Home लेख 11 सितंबर सत्याग्रह दिवस : दक्षिण अफ्रीका में जन्मा था सत्याग्रह

11 सितंबर सत्याग्रह दिवस : दक्षिण अफ्रीका में जन्मा था सत्याग्रह

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रंजना चितले, कथाकार व रंगकर्मी

स्वराज का संकल्प और स्वतंत्रता का अभियान दो अलग-अलग बाते हैं। किंतु इन दोनों के मूल में केवल एक तत्व काम करता है, वह है सत्याग्रह। स्वदेशी स्वराज के पक्षधर गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका से लौटकर इसी तत्व की ताकत से ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी थी। सत्याग्रह समूचे स्वतंत्रता आंदोलन की प्राण शक्ति था। दक्षिण अफ्रीका से गांधीजी भारत में अंग्रेजी शासन से मुक्ति और स्वराज का संकल्प ही नहीं, शब्द सत्याग्रह भी अपने साथ लाये थे। गांधीजी ने सत्याग्रह शब्द की खोज दक्षिण अफ्रीका के ट्रांसवाल नगर में तब की थी जब वहां तत्कालीन गोरी सरकार के विरूद्ध छेड़े जाने वाले आंदोलन के लिए किसी ऐसे शब्द की तलाश थी जो आंदोलन में भारतीयों की संपूर्ण संवेदनाओं को परिभाषित कर सके। सत्याग्रह शब्द का जन्म वर्ष 1906 में हुआ।

गांधीजी ने बाकायदा प्रतियोगिता आयोजित कर सत्याग्रह शब्द की तलाश की। बात उन दिनों की है जब अफ्रीका में भारतीयों की बढ़ती आबादी एवं समृद्धि पर अंकुश लगाने के लिए गोरों की तत्कालीन सरकार ने एक खूनी कानून लागू किया। यूं उस कानून का नाम एशियाटिक बिल था किंतु उसे केवल हिंदुस्तानियों पर लागू किया गया था। विभिन्न धाराओं वाले इस कानून को 22 अगस्त 1906 के गजट में छापा गया था। कानून के कई बड़े प्रावधानों में यह भी था कि ट्रांसवाल में रहने वाले सभी भारतीय स्त्री-पुरुष और आठ वर्ष से ऊपर के बच्चों की सभी दसों उंगलियों के निशान, अपने शरीर की पहचान का विवरण सरकारी दफ्तर में जाकर देना होगा। यह निशान देकर ही ट्रांसवाल में निवास के लिए परवाना मिलेगा।

परवाने की जांच किसी भी वक्त रास्ता चलते या घर में घुसकर भी की जा सकती थी। नियमों का उल्लंघन करने पर सजा, जुर्माना अथवा देश निकाले तक का प्रावधान था। / ट्रांसवाल में तब भारतीयों की आबादी कोई दस हजार होगी। उन दिनों वहां से इंडियन ओपिनियन नामक पत्र भी छपने लगा। दक्षिण अफ्रीका के ट्रांसवाल में बसे भारतीयों ने कानून समझने और इंडियन ओपिनियन में अपना पक्ष प्रकाशन का काम गांधीजी को सौंपा और एक सभा बुलाई गई। 6 सितंबर 1906 को यहूदियों की एक नाटकशाला में सभा हुई। 6 सितंबर 1906 की इस सभा में भारतीयों ने पैसिव रेजिस्टेंस का प्रस्ताव तो पारित कर लिया किंतु गांधीजी को यह शब्द ज्यादा नहीं जंचा।

उनका मानना था कि जो लड़ाई अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ी जाए उसमें अंग्रेजी के ही शब्द का इस्तेमाल हो यह बात लज्जास्पद है और दूसरे इस शब्द में हमारी भावनाएं प्रतिबिम्बित नहीं होती और फिर इसका संदेश भी गलत जा सकता है। वे दरअसल शांत, संगठित, अहिंसक, शस्त्र रहित किंतु प्रभावी अभियान के पक्षधर थे। उन्होंने भारतीयों से इस आंदोलन के लिए कोई शब्द सुझाने की अपील की और चयनित शब्द पर पुरस्कार भी घोषित कर दिया।

गांधीजी को सबसे ज्यादा शब्द ‘सदाग्रह पसंद आया जो श्री मगनलाल गांधी ने भेजा था। मगनलाल जी ने लिखा था यह आंदोलन एक महान आग्रह है इसका उद्देश्य भारतीयों का शुभ अर्थात सद है इसलिए सद+आग्रह। गांधीजी ने इस शब्द को चुने जाने की घोषणा कर दी किंतु बाद में उन्होंने स्वयं सद् के स्थान पर सत्य जोड़ दिया। इसमें स्नेह है और संवेदनाएं भी जो भारतीयों के पूरे उद्देश्य को प्रतिबिम्बित करता है।

गांधीजी ने अपने आंदोलन के लिए केवल हिंदी का शब्द ही नहीं तलाशा बल्कि बाद की बैठकों में सारी कार्यवाही हिंदी या गुजराती में ही होती थी और अन्य क्षेत्रीय तमिल, तेलगू आदि भाषाओं में समझाने की व्यवस्था की जाती थी। इस तरह स्वदेशी के कट्टर समर्थक गांधीजी ने विदेश में रहकर अपने आंदोलन का नाम भी स्वदेशी भाषा में रखा और इसी सत्याग्रह शब्द को लेकर वे भारत लौटे जो स्वतंत्रता के संघर्ष और स्वराज के संकल्प में उनका सबसे बड़ा हथियार बना।

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