्र थे। साथ ही सर्वश्रेष्ठ धनुष और धनुर्धर अर्जुन थे, लेकिन यदि कृष्ण न होते तो उत्तम कौशल एवं श्रेष्ठ अस्त्र- शस्त्रों के होते हुए भी अर्जुन मानसिक रूप से युद्ध लडऩे को तैयार नहीं थे।


अत: कोई भी जंग/युद्ध शारीरिक कौशल, तकनीक के साथ मन की शक्ति या हौसले के बिना नहीं लड़ा जा सकता है, परंतु हौसले से तंत्र, मंत्र, एवं यंत्र के दम पर युद्ध लड़ा और जीता जा सकता है।

आज कोरोना संक्रमण से युद्ध में हमारी शारीरिक इम्युनिटी तंत्र है, हमारी मानसिक शक्ति मंत्र है तथा मास्क, वैक्सीन, यंत्र हंै। अतएव अपनी शरीर की इम्युनिटी बढ़ाकर, ईश्वर पर आस्था और सिस्टम पर विश्वास बनाए रखकर, जरूरतमंदों को तन, मन, धन से मदद पहुंचाकर तथा वैक्सीनेशन कराकर हम अवश्य ही तंत्र, मंत्र, यंत्र से कोरोना से जंग जीत सकते हैं, विजय हमारी ही होगी।
(लेखक मध्यप्रदेश विधानसभा के सचिव हैं।)

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