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ब्रिटेन में आई रिपोर्ट में हिंदूफोबिया की भयावह स्थिति का खुलासा

  • अवधेश कुमार
    दुनिया के अलग-अलग स्थानों से हिंदूफोबिया यानी हिंदू विरोधी नफरत एवं हिंसा की बढ़ती घटनाएं गंभीर चिंता का विषय है। हम कई देशों में हिंदुओं, हिंदू प्रतीकों, हिंदू धर्मस्थलों आदि पर हमले के साथ-साथ हिंदू धर्म के विरुद्ध प्रचार अभियानों को देख रहे हैं। ब्रिटेन की द हेनरी जैक्सन सोसाइटी द्वारा जारी अध्ययन रिपोर्ट ने इस बात को फिर से साबित किया है कि हिंदू समाज के लिए यह कठिन चुनौती का समय है। रिपोर्ट का शीर्षक है, एंटी हिंदू हेट इन स्कूल्स। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि ब्रिटेन के स्कूलों में हिंदू विरोधी घृणा चरम पर है और हिंदू बच्चों को अनेक देवी – देवताओं के पूजन, गाय को पवित्र मानने, जाति व्यवस्था आदि के आधार पर चिढ़ाया जाता है, अपमानित किया जाता है और उन्हें मुस्लिम बच्चे काफिर पुकारते हैं। इसमें 998 हिंदू अभिभावकों से बातचीत की गई है। 51% अभिभावकों ने कहा कि उनके बच्चों ने हिंदू विरोधी घृणा का सामना किया है। केवल 19% अभिभावकों ने कहा कि शिक्षण संस्थान इसकी पहचान कर ठीक करेगा।
    रिपोर्ट के कुछ अंश देखिए : निरामिष होने का मजाक उड़ाते हुए एक बच्ची पर गाय का मांस फेंका गया और कहा गया कि तू इस्लाम ग्रहण कर लो तो हम परेशान करना बंद कर देंगे। एक छात्र को कहा गया कि हिंदू धर्म की पढ़ाई करना मूर्खता है क्योंकि यह 33 करोड़ देवताओं के साथ हाथी, बंदर और मूर्ति की पूजा करते हैं। एक ईसाई ने हिंदू बच्चे को कहा कि हमारा यीशु तुम्हारे सारे देवताओं को नर्क में भेजेगा । हिंदू धर्म में स्वास्तिक जैसे प्रतीक को हिटलर के प्रतीक से तुलना कर उसी तरह हिंदू बच्चों को निशाना बनाने की घटनाएं हुई जैसे एक समय यहूदियों के साथ होता था। रिपोर्ट में हिंदू बच्चों द्वारा इस्लाम या ईसाइयत के विरुद्ध टिप्पणी करने की बात नहीं है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि मुस्लिम या ईसाई छात्र और शिक्षक आदि प्रतिक्रिया में ऐसा कर रहे हैं। वास्तव में यूरोप अमेरिका सहित अनेक देशों में चल रहे हिंदूफोबिया यानी हिंदुओं के विरुद्ध अभियान और हिंसा का छोटा अंश इस रिपोर्ट में आया है। धर्मों व नस्लों के विरुद्ध घृणा पर शोध करने वाली अमेरिकी संस्था नेटवर्क कंटैजियन रिसर्च इंस्टीट्यूट ने अध्ययन में बताया है कि पिछले कुछ समय में हिंदू विरोधी टिप्पणियों में 1000 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। व्हाइट सुपरमेसिस्ट (नस्लभेदी श्वेत समुदाय) और मुसलमानों को हिंदू विरोधी दुष्प्रचार और हिंसा में सबसे आगे बताया गया है। अध्ययन के अनुसार हिंदुओं और भारतीयों के विरुद्ध घृणा फैलाने में पाकिस्तान की भूमिका भी बहुत बड़ी है। पाकिस्तान से हर दिन हिंदुओं के विरुद्ध हजारों नफरत फैलाने वाले ट्वीट किए जाते हैं। अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं का एक समूह इसे अभियान के रूप में चलाता दिखा है तो ब्रिटेन की लेबर पार्टी के नेताओं में भी ऐसे लोगों की संख्या है जो अपनी तथाकथित वामपंथी प्रोग्रेसिव सोच तथा कट्टरपंथी मुस्लिमों के प्रभाव में हिंदू धर्म, और रीति-रिवाजों का उपहास उड़ाने को कर्तव्य मानते हैं।
    हिंदू संगठनों द्वारा व्यापक पैमाने पर दुनिया भर में काम करना है। इनके कारण हिंदू जहां भी है अनेक सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक, बौद्धिक रचनात्मक गतिविधियां चला रहे हैं। इनका प्रभाव भी बढा है । दुनिया भर में भारतवंशियों की संख्या करीब 3.5 करोड़ है जिनमें हिंदू सबसे ज्यादा हैं। ये अनेक देशों में शीर्ष पदों पर ही नहीं कारोबार, विज्ञान,संस्कृति, अकादमी मीडिया आदि में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद छोटे देशों में भी भारतवंशियों को संबोधित कर उनके अंदर अपनी संस्कृति व सभ्यता के प्रति गर्व का भाव तथा भारत के प्रति भावनात्मक लगाव पैदा करने की कोशिश की। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित अनेक संगठन लंबे समय से काम कर रहे हैं, इसलिए उन सभाओं का व्यापक असर हुआ। हमारे उत्सव और धार्मिक दिवसों से लेकर भारत के स्वतंत्रता दिवस आदि अलग-अलग देशों में भी धूमधाम से मनाए जाते हैं। भारतीय एवं भारतवंशी हिंदू संकोच और हिचक त्याग कर अपनी संस्कृति, सभ्यता और अध्यात्म को लेकर मुखर हुए हैं। भारत के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय प्रभाव के कारण उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। कोई भी समुदाय इस तरह उठकर खड़ा होगा तो स्वयं को श्रेष्ठ मानने वालों को समस्यायें पैदा होगी। हालांकि हिंदू प्रतिक्रिया में गुस्से में आ सकता है, किसी मजहब, पंथ या समुदाय से घृणा या उसके विरुद्ध हिंसा हिंदुओं के स्वभाव में नहीं।

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