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नरेंद्र मोदी के जीवन के कुछ अनछुए पहलू

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व व कृतित्व के कुछ अनछुए पहलुओं को सामने लाने वाला यह संस्मरणात्मक आलेख ‘जनसत्ताÓ के विशेष संवाददाता व राज्य सूचना आयुक्त रहे आत्मदीप की मोदी से अनौपचारिक बातचीत पर आधारित है। कुछ साल पहले यह बातचीत मोदी उनकी कार्यप्रणाली को जानने-समझने के लिये की गई थी। प्रस्तुत है प्रमुख अंश- मोदी बोले- दिखाई देने वाली (विजिबल) सुरक्षा व्यवस्था से बचाव सुनिश्चित होता है क्या। आतंकी हमले के कितने नये तरीके आ गये हैं। उनके आगे दिखावटी सुरक्षा कारगर नहीं होती भाई। इंदिरा गांधी को तो उन्हीं के सुरक्षा गार्डों ने प्रधानमंत्री निवास में ही मार डाला। उनके बाद प्रधानमंत्री राजीव गांधी को सर्वोच्च सुरक्षा प्राप्त होने के बावजूद कैसे सरे आम बम से उड़ा दिया गया। मोदी के इस जवाब से साफ हुआ कि वे अदृश्य सुरक्षा व्यवस्था पर ज्यादा भरोसा करते हैं।

  • आत्मदीप

बात पुरानी है, पर आज भी प्रासंगिक है। यह अनौपचारिक बातचीत नरेंद्र मोदी की बनावट के कुछ अनकहे पहलुओं पर रोशनी डालती है। तब मोदी दूसरी बार गुजरात के मुख्यमंत्री थे और विधानसभा चुनाव करीब थे। उनके अनायास बुलावे पर उनके घर पहुंचे तो उन्होंने सबसे पहले हमारे हालचाल पूछे। हमने भी हालचाल पूछते हुये कहा-आप इतने बड़े सरकारी घर में अकेले रहते हैं। आप पर काम का काफी दबाव रहता है। नतीजे में आपने अभी तक एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली है। आप लगातार ऑनलाइन और ऑफलाइन घंटो काम करते हैं। ऐसे में आप परिवार के किसी सदस्य को अपने साथ क्यों नहीं रख लेते, ताकि वह आपके खानपान, विश्राम आदि का ध्यान रख सके। मोदी का जवाब समझने लायक था। यह जवाब बताता है कि वे अपनी छवि के प्रति कितने सतर्क रहते हैं।

उन्होंने जवाब दिया-मोरारजी देसाई कितने कट्टर नैतिकतावादी थे। उन्होंने प्रधानमंत्री निवास में बेटे कांति देसाई को साथ रखा। इसके कारण मोरारजी की छवि पर कैसे आंच आई। इसलिये मैं किसी को साथ नहीं रखता। मैने अपने परिवार वालों को साफ कह रखा है कि वे कभी भी मेरे मुख्यमंत्री निवास में पांव न रखें। उन्हें जब भी मेरी जरूरत हो, मुझे फोन करें, मैं उनके पास दौड़ा चला आउंगा। उन्हें मेरे पास आने की जरूरत नहीं। आये तो लोग उनके साथ फोटो खींचकर, नजदीकी दिखाकर दुरूपयोग करने का प्रयास कर सकते हैं, अनावश्यक विवाद खड़े हो सकते हैं। मोदी बोले-जहां तक मेरी देखभाल का सवाल है, इसके लिये मुझे किसी सहारे की जरूरत नहीं।

मैं अपना ध्यान खुद रख सकता हूं। रोजाना 24 घंटे में से लगभग दो तिहाई समय काम करता हूं। फिर भी मेरी दिनचर्या सुव्यवस्थित है। मैं आने खानपान और फिटनेस का पूरा ध्यान रखता हूं। इसलिये आपने मेरे बीमार पडने की खबरें नहीं सुनी होगी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से मिले संस्कार और प्रशिक्षण ने मुझे स्वावलम्बी बनाया है। सांसारिक जीवन में आमतौर पर होने वाली अपेक्षाएं भी मुझ में नहीं हैं। अच्छे वस्त्रविन्यास का, सुशोभन दिखने का शौक जरूर है। परिवार के हालचाल पूछले पर मोदी ने बताया कि जिस कमरे में बैठकर हम बात कर रहे हैं, उतने से कमरे में मेरी मां रहती है। वो आज भी दस-बीस रूपये वाली हवाई चप्पल पहनती है।

मेेरे उस घर में फर्नीचर के नाम पर एक प्लास्टिक की कुर्सी है। भाईबंद अपने छोटे-मोटे काम धंधे से गुजारा करते हैं। हमने कहा, अभी तक हम जितने भी मुख्यमंत्रियों के निवास पर गये, वहां काफी तामझाम देखा। नेताओं, कार्यकर्ताओं, अफसरों, कर्मचारियों आदि का जमावड़ा देखा। लेकिन आपके मुख्यमंत्री निवास पर ऐसा कुछ नहीं दिखा, बल्कि एकदम उलट नजारा दिखा। इस निवास के बाहरी प्रवेश द्वार से लेकर भीतर तक बहुत ही कम अधिकारी-कर्मचारी दिखे। नेता, कार्यकर्ता वगैरह तो नजर ही नहीं आये। इस बड़े फर्क की कोई खास वजह? मोदी बोले-अपने पास उतने ही चुनींदा अधिकारी-कर्मचारी रखता हूं, जितने की वाकई जरूरत है।

नेता, कार्यकर्ता, अफसर आदि जो भी मिलने आते हैं, उन्हें बात होते ही यहां से रवाना कर देता हूं। काम होने के बाद किसी को यहां रूके रहने नहीं देता। रूके रहे तो फोटो खींचकर नजदीकी दिखाकर बेजा इस्तेमाल करने की आशंका रहती है। आपने मुख्यमंत्री निवास में छाई सन्नाटे की स्थिति की खास वजह पूछी तो उसका जवाब यह है कि अगर आप चापलूसों से घिरे रहते हैं तो वो आपका यशोगान करने में आपका मूल्यवान समय बर्बाद करते हैं और आपको जमीनी हकीकत का अहसास नहीं होने देते।

आप चापलूसों से जितना दूर रहेंगे, उतने की जमीन से जुड़े रहेंगे। चापलूसों से दूर रहने से आपका कीमती वक्त बचता है। मैं यही करता हूं। इसी कारण मेरे पास पर्याप्त समय होता है, जिसे मैं कम्प्यूटर पर बिताता हूं। इससे मुझे रोजाना काम की काफी जानकारियां भी मिलती हैं। हमने कहा, आप हम करीब पौने घंटे से बात कर रहे हैं। इस दौरान न आपके पास कोई फाइल आई, न आपके फोन की घंटी बजी और न ही कोई स्टाफ किसी काम से भीतर आया। जबकि दूसरे मुख्यमंत्रियों के यहां ऐसा नहीं होता। उनसे इतनी लंबी बातचीत के दौरान बीच-बीच में किसी न किसी रूप में व्यवधान आते रहते हैं। यह बड़ा अंतर कैसे ?

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