Home लेख अध्ययन कक्ष : ‘शांकरी’ एक अतृप्त धारा

अध्ययन कक्ष : ‘शांकरी’ एक अतृप्त धारा

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  • शिवकुमार शर्मा

नर्मदा पर ताजा पुस्तक इस नदी को देखने का नया दृष्टिकोण देती है। ताजा पुस्तक ‘शांकरी’ भी ऐसी ही है। शिव पुत्री नर्मदाजी (नर्मदा नदी) के सम्बध में ऐसे लेखक द्वारा यह पुस्तक लिखी गई है, जिनकी शिक्षा-दीक्षा अभियांत्रिकी क्षेत्र की है। लेखक ने नर्मदा परिक्रमा की और पुस्तक के माध्यम से उनका यश अवगाहन किया है।

पुस्तक सरल भाषा शैली में लिखी गई है और देशी-विदेशी विद्वानों, संतों की टिप्पणियों को उद्धृत करते हुए नर्मदा के विभिन्न आयामों को समेटा गया है। पुस्तक धर्म के साथ, दर्शन और पर्यटन दोनों दृष्टि से पठनीय है। नर्मदा के सांगोपांग वर्णन में लेखक ने सनातन, जैन तथा इस्लाम धर्मो के समन्वय की अदभुत शक्ति और स्वरूप को चित्रित किया है।

पुस्तक में यत्र- तत्र आई वर्तनी अशुद्धियां अखरती हंै। पुस्तक को स्वामी मायानन्द चैतन्य के नर्मदा पंचांग, दयाशंकर दुबे के नर्मदा रहस्य, प्रभुदत्त ब्रम्हचारी के नर्मदा दर्शन, सुमित उपध्याय के मां नर्मदा (नर्मदे हर) नर्मदा-एक कहानी, अमृतलाल बेगड़ की ‘सौन्दर्य की नदी नर्मदा’ तीरे तीरे नर्मदा एवं अमृतस्य नर्मदा की श्रंखला की अगली कड़ी कह सकते हैं।

तपोभूमि नर्मदा श्री शैलेन्द्र नारायण शास्त्री घोषाल द्वारा, अमरकंटक से अमरकंटक तक (2006) में अनिल माधव दवे, नर्मदा समृद्धि और वैराग्य की नदी (नर्मदा नदी का इतिहास) सुरेश पटवा एवं श्री नर्मदापुराण का लेखन ज्वालाप्रसाद चतुर्वेदी द्वारा किया चुका है।

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