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तिथियों पर तिथियां, ये इस सावन की खूबियां

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  • चंद्रमा का कोणीय चलन तय करता है तिथियों का नामकरण
  • अष्टमी के बाद दसमी , सप्तमी के बाद सप्तमी और एकम के बाद तीज – ये है सावन की खास चीज
  • सारिका घारू

आने वाला सावन है बेहद खास। 29 दिन के इस सावन माह में सप्तमी तिथि के अगले दिन फिर सप्तमी तिथि आ जाएगी। कृष्ण पक्ष की एकम के बाद द्वितिया एवं शुक्ल पक्ष की अष्टमी के बाद नवमी आयेगी ही नहीं ।

अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा के बीच अंतर शून्य डिग्री होता है। अगले लगभग 24 घंटे में चंद्रमा आगे बढ़ जाता है और यह अंतर 12 डिग्री हो जाता है। 12 डिग्री होने के लिये जो अवधि लगती है उसे तिथि कहते हैं। चंद्रमा, पृथ्वी की परिक्रमा अंडाकर पथ में करता है। इस कारण चंद्रमा पृथ्वी से हमेशा समान दूरी पर नहीं रहता है। इस कारण 12 डिग्री का कोण बनाने के लिये चंद्रमा को कभी ज्यादा चलना पड़ता है तो कभी कम दूरी। इसलिये तिथि की अवधि कभी 24 घंटे से अधिक होती है कभी 24 घंटे से कम। यह लगभग अवधि 26 घंटे और 19 घंटे के बीच हो सकती है। किसी दिन सूर्योदय के समय जो तिथि होती है वही तिथि पूरे दिन मानी जाती है,भले ही सूर्योदय के कुछ मिनिट बाद ही अगली तिथि आ रही हो।

अगर किसी तिथि की अवधि 24 घंटे से अधिक है और वह सूर्योदय से कुछ देर पहले ही आरंभ हुई हो तो वह अगले सूर्योदय के बाद भी जारी रहेगी इससे अगले दिन भी वही तिथि मानी जाएगी। जैसा कि इस सावन में कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि दो दिन रहेगी। इसे तिथि वृद्धि कहते हैं।

अगर किसी तिथि की अवधि 24 घंटे से कम है और वह सूर्योदय के बाद आरंभ हुई और अगले सूर्योदय के पहले ही समाप्त हो गई तो यह तिथि क्षय कहलाता है। जैसा कि इस सावन में कृष्ण पक्ष की द्वितीया एवं शुक्ल पक्ष की नवमी का क्षय है। तो इस माह समझें तिथियों का तथ्य और फुहारों के बीच आनंद लें सावन के झूलों का।

खास बातें सावन की

तिथि वृद्धि
सावन माह में 30 जुलाई को सप्तमी तिथि के अगले दिन 31 जुलाई को फिर सप्तमी तिथि आ जायेगी।
तिथि क्षय
25 जूलाई को एकम के बाद 26 जुलाई को द्वितिया आयेगी ही नहीं सीधे तृतीया तिथि आ जायेगी।
16 अगस्त को अष्टमी के बाद 17 अगस्त को नवमी आयेगी ही नहीं सीधे दसवीं तिथि आ जायेगी।
सावन माह
25 जुलाई से आरंभ होकर 22 अगस्त तक चलेगा इसमें 29 दिन होंगे।

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