Home लेख महापुरुषों के आदर्शों को पढ़ाने से होगा नई पीढ़ी का मार्ग प्रशस्त

महापुरुषों के आदर्शों को पढ़ाने से होगा नई पीढ़ी का मार्ग प्रशस्त

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  • चिकित्सा पाठ्यक्रमों में संघ विचारकों के पाठ

विवेक तिवारी, प्रदेश सह मीडिया प्रभारी भारतीय जनता पार्टी, मध्यप्रदेश

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आद्य सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और जनसंघ के संस्थापक पंडित दीनदयाल उपाध्याय को मध्य प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने फाउंडेशन कोर्स में देश के विचारकों के सिद्धांत तथा सांस्कृतिक व ऐतिहासिक धरोहर के विभिन्न विषयों में सम्मिलित किये जाने का निर्णय किया है। आजादी की लड़ाई में लोकमान्य तिलक (1920 तक ) के बाद किसी भी राजनेता ने देश के मूल निवासियों की चिंता नहीं की। ऐसे वातावरण और माहौल में स्वतंत्रता सेनानी डॉ. हेडगेवार ने आजादी प्राप्त होने के बाद मिलने वाली चुनौतियों को पहले से ही देख लिया था। इसीलिए उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में की।

डॉ. हेडगेवार आज विश्व की सबसे बड़ी सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था के संस्थापक थे जिसके अनेक अनुषांगिक संगठन भारतवर्ष ही नहीं, अपितु जगत कल्याण की अनवरत तपस्या में विश्व भर में लगे हुए हंै। उसी के बल पर आज हिंदू समाज भी संगठित है। डॉक्टरजी कहा करते थे-विवाद नहीं, संवाद करो, विचार करो, चिंतन करो पर, दिमाग पर बोझ मत रखो।

जब उनसे पूछा गया कि आप बच्चो को व्यस्त कैसे रखते हो? उनका चिंतन आपके अनुकूल कैसे करते हो? तो उन्होंने बताया कि मैं उन्हें ‘हंसी खेलÓ में सिखाता हूं। वे यह भी कहते थे कि समाज में परस्पर वैमनस्य, द्वेष और विघटन है। इसे दूर करने के लिए मैं एक ही बात करता हूं कि हम सब एक हैं। संघ में किसी भी प्रकार से जाति-पंथ का चिंतन नहीं होता क्योंकि हम वसुधैव कुटुम्बकम की अवधारणा पर कार्य करते हंै।

उसी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक और कार्यकत्र्ता थे जनसंघ / भारतीय जनता पार्टी के पितृपुरुष / संस्थापक पंडित दीनदयाल उपाध्यायजी। फाउंडेशन कोर्स फॉर अंडर ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन प्रोग्राम में मूल्य आधारित चिकित्सा शिक्षा एवं सेवा का पाठ पढ़ाने के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय को भी शामिल करना यह बहुत उचित कदम है। भारतीय जनता पार्टी विश्व की सबसे बड़ी पार्टी है और देश हित, समाज हित में अंतिम छोर तक के व्यक्ति के सर्वांगीण विकास हेतु योजनाएं बनाकर उन्हें क्रियान्वित करने के लिए परिश्रम करती है।

पंडित दीनदयाल उपाध्यायजी ने एकात्म मानव दर्शन का प्रतिपादन किया जो युगों से भारत राष्ट्र व संस्कृति की धुरी रहा है। जिसमें राजनीति, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, शाश्वत धर्म, सामाजिक सिद्धांत, जीवन दर्शन, विश्व एकात्मता, वैचारिक समग्रता, जीवन श्रद्धा, राष्ट्रीय भाव, उन्मुक्त अनुशासन एवं सदैव मंगलम के सिद्धांत शामिल हैं। जो आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने पहले थे और भविष्य में भी रहेंगे ।

डॉक्टर साहब और पंडितजी में एक बात बहुत समान थी – सहजता और सरलता। जब वह दोनों बोलते थे तो लगता था कि कोई बहुत अध्यनशील व्यक्ति बोल रहा है। आज केंद्र की भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में उसी विजन को ध्यान में रखते हुए नई शिक्षा नीति में भी आमूलचूल परिवर्तन किया है।

उसी दिशा में एक और कदम आगे बढ़ाया है मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने। दोनों महापुरुषों के अध्ययन से आगे आने वाली पीढिय़ों को आध्यात्मिक चिंतन धारा से पोषित श्रेष्ठ जीवन तथा आदर्शों को अपनाने का मार्ग प्रशस्त होगा । ऐसे महापुरुषों और उनके संगठनों- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी का अध्ययन देश के सर्वोत्तम शिक्षण संस्थानों जैसे आईआईएम और आईआईटी में भी केस स्टडीज के रूप में करवाया जाना चाहिए। छात्र इनसे जुड़कर सीखें-राष्ट्र आधारित संगठन शास्त्र व जीवन पद्धति।

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