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विवादमुक्त पूर्वोत्तर की ‘शाह’ नीति

  • आदर्श तिवारी
    देश अथवा राज्य के विकास के प्रमुख कारकों का जब भी हम जिक्र करते हैं तो उसमें सबसे बड़ा कारक शांति और सुरक्षा की होती है क्योंकि राज्य का विकास तभी संभव हो सकता है, जब राज्य में चारो तरफ शांति का वातावरण हो। विवाद राज्य की समृद्धि के लिए बड़ा बाधक है किन्तु यह सच है कि आज़ादी के अमृत काल के दौरान भी कई राज्यों के बीच सीमा विवाद बना हुआ है। अन्तर्राज्यीय सीमा विवादसमय-समय पर हिंसक रूप भी ले लेती है, जो देश की शांति और अखंडता को ठेस पहुचाता है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इस विषय को समझने का प्रयास करें और सरकार के प्रयासों पर सरसरी तौर पर नज़र डालें तो नरेंद्र मोदी सरकार उत्तर-पूर्व राज्यों के सीमा विवादों के समाधान निकालने के लिए लगातार कारगर कदम उठा रही और जबसे अमित शाहने गृह मंत्रालय की कमान संभाली है, वह विवादमुक्त और शांति पूर्ण नार्थ-ईस्ट बनाने के बड़े विजन के साथ लगातार आगे बढ़ रहे हैं। देखा जाए तो बतौर गृह मंत्री अमित शाह ने कम समय में बड़ी लकीर खींची है। किन्तु यह देश का दुर्भाग्य है कि आजादी के इतने वर्षों के पश्चात भी ऐसे संवेदनशील और राष्ट्रीय सुरक्षा, एकता से जुड़े मुद्दे ठंडे बस्ते में थे, जिन्हें प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाना चाहिए था. खैर, देखा जाए तो नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह सरकार पूर्वोत्तर में शांति और विकास के जो मानक स्थापित किए हैं वो अभूतपूर्व है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह की आलोचना करने वाले भी दबी जुबान में यह स्वीकार करते हैं कि आज पूर्वोत्तर शांति के साथ विकास के पथ पर आगे बढ़ चुका है। अमित शाह चरणबद्ध ढंग से उन विषयों पर संवेदन शीलता के साथ आगे बढ़ रहे हैं जो देश की आंतरिक शांति और सुरक्षा के लिहाज से काफी अहम है। पूर्वोत्तर का क्षेत्र आजादी के बाद से ही उपेक्षित रहा है। विकास के मायनों में यह क्षेत्र प्राथमिकता से वंचित रहा है। चाहे कारण जो भी रहे हैं किन्तु दशकों तक यह क्षेत्र अशांति और हिंसा में झुलसता रहा। उल्लेखनीय होगा कि समय के अनुरूप अब पूर्वोत्तर भी विकास की मुख्य धारा से जुड़ गया है। एक तरफ जहाँ केंद्र सरकार के विशेष प्रयासों से विकास की कई पहल शुरू हुई हैं, वहीं गृह मंत्री अमित शाह निरंतर हिंसा और अशांति के दंश झेल चुके क्षेत्रों को हमेशा के लिए शांति और हिंसा से मुक्ति के लक्ष्य के साथआगे बढ़ रहे हैं। उन प्रमुख प्रयासों को रेख्नाकित करना आवश्यक है ताकि यह समझा जा सके कि विकास और शांति दोनों के पथ में कौन सी ऐसी बाधाएं थी, जिसे नरेंद्र मोदी सरकार एक-एक करके खत्म कर रही है।

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