श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी

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  • नीरू सिंह ज्ञानी
    हमारे लिए सौभाग्य की बात है श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी का 400वां प्रकाश पर्व वर्ष हमारे जीवन में आया है। श्री गुरु तेग बहादुर जी का जन्म आज से 400 वर्ष पहले अमृतसर में पांच विशाख, विक्रमी सम्वत 1678 तदनुसार प्रथम अप्रैल 1621 को छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी के घर माता नानकी जी की कोख से हुआ।
    विश्व इतिहास में धर्म एवं मानवीय मूल्यों, आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वालों में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी का स्थान अद्वितीय है। हिंद की चादर श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी द्वारा सनातन धर्म की रक्षा के लिए शहादत दी गई। कमजोरों के रक्षक के रूप में जाने जाने वाले, गुरु तेग बहादुर साहिब जी ने गुरु नानक देव की शिक्षाओं का प्रचार करते हुए देश भर में यात्रा की। मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (यूडीएचआर) संयुक्त राष्ट्र संघ की घोषणा 10 दिसंबर, 1948 को अस्तित्व में आई, सभी मनुष्यों के मौलिक अधिकारों की स्थापना, जिसमें उनके अपने धर्म का पालन करने का अधिकार भी शामिल है, को सार्वभौमिक रूप से संरक्षित किया जाना चाहिए। पर इसकी नींव बहुत पहले रखी गई थी जब नौवें सिख गुरु, तेग बहादुर जी ने 11 नवंबर, 1675 को अपने जीवन का बलिदान दिया था। भारतीय इतिहास में यह चुनौती भरा काल खंड था जब विदेशी मुगल शासक भारतीयों पर अमानुषिक अत्याचार कर रहे थे। ऐसे समय में श्री गुरु तेग बहादुर साहिबजी ने बिना प्राणों का मोह किए मानव धर्म का पालन करने और सनातन धर्म की रक्षा करने का निर्णय लिया ।
    मुगल-बादशाह-औरंगजेब ने श्री गुरु तेग बहादुर जी को मौत की सजा सुनाई थी, क्योंकि उन्होंने इस्लाम धर्म को अपनाने से इंकार कर दिया था। धर्म की रक्षा के लिए धर्म ध्वजा वाहक के रूप में इस अद्वितीय बलिदान ने देश की संस्कृति को सुदृढ़ बनाया और निर्भयता से जीवन जीने का मंत्र दिया। श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के बलिदान को भारत में धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के लिए लडऩे के पहले प्रयास के रूप में याद रखना चाहिए। नौवें सिख गुरु श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी ने मानवता, ईश्वर की प्रकृति, शरीर, मन, आत्मा, मृत्यु, उद्धार आदि जैसे विभिन्न विषयों पर लिखा और उनका दर्शन 59 शब्द, 57 श्लोक, और के रूप में पंजीकृत है। 15 रागों का उल्लेख पवित्र सिख ग्रंथ ‘श्री गुरु ग्रंथ साहिबÓ में किया गया है। सिर्फ श्री गुरु तेग बहादुर जी ने ही राग जेजावंती में भी वाणी उच्चारण की । उनकी संपूर्ण वाणी बेरागमई है। हम सभी को श्री गुरु तेग बहादुर जी की शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए और मानवता, स्नेह और एकता के संदेश को अपनाना चाहिए।
    अपना सिर छोड़ दो, लेकिन उन लोगों को मत छोड़ो जिन्हें तुमने बचाने का बीड़ा उठाया है। अपने जीवन का बलिदान करो, लेकिन अपने विश्वास को मत छोड़ोÓश्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी कमजोरों के एक दयालु उद्धारकर्ता थे, और उन्होंने यही उपदेश दिया। उन्होंने अपने शिष्यों को उन लोगों की रक्षा करना सिखाया जिन्हें सुरक्षा की आवश्यकता है, भले ही यह किसी के अपने जीवन की कीमत पर क्यों न हो।श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी ने दु:ख और खुशी के प्रति उदासीन रहने, चापलूसी और आरोप जैसे दोषों से छुटकारा पाने और हर दूसरे सांसारिक सुख के लिए दृढ़ विश्वास का उपदेश दिया। जब किसी ने आत्म-नियंत्रण की कला में महारत हासिल कर ली है तो वह वास्तव में आध्यात्मिक हो सकता है।
    हम सभी को श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए और मानवता, स्नेह और राष्ट्रीय एकता के संदेश को अपनाना चाहिए। नौवें-गुरु-साहिब श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी को नमन्।
    (निदेशक, पंजाबी साहित्य अकादमी संस्कृति परिषद मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग)

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