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रुचिकर विषयों में उच्च शिक्षा के अवसर दीजिए

  • डा.मनमोहन प्रकाश
    सामान्य रूप से मई-जून-जुलाई का समय विधार्थियों के लिए यूजी-पीजी के लिए विषय, उपाधि और शिक्षण संस्थान के चयन का समय होता है क्योंकि बोर्ड एवं तथा स्नातक उपाधि के परीक्षा परिणाम आ चुके होते हैं।नये विषय और शिक्षण संस्थानों में प्रवेश लेना होता है। यद्यपि यूजीसी इस सत्र से साल में दो बार प्रवेश प्रक्रिया की अनुशंसा की है।कुछ कोर्सेज(सामान्यतया तकनीकी शिक्षा) तथा कुछ शिक्षण संस्थानों में प्रवेश प्रतिस्पर्धी परीक्षा की मेरिट से होता है, कुछ लिखित टेस्ट के साथ साक्षात्कार को भी महत्व देते हैं। जबकि कुछ गैर-तकनीकी कोर्सेज में प्रवेश मेरिट से होता है।न सिर्फ माता-पिता अपितु शिक्षार्थी की भी यही इच्छा होती है कि उच्च शिक्षा के लिए उसे अच्छे विषय(ज्यादा रोजगार संभावना वाले) के साथ स्नातक और स्नातकोत्तर की शिक्षा के लिए किसी अच्छे शिक्षण संस्थान में प्रवेश मिले । उद्देश्य यही रहता कि कुछ बेहतर शिक्षा ग्रहण करने के साथ अनुशासित जीवन जीने को मिले, प्लेसमेंट की संभावना अच्छी हो तथा शिक्षण संस्थान का वातावरण पढ़ने-पढ़ाने का हो , विधार्थियों के बीच स्पर्धा स्वस्थ हो । ऐसा देखने में आया है यदि विधार्थी विज्ञान से अच्छे अंकों के साथ बारहवीं पास है तो मां-बाप की पहली पसंद अपने बच्चों को तकनीकी शिक्षा (इंजीनियर, डाक्टर, फार्मेसी , कृषि , पैरामेडिकल कोर्सेज आदि) दिलवाना या प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी के लिए अनुकूल विषय के साथ अच्छा संस्थान चुनना प्राथमिकता रहती है। आजकल कुछ दूसरे अच्छे रोजगारोन्मुखी कोर्सेज विकल्प के रूप में उपलब्ध हैं जिस ओर भी विधार्थी और उनके पालकों का ध्यान जा रहा है जैसे कृषि, पशुपालन,डेरी, फार्मेसी, खेलकूद, फोरेंसिक साइंस, फिशरीज, जैवप्रौद्योगिकी, बायो इंफोर्मेटिक्स, बीज तकनीकी, हॉर्टिकल्चर, कम्प्यूटर विज्ञान, आईटी,डाटा सांइस, साइबर तकनीक, मनोविज्ञान।जो विधार्थी गणित और विज्ञान में कमजोर है वे कला, वाणिज्य, मिडिया/पत्रकारिता, पुस्तकालय विज्ञान, की ओर रुख करते हैं।आजकल अर्थशास्त्र, शिक्षा,विधि और प्रबंधन के इंटीग्रेटेड कोर्सेज की ओर भी कुछ विधार्थियों का रुझान बढ़ा है। कोर्सेज कोई भी हो विधार्थियों की दिली इच्छा होती है कि वे आईआईटी,आईआईएम,
    एनआईटी, एम्स, आईआईएस,आईआईआईटी, जेएनयू ,जैसे ख्याति प्राप्त, अच्छी रैंकिंग वाले शिक्षण संस्थान से शिक्षा ग्रहण करें। जिन विद्यार्थियों ने पहले से ही शासकीय-प्रशासनिक सेवाओं में जाने के लिए मन बना लिया है वे कला के विषयों का चयन करना भी पसंद करते हैं वो भी हिंदी और अंग्रेजी साहित्य के साथ। यद्यपि डाक्टर, इंजीनियर तथा अन्य विषयों में स्नातक एवं स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त कर लेने के बाद भी उच्च प्रशासनिक सेवाओं(आईएएस, आईएफएस, आईपीएस, आईएसएस, पीसीएस आदि), बैंकिंग सेक्टर तथा सेना में जाने की ओर रूझान बढ़ा है क्योंकि इन सर्विसेज में तुलनात्मक दृष्टि से सुविधाएं/अधिकार अधिक है, समाज में सम्मान भी ज्यादा है। संगीत, नाट्य और पेंटिंग की पढ़ाई करने वाले कम ही युवा शिक्षार्थी रहते हैं पर जो है वो पूरी तरह से अपने विषय के लिए समर्पित दिखाई देते हैं।
    शिक्षाविद् होने के नाते मेरा ऐसा मानना है कि शिक्षा ग्रहण करने के लिए, विशेषज्ञता हासिल करने के लिए वस्तुत: सभी विषय अच्छे हैं, सभी में रोजगार की संभावनाएं भी हैं यदि विधार्थी पूर्णमनोयग से, क्षमता और मेहनत से, ईमानदार तरीके से, एकनिष्ठ, एक लक्ष्य (श्रेष्ठ शिक्षा हासिल करना) रखकर विषय की शिक्षा ग्रहण करता है, विषयों की शिक्षण सामग्री को आत्मसात करता है, विषय के सैद्धांतिक और प्रायोगिक पहलुओं को समझता है और अच्छी ग्रेड से उत्तीर्ण होता है।
    ऐसा देखने में आता है कि विषय चुनने के संबंध में कुछ ही ऐसे भाग्यशाली विद्यार्थी होते हैं जिन्हें अपनी पसंद के विषय चुनने का अवसर मिलता है अन्यथा ज्यादातर विधार्थी माता-पिता, भाई-बहन, नाते- रिश्तेदार द्वारा सुझाए गए विषयों का ही चयन करते हैं या फिर दोस्त जिस विषय को पढ़ने के लिए चुनता है उसका चयन करते हैं। यह भी देखने में आया है कि विधार्थियों को पढ़ने के लिए थोपे गए विषय या अरुचिकर विषय आगे जाकर अवसाद का कारण बन सकते हैं।

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