Home लेख तनाव प्रबंधन – क्यों न खुद ही सीखें ?

तनाव प्रबंधन – क्यों न खुद ही सीखें ?

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नागेश्वर सोनकेशरी

अमेरिका की सुपर स्टार जिमानास्ट सिमोन बाइल्स, जो पिछले चार बार की ओलंपिक चैंपियन रहीं हैं, उन्होंने अभी पांच दिन पहले ही टोक्यो ओलंपिक में अपने मानसिक स्वास्थ्य का हवाला देते हुए अचानक सभी प्रतिस्पर्धाओं से अपना नाम वापस ले लिया। जिसके लिए दुनिया के खेल संगठनों ने इनकी इस बात पर काफी तारीफ की। जब यह खबर मैंने टीवी पर देखी तभी मेरे मन में इस तनाव प्रबंधन के बारे में लिखने का ख्याल आया। हालंाकि ओलंपिक जैसी प्रतिस्पर्धाओं के लिए सभी खिलाड़ी शारीरिक रूप से काफी मेहनत करते हैं फिर भी आकांक्षाओं का दबाव उन पर बहुत ही ज्यादा रहता है और इसी वजह से वे कई बार वे आशंकित से होने लगते हैं। और यही आशंका, आत्मविश्वास में धीरे-धीरे कमी लाने लगती है। यह कमी तनाव में परिवर्तित होने लगती है, जिसका पता कभी-कभी उन खिलाडिय़ों को नहीं चल पाता है।

कई बार तनाव की शुरुआत समस्या का हल खोजने के प्रयत्न से शुरु होती है जिसमें निश्चित तौर पर उलझने आती हैं। इससे बचने का आसान उपाय यह है कि जिन भी चीजों या माहौल से आपको तनाव हो रहा है, उनसे कुछ समय के लिए दूरी बना ली जाए। इस दूरी के साथ ही, जब हम उस अवस्था से उत्पन्न बदलाव को सहज भाव से स्वीकार करने लगते हैं तो हमारे भीतर शांति महसूस होने लगती है। इस शांति के बाद हमें शनै: शनै: अपने कर्म व उद्देश्य की प्राथमिकता तय करनी चाहिए एवं जरूरत पडऩे पर भगवान से प्रार्थना व किसी भी अपने नजदीकी से मदद मांगने पर हिचकिचाना नहीं चाहिए।

कई बार हम जीवन की आपाधापी में इस कदर खो जाते हैं कि हमारे आसपास जो कुछ भी चल रहा होता है, वह हमारे नियंत्रण से बाहर हो जाता है और हमारे लिए तनावपूर्ण हो जाता है। इसी के विपरीत जब हम हल्के-फुल्के,सहज भाव से रहने लगते हैं तो तनाव काफी कम हो जाता है। और साथ ही यदि हमने अपने नजरिए को आशावादी व सकारात्मक बना लिया,तथा अपनी दिनचर्या व कामों को सुव्यवस्थित रखना सीख लिया तो कहना ही क्या। हमें चैन व आराम तथा इत्मीनान से हर काम करना चाहिए। यदि संतुलित भोजन कर रहे हैं व प्रभु प्रार्थना में मन को एकाग्र करने के लिए कुछ समय भी निकाल रहे हैं तो धीरे-धीरे आपका मन संतुलित होता जाएगा। इससे हमें सही जीवन शैली अपनाने की राह मिलती है व हम बहुत राहत महसूस करने लगते है। नियमित व्यायाम,अपने खुद के लिए कम से कम एक घंटे का समय निकालना, जिसमें आप अपना मनचाहा काम या हॉबी पूरी कर सकें।

लेखक- नागेश्वर सोनकेशरी ने पूर्व में अद्भुत श्रीमद्भागवत (मौत से मोक्ष की कथा) की रचना भी की है।

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