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राजनीति में सहजता के पर्याय नरेंद्र सिंह तोमर

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  • नई पीढ़ी के कार्यकर्ताओं के लिए अनुगम्य और प्रेरणादायी राजनेता

राजनीति के इस दौर में जहां धैर्य लुप्तप्राय तत्व है वहीं यह तोमरजी की सबसे बड़ी पूूँजी है। अवसरवादी राजनीति से परे यह खासियत उन्हें सरकार व संंगठन दोनोंं का ही प्रिय बनाती हैं। जबकि उनकी जड़ें राजनीति की जमीन पर गहराई तक हैं। वृस्तित जनाधार और लोकप्रियता की छांव उन्हें सहज, सरल, सौम्य और कुशाग्र बनाती है, यहीं उनके धैर्य और शक्ति-सामथ्र्य का आधार भी है। ऐसे में यह कहने में संकोच नही है कि तोमर नई पीढ़ी के कार्यकर्ताओं के लिए इसलिए भी अनुगम्य और प्रेरणादायी हैं।

  • सुदर्शन गुप्ता

ना किसी से ईष्र्या,
ना किसी से कोई होड़ है,
मेरी अपनी मंजीले,
मेरी अपनी दौड़ है!!

ऐसा लगता है किसी शायर ने ये लाइनें मप्र के वरिष्ठ भाजपा नेता व केन्द्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर के व्यक्तित्व को देखते हुए लिखी हंै। क्योंकि भारतीय जनता पार्टी की नई पीढ़ी में अपने सहज, सरल और सफल व्यक्तित्व व कृतित्व से जनता के बीच गहरी छाप छोडऩे वाले नेताओं में नरेन्द्र सिंह तोमर का नाम सबसे आगे है। हालांकि वह संगठनात्मक क्षमता के साथ ही प्रशासन पर मजबूत पकड़ और कुशल रणनीतिकार के रूप में जाने जाते हैं, लेकिन मौजूदा राजनीति में वह सहजता और संवेदनशीलता के पर्याय भी हैं।

राजनीति में विवादों से परे पार्षद से लेकर केंद्रीय मंत्री बनने तक का सफर तय करने वाले तोमर की संवेदनशीलता का आंकलन इसी से लगाया जा सकता है कि कोरोना संक्रमण का हवाला देते हुए समर्थकों से आज अपने 67वें जन्मदिन पर किसी तरह के आयोजन से दूरी बनाए रखने की अपील करने से नही चूके। वजह यह है कि वह जानते हंै कि कोरोना संक्रमण के बीच शुभकामनाओं के होर्डिंग-बैनर या दूसरे आयोजनों पर खर्च की जाने वाली जरूरतमंदो के काम आ सकती है।

कोरोनाकाल में अपने परिजनों को खोने वाले परिवारों की आर्थिक और सामाजिक संबल की जरूरत को महसूस करने और उनकी मदद के लिये समर्थकों से अपील करने वाले तोमर की सहजता का इससे बड़ा उदाहरण क्या होगा कि वह इतने बड़े ओहदे पर पहुंचने के बाद भी स्वयं को एक सामान्य कार्यकर्ता और कार्यकर्ताओं के सहयोग और स्नेह को सौभाग्य मानते हैं।

इतना ही नही, सहजता के आवरण में ढंके उनके कुशल राजनैतिक व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे सब कुछ करने, परिणाम देने व समर्थ होने के बावजूद भी स्वयं श्रेय लेने पर विश्वास नहीं करते। वे अपनी उपलब्धियों को साझा करते हैं। काम को तवज्जो देने वाले तोमर की एक और खासियत है, जो दूसरे से उन्हें अलग करती है। वो है विवादों में फंसे बिना विवादों को सुलझाना।

सरकार के लिये चिंता का विषय बने किसान आंदोलन और कोरोना से अर्थव्यवस्था को उबारने में दिया गया योगदान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी व गृह मंत्री श्री अमित शाह जैसे दोनों शीर्ष नेताओं का विश्वसनीय बनाता है। इसीलिए जब भी सरकार या संगठन के सामने कोई संकट सामने होता है तो उससे निपटने वाला पहला चेहरा श्री तोमर का ही सामने आता है।

शायद यह कम लोग जानते हैं कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस को सरकार से बाहर का रास्ता दिखाकर पुन: भाजपा की सरकार बनाने की केंद्रीय भूमिका में कोई और नहीं, श्री तोमर ही रहे।

यह बात अलग है कि जोड़तोड़ की सरकार में श्री शिवराज सिंह चौहान के फिर से मुख्यमंत्री बनने की घटना ने सभी को चौंका दिया। लेकिन जो सबको पता नही है वह यह है कि तोमर ने मित्रता धर्म निभाने के लिए खुद के लिये परोसी गई थाली को दूसरी ओर बेझिझक खिसकाने में देर नही लगाई। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अक्सर अपने भाषणों में कहते हैं कि नरेंद्र सिंह तोमर और मैं दो जिस्म एक जान हैं । इन दोनों नेताओं कां संगठन से जबरदस्त सामंजस्य है ।


