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एक खिलाड़ी नवीन पटनायक

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  • ओलंपिक हॉकी में भारतीय टीम की विजय

आज 41 वर्षों बाद पुरुष हॉकी टीम ने पदक का सूखा समाप्त किया है । वहीं दूसरी तरफ महिला हॉकी टीम पहली बार ओलंपिक में पदक जीतने के दहलीज पर खड़ी है। इस जीत के जश्न में उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को भी याद किया जा रहा है।

  • कुलिन्दर सिंह यादव, स्वतंत्र पत्रकार
    kulindaryadav5412@gmail.com


भारतीय हॉकी टीम ने टोक्यो ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन करते हुए 41 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद जर्मनी को 5-4 के अंतर से हराकर हॉकी का ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम कर लिया है। भारत के लिए सिमरनजीत सिंह, हरमनप्रीत सिंह, रूपिंदर पाल सिंह और हार्दिक सिंह अंतिम मैच के हीरो रहे । इसके अतिरिक्त भारत द्वारा पूरे टूर्नामेंट में जिस प्रकार से बेहतर प्रदर्शन किया गया उसके लिए खिलाडिय़ों के साथ-साथ सहयोगी स्टॉफ की जितनी प्रशंसा की जाए वह कम है।

मौजूदा वल्र्ड रैंकिंग में तीसरे स्थान पर मौजूद भारत ने ब्रॉन्ज मेडल के लिए खेले गए इस मुकाबले में खराब शुरुआत करते हुए जर्मनी को बढ़त का मौका दे दिया था। लेकिन बाद में लगातार भारतीय खिलाडिय़ों ने वापसी करते हुए पेनाल्टी कार्नर को गोल में बदलकर और गोलकीपर श्रीजेश द्वारा कुछ शानदार बचाव के साथ भारतीय टीम ने जर्मनी को पटखनी दे दी। इससे पहले भारत ने हॉकी में अपना आखिरी मेडल 1980 की मास्को ओलंपिक में जीता था। उस वर्ष कप्तान वासुदेवन भास्करण की अगुवाई में भारत ने गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया था । उसके बाद से अब तक का भारत का सबसे अच्छा प्रदर्शन 1984 के लास एंजिल्स ओलंपिक में था, जहां पुरुष हॉकी टीम पांचवें स्थान पर रही थी।

इस जीत के साथ ही भारत ने ओलंपिक हॉकी में अपने पदक का सूखा 41 वर्षों बाद समाप्त कर लिया है। वहीं दूसरी तरफ महिला हॉकी टीम भी पुरुष टीम की इस जीत से गौरवान्वित महसूस कर रही होगी और निश्चित तौर पर जब 6 अगस्त को भारतीय महिला हॉकी टीम और ग्रेट ब्रिटेन के बीच ब्रॉन्ज मेडल के लिए मुकाबला खेला जाएगा तो निश्चित तौर पर महिला हॉकी टीम के खिलाड़ी भी ओलंपिक में महिला हॉकी टीम के पदक के सूखे को खत्म करने के लिए पूरा प्रयास करेंगे। यदि ऐसा रहा तो निश्चित तौर पर हम कह सकते हैं कि भारतीय हॉकी को अब पुरानी पहचान मिलेगी।

आज टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी पुरुष और महिला टीम द्वारा धमाकेदार खेल दिखाए जाने के बाद पूरे देश में जश्न का माहौल है । देश के बड़े-बड़े औद्योगिक घरानों से लेकर विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों समेत भारत सरकार द्वारा भारतीय हॉकी टीम को बेहतर प्रदर्शन के लिए बधाइयां दी जा रही हैं। लेकिन जिस शख्स ने भारतीय हॉकी की सूरत बदली उसके लिए एक भी पंक्ति कहीं भी इन महान हस्तियों द्वारा नहीं लिखी गई है। आमतौर पर खेलों के महाकुंभ में शामिल होने वाली टीम को बड़े कारपोरेट स्पॉन्सर करते हैं लेकिन भारतीय हॉकी के साथ ऐसा नहीं है।

रअसल भारतीय हॉकी टीम को ओडिशा सरकार स्पॉन्सर कर रही है। आपको बताते चलें वर्ष 2018 में सहारा ने भारतीय पुरुष और महिला हॉकी से आधिकारिक स्पॉन्सरशिप वापस ले ली थी। उस समय किसी औद्योगिक घराने ने और न ही किसी अन्य राज्य ने भारतीय हॉकी का बीड़ा उठाने की जरूरत समझी। लेकिन उस संकट की घड़ी में ओडिशा सरकार ने भारतीय हॉकी की मदद की और अगले 5 सालों तक राष्ट्रीय टीमों को प्रायोजित करने का करार किया और इन्हें नया जीवन प्रदान किया। जब उड़ीसा राज्य सरकार ने यहं फैसला लिया तब आलोचकों ने हैरानी जताई कि वर्ष भर में दर्जनभर प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने वाला यह गरीब राज्य इस खेल के लिए सरकारी खजाने से क्या 100 करोड़ रूपए वहन कर पाएगा? लेकिन नवीन पटनायक का फैसला सही साबित हुआ है।

दूसरी तरफ महिला हॉकी टीम पहली बार ओलंपिक में पदक जीतने के दहलीज पर खड़ी है। आज ओलंपिक में भारतीय टीम जिस तरह का खेल दिखा रही है उसे देखते हुए ओडिशा सरकार की प्रशंसा लाजमी है। आज जब देश और विदेश में भारतीय हॉकी की प्रशंसा हो रही है। पुरुष और महिला टीमों ने जब विरोधियों को अपना दमखम दिखा कर चारों खाने चित किया है तो देश के उद्योगपतियों द्वारा भारतीय टीमों के लिए पुरस्कारों की घोषणाएं की जा रही हैं।

आपको बताते चलें जब भारतीय महिला हॉकी टीम सेमीफाइनल में पहुंची थी तो सूरत के मशहूर हीरा व्यापारी सावजी ढोलकिया ने स्वर्ण पदक जीतने पर महिला हॉकी टीम के प्रत्येक सदस्य को घर या कार पुरस्कार के तौर पर देने की घोषणा की। समस्या यह है कि भारत जैसे देश में क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों पर उतना ध्यान और निवेश नहीं किया जाता है।

जितना उन खेलों में आधारभूत ढांचे पर निवेश करने की जरूरत है। भारत में प्रतिभाशाली खिलाड़ी भी हैं उनकी तकनीक विश्वस्तरीय है लेकिन पर्याप्त आधारभूत ढांचे की कमी की वजह से भारतीय खिलाड़ी यूरोपीय और ऑस्ट्रेलियाई शैली की बराबरी नहीं कर पाते हैं। आवश्यकता है कि भारत सरकार और राज्यों की सरकारों द्वारा बाद में जो धन वर्षा की जाती है यदि वही धन वर्षा खिलाडिय़ों को आधारभूत संरचना दिलाने में की जाए तो निश्चित तौर पर भारत यूरोपीय और अन्य देशों की भांति पदक तालिका में शीर्ष देशों की सूची में देखने को मिलेगा और सिर्फ तीन से चार खेल ही नहीं बल्कि दर्जनों खेलों में भारतीय खिलाड़ी पदक लेकर आएंगे ।

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