राजनीति के इस दौर में जहां धैर्य लुप्तप्राय तत्व है वहीं यह तोमरजी की सबसे बड़ी पूूँजी है। अवसरवादी राजनीति से परे यह खासियत उन्हें सरकार व संंगठन दोनोंं का ही प्रिय बनाती हैं। जबकि उनकी जड़ें राजनीति की जमीन पर गहराई तक हैं। विस्तृत जनाधार और लोकप्रियता की छांव उन्हें सहज, सरल, सौम्य और कुशाग्र बनाती है, यहीं उनके धैर्य और शक्ति-सामथ्र्य का आधार भी है। ऐसे में यह कहने में संकोच नही है कि तोमर नई पीढ़ी के कार्यकर्ताओं के लिए इसलिए भी अनुगम्य और प्रेरणादायी हैं कि इकाई स्तर से शिखर की राजनीति तक का सफर किस धैर्य व संयम के साथ किया जाता है।

पार्षद से केंद्रीय मंत्री तक

ग्वालियर नगर निगम की पार्षदी से चुनाव यात्रा शुरू करने वाले श्री तोमर लगन, निष्ठा और समर्पण का एक आदर्श व जीवंत प्रमाण है। यदि यह है तो व्यक्ति के उत्कर्ष को कोई बाधा नहीं रोक सकती है। वह तरुणावस्था में ही देश की मुख्य राजनीतिक धारा से जुड़ गए थे।

आपातकाल के बाद 1977 में जब केन्द्र व प्रदेश में जनता पार्टी की सरकार थी तब वे पार्टी के मण्डल अध्यक्ष बने। अपनी प्रभावी कार्यशैली और वक्तृत्व कला के जरिए वह मोर्चे के प्रदेश भर के युवाओं के चहेते बन गए। परिणामत: युवा मोर्चा में विभिन्न पदों पर रहते हुए 1996 में वह भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बने और मेरे जैसे हजारों कार्यकर्ताओं को उन्होंने गढ़ा है ।

पहली बार 1998 में ग्वालियर से विधायक निर्वाचित हुए और इसी क्षेत्र से वर्ष 2003 में दूसरी बार चुनाव जीता। इस दौरान वे सुश्री उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमंडल में कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री भी रहे। वर्ष 2008 में भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए और उसके बाद वे 15 जनवरी 2009 में निर्विरोध राज्यसभा सदस्य चुने गए। बाद में वे पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री पद पर रहे। 16 दिसम्बर 2012 को पार्टी के वह दूसरी बार प्रदेशाध्यक्ष बनाए गए।

केंद्रीय नेतृत्व ने 2009 में उन्हें14वी लोकसभा चुनाव में में मुरैना लोकसभा सीट से चुनाव लड़वाया। जहां से वह प्रचंड बहुमत से जीत कर लोकसभा पहुंचे। 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपनी सीट बदली और ग्वालियर से लोकसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। इसके बाद वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी सरकार में स्टील और कृषि मंत्री बनाये गये। 2019 के आम चुनावों में वह पुन: मुरैना से जीतकर केंद्रीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री के तौर पर कार्य कर रहे हैं।

किसान के बेटे

नरेंद्र मोदी सरकार में कृषि और पंचायती राज मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर का जन्म 12 जून 1957 मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में पोरसा विकासखंड के तहत आने वाले ग्राम ओरेठी में मुंशी सिंह तोमर नामक किसान के परिवार में हुआ। उन्होंने ग्वालियर के जीवाजी विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा ग्रहण की है।

बचपन से ही राजनीति में रुचि के कारण छात्र दिनों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से छात्र संघ के अध्यक्ष के रूप राजनितिक जीवन की शुरुआत की है। श्री तोमर अद्भुत व्यक्तित्व के धनी है और प्रदेश व देश के हजारों लाखों कार्यकर्ताओं के दिलों में राज करने वाले यह नेता अपने कार्यकर्ताओं की पूरी चिंता करते हैं। कार्यकर्ताओं द्वारा बताई गई समस्याओं को गंभीरता से सुनकर उसका निराकरण करने का पूरा प्रयास करते हैं । लगभग सवा वर्ष से चले आ रहे, कोरोना महामारी के दौरान जिस भी कार्यकर्ता ने उन्हें अपनी समस्या व परिवार की समस्या को बताया, उन्होंने तत्काल समाधान का प्रयास किया है।

(लेखक वरिष्ठ भाजपा नेता व पूर्व विधायक हैं)

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